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रामज़ान में रोजे़ रखें हैं, तो जरुर माने इन नियमों को

अल्लाह ने कुरान में कहा है कि आपके लिए रोजे़ रखने का निर्धारण किया गया है क्योंकि आपके पूर्वजों ने भी यह किया है। रोजे रखने का मतलब है, आप तकवा को प्राप्त करें यानि की अल्लाह से डरें।
जिस इंसान को तकवा होता है वह अच्छे काम करना पसंद करता है और अल्लाह के डर से बुरे कार्य नहीं करता है। रोजे रखने से तात्पर्य है कि अल्लाह का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अल्लाह की आज्ञा, आदेश और इच्छा को पूरी सिद्दत, वफादारी और लग्न से पालन करना।
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रमजान में रोजे रखना इस्लाम का मुख्य स्तम्भ है। यह हर मुसलमान के लिए अनिवार्य है जो कि शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ है। यह हर युवा और हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है जो कहीं कोई यात्रा नहीं कर रहे हैं।
महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान रक्त स्त्राव और प्रसव के बाद के रक्त स्त्राव के दौरान रोजा नहीं रखना चाहिए। प्रेग्नेंट महिला के लिए भी रोजा रखना अनिवार्य नहीं है।
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कुछ नियम हैं जिनका रमजान के दौरान पालन किया जाना चाहिए ताकि आपका रोजा सही हो और अल्लाह द्वारा स्वीकार हो। हम आपको कुछ ऐसे ही नियम बता रहे हैं...

दिन उगने से पूर्व भोजन (सहुर)
रोजा शुरू करने से पहले यह बहुत जरूरी है। यदि आप सहुर में कुछ खाये बिना ही रोजा रखते हों तो आपका रोजा मान्य नहीं होता है। सहुर लेने से कई फलों की प्राप्ति होती है। सहुर करने का सही समय दिन उगने से अंतिम आधा घंटे पूर्व या फ़जर की अजान के समय है।

इफ्तार या नाश्ता
सूर्यास्त के तुरंत बाद अपना रोजा खोल लें। इफ्तार में देरी ना करें। जब सूर्य क्षैतिज में चला जाता है और पूरी तरह छिप जाता है।

खाना और पीना
यदि आप भूलवश कुछ खा या पी लेते हैं तो इससे आपका रोजा खराब नहीं होगा और आप इसे जारी रख सकते हैं। फिर भी किसी भी कारण से जान बूझकर खाने पीने से आपका रोजा अमान्य हो जाता है।

उल्टी
यदि रोजे के कारण आपको उल्टी हो रही है और ऐसा आप जान बूझकर नहीं कर रहे हैं तो रोजा नहीं टूटता। फिर भी किसी भी कारण से जान बूझकर या खुद की गलती से की गई उल्टी से रोजा अमान्य हो जाता है।

नहाना
आपको रोजे में नहाने की इजाजत है। ज्यादा तापमान के कारण या प्यास के कारण यदि आपको लगता है तो आप नहा सकते हैं।

यौन संबंध
यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको लगातार 60 दिनों तक रोजा रखना होगा। यदि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं तो आपको 60 गरीब लोगों को खाना खिलाना होगा। इसे कफ्फराह कहा जाता है।

मासिक धर्म या प्रसव रक्त स्राव
यदि आप रोजा रख रही हैं और आपका मासिक धर्म शुरू हो जाता है तो आपका रोजा अमान्य हो जाता है और आपको उन दिनों में रोजा नहीं रखना चाहिए। और यदि इफ्तार से पहले भी रक्त स्त्राव हो जाता है तो भी रोजा नहीं माना जाता है। उस दिन का रोजा आप बाद में रख सकते हैं।

जीभ से खाने को चखना
अपने परिवार के लिए खाना बनाते समय आप इसे चख सकती है। लेकिन यह अंदर नहीं जाना चाहिए। आपका उद्देश्य केवल खाने में नमक और मसाले की मात्रा जाँचना ही होना चाहिए। इसे तुरंत बाद आप अपना मुह धो सकती हैं।

किस करना और अपनी पत्नी को गले लगाना
ऐसा करने की इजाजत है लेकिन इसका उद्देश्य यौन सुख प्राप्त करना नहीं होना चाहिए।

इंजेक्शन लेना
यदि आप ठीक नहीं हैं और रोजे के दौरान इंजेक्शन लेना चाह रहे हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं यदि यह सब मेडिकल कारणों से है तो।

खून निकालना
आप केवल बीमारी की जांच के लिए खून निकाल सकते हैं। फिर भी यदि आप ज्यादा खून निकालते हैं और आप में कमजोरी आती है तो आपका रोजा टूट जाएगा।

जानाबाह
यदि आप रात को अपनी पत्नी से प्यार करते हैं और सुबह घुसल (नहाना) नहीं लेते हैं तो आप अपवित्रता (जानाबाह) की स्थिति में होते हैं। फिर भी आप सहुर के बाद घुसल ले सकते हैं।



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