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Basant Panchami Special: मां सरस्वती की विशेष कृपा पाने के लिए करें इस वंदना, आरती और मंत्र का जाप
माता सरस्वती को विद्या, समझ, बुद्धि और कला की देवी के रूप में पूजा जाता है। विद्या की देवी होने के कारण बच्चों के बीच इनका खासा महत्व है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसपर मां सरस्वती की विशेष कृपा बनी रहे। बसंत पंचमी का दिन सरस्वती माता को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता अवतरित हुई थीं और पूरी सृष्टि को उन्होंने अपने ज्ञान से खूबसूरत बनाया था। हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस मौके पर स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में सरस्वती माता की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस बसंत पंचमी पर आप भी माता सरस्वती से विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो इस आरती, वंदना और मंत्र का जाप अवश्य करें।

सरस्वती मंत्र
संपूर्ण मंत्र
ओम ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।
मूल मंत्र
ओम ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।
बाधाओं के निवारण के लिए मंत्र
ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी।
मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वाहा।।

सरस्वती वंदना
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥

सरस्वती माता की आरती
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
जाकी कृपा कुमति मिट जाए, सुमिरन करत सुमति गति आये।
शुक सनकादिक जासु गुण गाये, वाणि रूप अनादि शक्ति की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
नाम जपत भ्रम छूट दिये के, दिव्य दृष्टि शिशु उधर हिय के।
मिलहिं दर्श पावन सिय पिय के, उड़ाई सुरभि युग-युग, कीर्ति की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
रचित जासु बल वेद पुराणा, जेते ग्रन्थ रचित जगनाना।
तालु छन्द स्वर मिश्रित गाना, जो आधार कवि यति सती की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
सरस्वती की वीणा-वाणी कला जननि की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।।



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