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खीर भवानी मंदिर : इस मंदिर के कुंड का पानी अगर पड़ जाए काला तो आती है विपत्ति
खीर भवानी का यहं प्राचीनी मंदिर एक बहती हुई धारा पर किया गया है। अगर यहां मौजूद झरने के पानी का रंग काला पड़ जाए, तो पूरे क्षेत्र पर विपत्ती आने का संकेत साफ पता चलने लगता है।
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो अपने में ही काफी रहस्मयी हैं। ऐसा ही एक मंदिर है खीर भवानी का जो श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर तुल्ला मुल्ला गांव में स्थित है। इस मंदिर में मां खीर भवानी को केवल खीर का ही भोग लगता है।
खीर भवानी का यहं प्राचीनी मंदिर एक बहती हुई धारा पर किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां के स्थानीय लोंगो में ऐसी मान्यता है कि अगर यहां मौजूद झरने के पानी का रंग काला पड़ जाए, तो पूरे क्षेत्र पर विपत्ती आने का संकेत साफ पता चलने लगता है।
यहां मई के महीने में पूर्णिमा के आठवें दिन बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ दिन पर देवी के कुंड का पानी बदला जाता है।

काला पानी
कुंड का पानी अगर सफेद से काला हो जाए तो आती है विपत्ती

मां को चढ़ाते हैं खीर
इस मंदिर में मां को खीर चढ़ाई जाती है और भक्तों में प्रसाद के रूप में खीर ही मिलती है।

कश्मीर में आने वाले संकत का था पहले से पता
क्या आप जानते हैं कि जब 2014 में कश्मीर में बाढ़ा आई थी, तब भी इस मंदिर के कुंड का पानी काला हो गया था।

हनुमान जी ने किया देवी का आसन किया स्थानांतरित
हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, देवी जी रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर उसके समक्ष प्रकट हुई थीं। रावण ने श्रीलंका में देवी की एक प्रतिमा स्थापित की थी, लेकिन रावण के जीवन के अनैतिक तरीकों से क्रुद्ध देवी ने हुनमान को उनका आसन वहां से कश्मीर स्थानांतरित करने का आदेश दिया। जिसे हनुमानजी ने मान लिया और कश्मीर में उनका उनको स्थापित कर दिया।



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