Latest Updates
-
Akshaya Tritiya Wishes: घर की लक्ष्मी को इन खूबसूरत संदेशों के जरिए कहें 'हैप्पी अक्षय तृतीया' -
Akshaya Tritiya Vrat Katha: अक्षय तृतीया के दिन जरूर पढ़ें यह कथा, मिलेगा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद -
Parshuram Jayanti 2026 Wishes: अधर्म पर विजय...इन संदेशों के साथ अपनों को दें परशुराम जयंती की शुभकामनाएं -
Akshaya Tritiya 2026 Wishes: सोने जैसी हो चमक आपकी...अक्षय तृतीया पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Akshaya Tritiya Wishes For Saasu Maa: सासु मां और ननद को भेजें ये प्यार भरे संदेश, रिश्तों में आएगी मिठास -
Aaj Ka Rashifal 19 April: अक्षय तृतीया और आयुष्मान योग का दुर्लभ संयोग, इन 2 राशियों की खुलेगी किस्मत -
Akshaya Tritiya 2026 Upay: अक्षय तृतीया पर करें ये 5 उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा से सुख-संपत्ति में होगी वृद्धि -
World Liver Day 2026: हर साल 19 अप्रैल को क्यों मनाया जाता है विश्व लिवर दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और थीम -
Nashik TCS Case: कौन है निदा खान? प्रेग्नेंसी के बीच गिरफ्तारी संभव या नहीं, जानें कानून क्या कहता है -
कश्मीर में भूकंप के झटकों से कांपी धरती, क्या सच हुई बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी?
Rath Yatra 2021 में कब शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की यात्रा, क्या है इसका महत्व? जानें यहां
हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को भगवान जगन्नाथ की यात्रा ओड़िशा के पूरी शहर में आयोजित होती है। इस यात्रा में जगन्नाथ जी अपनी बहन सुभद्रा जी और भाई बलभद्र जी के साथ भ्रमण के लिए निकलते हैं।
ऐसा माना जाता है कि एक बार जब सुभद्रा जी अपने मायके आई थी तो उन्होंने घूमने की इच्छा व्यक्त की थी जिसके बाद जगन्नाथ जी जो विष्णु भगवान के ही अवतार है अपनी बहन की इस इच्छा को पूरा करने के लिए रथ पर सवार होकर निकल पड़े थे। तब से प्रत्येक वर्ष यह रथ यात्रा निकलती है जिसमें लाखों भक्त हिस्सा लेते हैं।
इस विशाल रथ यात्रा में सबसे आगे बलभद्र जी का रथ होता है जिसे लाल ध्वज भी कहा जाता है। इसके बाद सुभद्रा जी का पद्म रथ होता है और अंत में विष्णु जी का रथ नंदी घोष होता है। अपनी इस यात्रा में सबसे पहले भगवान अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर जाते हैं।
कहते हैं जो भी भक्त इस रथ यात्रा में शामिल होता है ईश्वर की कृपा से उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

जगन्नाथ पूरी मंदिर की मूर्तियों का निर्माण
उड़ीसा के पूरी शहर में जगन्नाथ जी का भव्य मंदिर है। भगवान की इस नगरी को जगन्नाथ पुरी भी कहा जाता है। इस मंदिर में जगन्नाथ जी के साथ उनके भाई बलभद्र जी और बहन सुभद्रा जी की लकड़ियों की मूर्ति है। इन मूर्तियों का निर्माण राजा इंद्रद्युम्न के करवाया था जो भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे।
इन तीनों मूर्तियों के हाथ पैर नहीं है। एक पौराणिक कथा के अनुसार इन मूर्तियों को विश्वकर्मा जी बनाया था। जब वे इनका निर्माण कर रहे थे तो उन्होंने अपने कक्ष में किसी को भी प्रवेश नहीं करने के लिए कहा था लेकिन राजा ने उनकी बात नहीं मानी और वो उनके कमरे में चला गया जिसके बाद विश्वकर्मा जी ने मूर्तियों को अधूरा ही छोड़ दिया।

इस वर्ष कब है रथ यात्रा?
इस बार रथ यात्रा 12 जुलाई से शुरू होगी। भगवान की यह यात्रा 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन समाप्त हो जाएगी।

रथ यात्रा का महत्व
ऐसी मान्यता है कि भगवान साल में एक बार अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए उनके बीच आते हैं। जो भी व्यक्ति सच्चे मन और श्रद्धा से इस दौरान पूजा पाठ करता है उसे मनचाहा फल मिलता है। केवल भगवान के दर्शन करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications











