प्रवाह का साथ

एक बहुत पुरानी टाओस्टि कहानी है। एक बुजुर्ग व्‍यक्ति अचानक से बहुत गहरे और खतरनाक झरने के पानी की तीव्र धारा में गिर गए। वहां उपस्थित जितने भी लोगों ने इस दुर्घटना को देखा, वह उस बुजुर्ग व्‍यक्ति के जीवन के बारे में चिंता करने लगे। लेकिन चमत्‍कारिक तर‍ह से वह बुजुर्ग व्‍यक्ति बिना किसी चोट के जीवित बच गए और झरने के किनारे पडे़ हुए थे।

आश्‍चर्यचकित भीड़ ने उत्‍सुकतापूर्वक उस बुजुर्ग व्‍यक्ति से पूछा- इतनी भयानक दुर्घटना होने के बावजूद आप जीवित कैसे बचे?

उस व्‍यक्ति ने शांत होकर कहा- मैनें पानी के हिसाब से खुद को ढाल लिया न कि पानी को अपने हिसाब से ढलने दिया। बिना सोचे समझे खुद को पानी की धारा में बहने दिया। जल के भंवर में भी उसी हिसाब से शरीर को छोड़ दिया और इस तरह मैं बच गया।

संकट की घडी में दिमाग से काम लेने पर मौत को भी हराया जा सकता है।

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