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जन्माष्टमी की पूजा करने की विधि
हर साल, जन्माष्टमी के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है। पूरी दुनिया में इस जन्मोत्सव को सबसे ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। हर जगह लोग बहुत खुशी और उल्लास से सारे कार्यक्रमों और पूजाओं को आयोजित करते हैं।
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इस दिन कई स्थानों पर झांकी लगती हैं तो कहीं मटकी फोड़ी जाती है, इस तरह सब लटखट भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिवस मनाते हैं।
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अगर आपने नई गृहस्थी बसाई है और आप भी इस वर्ष कृष्ण जन्मोत्सव मनाना चाहते हैं तो निम्न विधि से पूजा शुरू करें। जानिए जन्माष्टमी की पूजा का विधि-विधान

1. जानिए भगवान कृष्ण के बारे में:
सबसे पहले आपको भगवान श्री कृष्ण के बारे में संक्षिप्त जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए आपको कुछ किताबों या इंटरनेट या टीवी पर उनकी कहानियों को पढ़ना व देखना चाहिए। इससे आपको पूजा करते समय फील आएगा। वैसे जन्माष्टमी के दिन सिर्फ बालगोपाल (कृष्णजी के बचपन के रूप) की पूजा की जाती है। उनका जन्म किया जाता है और उन्हे परिवार का पहला सदस्य माना जाता है।

2. फलाहार व्रत:
अधिकांश स्थानों पर जन्माष्टमी के दिन व्रत रखा जाता है। इस दिन रोटी, चावल, नमक और अनाज से बनी खाद्य सामग्री खाना मना होता है। आप फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। दूध भी पिया जा सकता है।

3. निर्जल व्रत:
इस प्रकार का व्रत थोड़ा कठिन होता है। इस व्रत में पानी भी नहीं पिया जाता है। पूजा करने के बाद ही व्यक्ति कुछ खा पी सकता है।

4. पूजास्थल सजाना:
अपने मंदिर या पूजास्थल को अच्छी तरह सजाएं। पूजा सामग्री को एकत्रित कर लें।

5. अपने लड्डू गोपाल को स्नान करवाएं:
लड्डू गोपाल को खीरे में रखें और ठीक 12 बजे उस खीरे को चीरकर लड्डू गोपाल को निकाल लें। उन्हे दूध और दही को गंगाजल में मिलाकर उससे स्नान करवाएं। इसके बाद, अच्छे से वस्त्र उन्हे पहना दें।

6. स्नान के लिए अन्य सामग्री:
गंगाजल, तुलसी के दल, चंदप का लेप, पंचामृत, खुशबु वाला तेल, रूई, शीशा, कपड़े, फूल, अगरबत्ती, घी, लैम्प, भोग और प्रसाद। इन सभी को पहले ही तैयार कर लेना चाहिए।

7. सजाना:
नहलाने और कपड़े पहनाने के बाद, लड्डू गोपाल को मुकुट लगा दें, उन्हे गले में मोतियों की माला पहनाएं। माथे पर टीका लगा दें।

8. भोग लगाएं:
तैयार करने के बाद, भोग लगाएं। इसके लिए आपको पहले से ही भोग तैयार रखना होगा।

9. आरती:
भोग लगाने के पश्चात् आरती करनी होती है। इसमें आरती का भजन करना होता है। परिवार के सभी लोग खड़े होकर भगवान कृष्ण के भजन और आरती गाते हैं। आप चाहें तो हरे राम हरे कृष्ण का जाप भी कर सकते हैं।

10. कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का महत्व:
कहा जाता है कि इस दिन रखा जाने वाला व्रत, एकादशी के व्रत से कहीं ज्यादा लाभप्रद होता है। इस दिन के बारे में माना जाता है कि भगवान नारायण प्रकट हुए, उनसे युधिष्ठिर ने पूछा कि जन्माष्टमी व्रत का क्या लाभ है, तो उन्होने कहा कि इस दिन जो भी व्यक्ति व्रत रखता है उसे धन, स्वास्थ्य और खाने की कभी कमी नहीं होती है।



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