Latest Updates
-
Global Parents Day पर हमारे पहले मेंटर, पहले लीडर और सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम माता-पिता को भेजें ये कोट्स -
World Milk Day पर अपनों को बताएं दूध पीने के 10 बेमिसाल फायदे, हड्डियां रहेंगी वज्र जैसी मजबूत -
Global Parents Day 2026 Wishes: आपकी मुस्कान मेरी खुशी...ग्लोबल पेरेंट्स डे पर माता-पिता को भेजें ये खास संदेश -
MP Style Bafla Recipe: घर पर बनाएं मध्य प्रदेश का मशहूर और पौष्टिक नाश्ता -
World Milk Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व दुग्ध दिवस? जानिए इसका इतिहास, महत्व और थीम -
Aaj Ka Rashifal 01 June 2026: जून के पहले सोमवार इन 5 राशियों की खुलेगी किस्मत, बरसेगी महादेव की कृपा -
Summer Special Tinda Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं होटल जैसी स्वादिष्ट सब्जी -
आईटी मैनेजर की लाखों की नौकरी छोड़ थामा ऑटो का हैंडल, इस महिला की अनोखी कहानी जीत रही दिल -
Maghi Special Bihar Tilkut Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा और स्वादिष्ट तिलकुट -
Summer Hair Care: गर्मियों में बालों के लिए बेस्ट 5 हल्के तेल, बिना चिपचिपाहट के मिलेंगे लंबे और मजबूत बाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को भी है प्रवेश का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को फैसला सुनाया कि मौलिक अधिकार के आधार पर महिलाएं भी मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकती हैं। सीजेआई ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जो मंदिर में पुजारी नहीं है, वह मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकता है, तो एक औरत भी कर सकती है। हालांकि सुनवाई चल रही है और अंतिम निर्णय केवल आने वाले दिनों में ही पता चल पाएगा। फैसले इस तथ्य का समर्थन करते हैं कि मंदिर में महिलाओं को भी प्रार्थना करने का अधिकार दिया जाए।

केवल महिलाओं के लिए प्रतिबंध क्यों?
अब तक, मंदिर परिसर में प्रवेश करने के लिए 10 साल से कम उम्र और 50 साल से ऊपर की महिलाओं को अनुमति दी गई थी। क्योंकि कारण यह था कि 10 से लेकर 50 साल तक महिलाओं को मासिक धर्म होता है जिसे हिंदू धर्म में कुछ मान्यताओं के अनुसार, एक अशुद्ध जैविक चक्र माना गया था।
यही कारण है कि महिलाओं को दिन-प्रतिदिन की कई चीज़ों को करने की मनाही थी। इनमें से कुछ में मंदिर में प्रवेश करना, पूजा या अन्य प्रतिबंध जैसे कि अचार को छूना शामिल है। लेकिन प्रतिबंधों का पालन अकसर तब किया जाता था जब वे वास्तव में मासिक धर्म से गुज़र रही हों। उस समय अंधविश्वास इतना था कि महिलाओं को किसी भी वस्तु या व्यक्ति को छूने तक की इजाज़त तक नहीं थी। जब तक कि वे पीरियड्स के पहले दिन अपने बालों को धुल न लें। इस तरह के अंधविश्वास आजतक समाज में मौजूद हैं।
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को क्यों अनुमति नहीं दी जाती है?
सबरीमाला के इस बेहद लोकप्रिय मंदिर में प्रवेश केवल उन दिनों तक ही सीमित नहीं था जब महिलाएं मासिक धर्म से गुज़र रही थी, बल्कि मंदिर में प्रवेश के लिए पूरे आयु वर्ग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित भगवान अयप्पा स्वामी, एक ब्रह्मचारी थे जिन्होंने कभी शादी न करने का फैसला किया था। ब्रह्मचर्य का शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप से पालन करना चाहिए। शायद यही एक वजह थी कि महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित था, उन्हें ब्रह्मचर्य के लिये व्याकुलता के रूप में देखा गया था। इसके अलावा एक और कहानी है जिसकी वजह से महिलाएं मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती हैं।
मान्यता के अनुसार भगवान अयप्पा का जन्म राक्षसी को मारने के लिये हुआ था। जिनको शिव और वेषधारी विष्णु का रूप मोहनी का पुत्र माना जाता है और ये भी कहा जाता है एक विशेष कारण के लिए इस बच्चे का जन्म हुआ था। अयप्पन ने हमेशा ब्रह्चारी रहने की कसम खाई थी।
जब अयप्पन ने राक्षसी का वध किया तो वह राक्षसी एक खूबसूरत महिला के स्वरूप में प्रकट हो गई। उसने बताया कि उसे एक श्राप मिला था जिस वजह से वह राक्षसी जीवन जी रही थी। उसने अय्यप्पन से शादी करने का अनुरोध किया लेकिन अय्यप्पन ने उनसे विवाह करने से मना कर दिया लेकिन महिला नहीं मानी। तब अय्यप्पन ने एक शर्त रखी कि जिस साल कोई नया भक्त नहीं आएगा, उस समय वे उनसे शादी करेंगे।
हर साल वह प्रतीक्षा करती रहीं, लेकिन प्रतिवर्ष हज़ारों की तादाद में नए भक्त आते ही रहे और महिला की मनोकामना अधूरी रह गई। इन नए भक्तों को 'कन्नि स्वामी’ के नाम से जाना जाता है। अभी भी हर दिन सबरीमाला मंदिर में सैकड़ों नए भक्त दर्शन के लिये आते हैं।



Click it and Unblock the Notifications