Latest Updates
-
इस Mother's Day मां को दें किचन से 'Off', बिना गैस जलाए 10 मिनट में बनाएं ये 3 लाजवाब डिशेज -
Mother's Day 2026: 50 की उम्र में चाहिए 30 जैसा ग्लो ! महंगे फेशियल नहीं आजमाएं ये 5 घरेलू नुस्खे -
Mother's Day Wishes for Chachi & Tai Ji: मां समान ताई और चाची के लिए मदर्स डे पर दिल छू लेने वाले संदेश -
क्या आपने कभी खाया है 'हरामजादा' और 'गधा' आम? मिलिए Mango की उन 14 किस्मों से जिनके नाम हैं सबसे अतरंगी -
Mother's Day 2026 Wishes for Bua & Mausi: मां जैसा प्यार देने वाली बुआ और मौसी को भेजें मदर्स डे पर ये संदेश -
Periods Delay Pills: पीरियड्स टालने वाली गोलियां बन सकती हैं जानलेवा, इस्तेमाल से पहले जान लें ये गंभीर खतरे -
वजन घटाने के लिए रोज 10K कदम चलना सबसे खतरनाक, एक्सपर्ट ने बताए चौंकाने वाले दुष्परिणाम -
Maharana Pratap Jayanti 2026 Quotes: महाराणा प्रताप की जयंती पर शेयर करें उनके अनमोल विचार, जगाएं जोश -
Shani Gochar 2026: रेवती नक्षत्र में शनि का महागोचर, मिथुन और सिंह सहित इन 5 राशियों की लगेगी लॉटरी -
Aaj Ka Rashifal 9 May 2026: शनिवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेंगे सितारे
Rath Yatra 2021 में कब शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की यात्रा, क्या है इसका महत्व? जानें यहां
हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को भगवान जगन्नाथ की यात्रा ओड़िशा के पूरी शहर में आयोजित होती है। इस यात्रा में जगन्नाथ जी अपनी बहन सुभद्रा जी और भाई बलभद्र जी के साथ भ्रमण के लिए निकलते हैं।
ऐसा माना जाता है कि एक बार जब सुभद्रा जी अपने मायके आई थी तो उन्होंने घूमने की इच्छा व्यक्त की थी जिसके बाद जगन्नाथ जी जो विष्णु भगवान के ही अवतार है अपनी बहन की इस इच्छा को पूरा करने के लिए रथ पर सवार होकर निकल पड़े थे। तब से प्रत्येक वर्ष यह रथ यात्रा निकलती है जिसमें लाखों भक्त हिस्सा लेते हैं।
इस विशाल रथ यात्रा में सबसे आगे बलभद्र जी का रथ होता है जिसे लाल ध्वज भी कहा जाता है। इसके बाद सुभद्रा जी का पद्म रथ होता है और अंत में विष्णु जी का रथ नंदी घोष होता है। अपनी इस यात्रा में सबसे पहले भगवान अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर जाते हैं।
कहते हैं जो भी भक्त इस रथ यात्रा में शामिल होता है ईश्वर की कृपा से उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

जगन्नाथ पूरी मंदिर की मूर्तियों का निर्माण
उड़ीसा के पूरी शहर में जगन्नाथ जी का भव्य मंदिर है। भगवान की इस नगरी को जगन्नाथ पुरी भी कहा जाता है। इस मंदिर में जगन्नाथ जी के साथ उनके भाई बलभद्र जी और बहन सुभद्रा जी की लकड़ियों की मूर्ति है। इन मूर्तियों का निर्माण राजा इंद्रद्युम्न के करवाया था जो भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे।
इन तीनों मूर्तियों के हाथ पैर नहीं है। एक पौराणिक कथा के अनुसार इन मूर्तियों को विश्वकर्मा जी बनाया था। जब वे इनका निर्माण कर रहे थे तो उन्होंने अपने कक्ष में किसी को भी प्रवेश नहीं करने के लिए कहा था लेकिन राजा ने उनकी बात नहीं मानी और वो उनके कमरे में चला गया जिसके बाद विश्वकर्मा जी ने मूर्तियों को अधूरा ही छोड़ दिया।

इस वर्ष कब है रथ यात्रा?
इस बार रथ यात्रा 12 जुलाई से शुरू होगी। भगवान की यह यात्रा 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन समाप्त हो जाएगी।

रथ यात्रा का महत्व
ऐसी मान्यता है कि भगवान साल में एक बार अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए उनके बीच आते हैं। जो भी व्यक्ति सच्चे मन और श्रद्धा से इस दौरान पूजा पाठ करता है उसे मनचाहा फल मिलता है। केवल भगवान के दर्शन करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications