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कुछ ही दिनों में हिन्दू धर्म के महापर्वों में से एक महाशिवरात्रि को पूरी श्रद्धा से मनाया जाएगा। हिन्दू धर्म में भगवान शिव के पूजन के कुछ विशेष दिन ही होते हैं, उनमें से सबसे ख़ास शिवरात्रि का दिन होता है। इस दिन भगवान् शिव की खास पूजा अर्चना की जाती है, व्रत का पालन किया जाता है, कई ख़ास चीजें शिव को अर्पित की जाती हैं, और विशेष स्नान के साथ-साथ शिवलिंग का रुद्राभिषेक भी किया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 18 फ़रवरी को पड़ने वाला है। भगवान् शिव की पूजा और रुद्राभिषेक करके भक्तजनों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें सुख एवं सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में महादेव के रुद्राभिषेक के समय किसी भी गलती से बचना चाहिए। आइये जानते हैं उन गलतियों के बारे में ताकि उनसे बचा जा सके -

दिशा का रखें ख्याल
शिवलिंग पर जल चढाते हुए अपने खड़े होने की दिशा का ख़ास ख्याल रखना चाहिए। पूर्व एवं पश्चिम की ओर खड़े होकर जलाभिषेक बिलकुल नहीं करना चाहिए। पश्चिम दिशा में भगवान् की पीठ होती है इसलिए इस ओर से जल देने से फल की प्राप्ति नहीं होती है। जलाभिषेक करते समय व्यक्ति को हमेशा दक्षिण दिशा में ही खड़ा होना चाहिए, ताकि प्रक्रिया के दौरान मुख उत्तर दिशा हो जिस दिशा में देवी देवताओं का वास होता है।

जल चढ़ाने के बर्तन के धातु का रखें ख्याल
जिस बर्तन या पात्र से आप शिवलिंग पर जलाभिषेक करने वाले हैं उसके धातु का भी ध्यान रखना चाहिए। शिवलिंग पर तांबे और स्टील के लोटे से जल ना चढ़ाएं। जल चढ़ाने के लिए पीतल, चांदी और कांसे के बर्तन को ही प्रयोग में लाएं।

जल कैसे चढ़ाएं
कभी भी जल्दबाजी में शिवलिंग पर जलाभिषेक नहीं करना चाहिए। जातक धीरे धीरे जल चढाते हुए मन्त्रों का जाप और शिव का ध्यान करे। इसके साथ ही शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय तुलसी का प्रयोग वर्जित होता है, इसलिए तुलसी का प्रयोग जलाभिषेक में बिलकुल न करें।

जलाभिषेक के बाद ना करें परिक्रमा
जलाभिषेक पूरा करने के पश्चात शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। अभिषेक के पश्चात् बहा हुआ जल पवित्र हो जाता है, इसलिए परिक्रमा करके उसको लांघना नहीं चाहिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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