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मंगलवार को पढ़ें बजरंगबली से जुड़ी यह व्रत कथा, शीघ्र होगी संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी
अगर आपके जीवन में लगातार समस्याएं आ रही हैं तो मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा करना आपके लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होगा। वो हर तरह की परेशानी में अपने भक्तों का साथ देते हैं और सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले लोगों की कई मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं।
यहां तक की जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति की इच्छा है वे भी इस दिन हनुमान जी की आराधना करके मनचाहा फल प्राप्त कर सकते हैं।

ऐसी मान्यता है कि मंगलवार को विधिपूर्वक हनुमान जी पूजा के साथ साथ व्रत कथा और पाठ करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। घर बुरी शक्तियों से बचा रहता है। आइए जानते हैं कैसे करें मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और क्या है इस दिन से जुड़ी व्रत कथा।

पूजन विधि
हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार के अलावा शनिवार का दिन भी बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं सूर्यास्त के बाद का समय बजरंगबली की पूजा के लिए श्रेष्ठ होता है। सबसे पहले आप किसी हनुमान मंदिर या फिर घर पर इनकी प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद पुष्प चढ़ाएं, भगवान को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। प्रसाद के रूप में आप बेसन के लड्डू या फिर मोतीचूर के लड्डू का भोग लगा सकते हैं।
याद रखें कि बजरंगबली बाल ब्रह्मचारी थे इसलिए इनकी पूजा के दिन ब्रह्मचार्य का पालन ज़रूर करना चाहिए।

मंगल ग्रह का दिन
मंगलवार का दिन मंगल ग्रह का भी माना जाता है इसलिए इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।

इस मंत्र का करें जाप
बजरंगबली के आगे दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप अवश्य करें।
ऊँ रामदूताय नम:
ऊँ पवन पुत्राय नम:।
हनुमान चालीसा भी पढ़ें।

व्रत कथा
प्राचीन काल में एक ब्राह्मण दंपत्ति की कोई संतान नहीं थी जिसके कारण वे बहुत दुखी रहते थे। संतान प्राप्ति के लिए वे दोनों पति पत्नी हर मंगलवार को बजरंगबली की आराधना करते थे। बजरंगबली की पूजा करने के लिए वे घने जंगलों में जाते थे। दोनों पूजा करने के पश्चात भगवान को चढ़ाए हुए प्रसाद से अपना व्रत खोलते थे।
एक मंगलवार को किसी कारणवश ब्राह्मणी भोग के लिए कुछ नहीं बना पायी। इस बात से दुखी उसने निश्चय किया कि वह अगले मंगलवार को बजरंगबली को भोग लगाने के बाद ही अन्न ग्रहण करेगी। पूरे छह दिनों तक भूखा रहने के बाद मंगलवार के दिन ब्राह्मणी की तबियत अचानक ज़्यादा ख़राब हो गयी और वह बेहोश हो गयी। उसकी श्रद्धा देख बजरंगबली प्रसन्न हो गए और वरदान स्वरूप उसे एक पुत्र दिया और कहा कि वह दोनों पति पत्नी की सेवा पूरी उम्र करेगा।
ब्राह्मणी उस बच्चे को पाकर बहुत ही प्रसन्न थी। उसने उस बालक का नाम मंगल रखा। जब ब्राह्मण घर लौटा तो उस बालक को देख चौंक गया और पत्नी से उसके विषय में पूछा। तब ब्राह्मणी ने उसे सारी बात बताई लेकिन उसे अपनी पत्नी की बातों पर भरोसा नहीं हुआ।
एक दिन मौका पाकर ब्राह्मण ने उस बच्चे को कुएं में फ़ेंक दिया। अपने पुत्र को घर पर ना पाकर ब्राह्मणी बेचैन हो गयी और अपने पति से उसके बारे में पूछने लगी तभी पीछे से उस बालक ने उसे आवाज़ दी। बच्चे को देख ब्राह्मण आश्चर्यचकित हो गया। उसी रात बजरंगबली ने सपने में आकर ब्राह्मण को बताया कि उस बालक को वरदान स्वरूप उन्होंने ही दिया है। यह सुनकर ब्राह्मण बहुत खुश हुआ साथ ही उसे अपने किये पर भी पछतावा हुआ।
इसके बाद हर मंगलवार को ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ सच्चे मन और श्रद्धा से बजरंगबली की पूजा करने लगा।



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