ओणम 2019: शुरू होने वाला है दस दिवसीय त्योहार, जानें किस दिन क्या होता है खास

भारत में हर धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं और इनके अपने कुछ खास त्योहार भी हैं। कई पर्व ऐसे हैं जिनकी धूम पूरे देश में रहती है तो कुछ किसी खास राज्य में मनाए जाते हैं। ओणम दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला विशेष त्योहार है। उत्तर भारत में जिस तरह लोग दिवाली को लेकर उत्सुक रहते हैं, उसी तरह दक्षिण में ओणम की धूम देखने को मिलती है। ओणम विशेषतौर से केरल में मनाया जाता है।

किसानों का त्योहार

किसानों का त्योहार

भले ही ओणम किसानों का त्योहार है लेकिन इसे यहां के सभी लोग मनाते हैं। ओणम के प्रति लोगों का उत्साह देखते ही बनता है। यह केरल में दस दिनों तक मनाया जाता है। सरकार भी इस त्योहार को बढ़ावा देती रही है ताकि इस राज्य में टूरिज्म बढ़ाया जा सके। ये सभी के प्रयासों का ही नतीजा है कि ओणम के दौरान यहां लोगों की भारी भीड़ पहुंचती है।

ओणम कब है

ओणम कब है

ओणम पर्व मलयालम सोलर कैलेंडर के अनुसार चिंगम महीने में मनाया जाता है। यह मलयालम कैलेंडर का पहला महीना होता है। तमिल कैलेंडर में इसे अवनि महीना कहा जाता है। जब थिरुवोनम (श्रवना) नक्षत्र चिंगम माह में आता है तब ओणम का त्योहार मनाया जाता है।

साल 2019 में ओणम 1 सितंबर से शुरू होगा और 13 सितंबर तक मनाया जाएगा। ओणम में थिरुवोनम बहुत खास दिन होता है जो 13 सितंबर को होगा।

ओणम का महत्व

ओणम का महत्व

चिंगम महीने में ओणम के साथ चावल की फसल का पर्व भी मनाया जाता है। ओणम की कहानी असुर राजा महाबली और भगवान विष्णु से जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि हर साल ओणम पर्व के दौरान राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने और उनका हालचाल जानने के लिए केरल आते हैं। अपने राजा के सम्मान में ही लोग इस त्योहार का आयोजन करते हैं।

दस दिनों का होता है ओणम

दस दिनों का होता है ओणम

पहला दिन - अथं - पहले दिन राजा महाबली पाताल से केरल जाने की तैयारी करते हैं।

दूसरा दिन - चिथिरा - पूक्कलम अर्थात फूलों की कालीन बनाने का काम शुरू किया जाता है।

तीसरा दिन - चोधी - इस दिन पूक्कलम में 4 से 5 तरह के फूलों की अगली लेयर तैयार की जाती है

चौथा दिन - विशाकम - चौथे दिन अलग अलग तरह की प्रतियोगिताएं शुरू की जाती हैं।

पांचवा दिन - अनिज़्हम - इस दिन नौका रेस की तैयारी होती है।

छठा दिन - थ्रिकेता - इस दिन से लोगों की छुट्टियां प्रारम्भ हो जाती है।

सातवां दिन - मूलम - मंदिरों में खास पूजा की शुरुआत होती है।

आठवां दिन - पूरादम - इस दिन लोग अपने घरों में राजा महाबली और वामन की प्रतिमा स्थापित करते हैं।

नौवा दिन - उठ्रादोम - इस दिन राजा महाबली केरल में प्रवेश करते हैं।

दसवा दिन - थिरुवोनम - मुख्य पर्व

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