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Veer Savarkar Jayanti 2023: सावरकर के विचारों से जानें उनका साहस
वीर सावरकर का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर है। सावरकर स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानी और राष्ट्रवादी नेता थे। आज यानि 28 मई को देश वीर सावरकर की जयंती मना रहा है।
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई बड़े नेताओं ने उन्हें याद किया। विनायक सावरकर की जयंती के मौके पर मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर मन की बात का क्लिप पोस्ट किया है। इसके जरिये उन्होंने देश के लोगों को विनायक सावरकर के साहस और आजादी में दिए उनके योगदान के बारे में बताया।

गौरतलब है कि विनायक दामोदर सावरकर दुनिया के अकेले ऐसे स्वंतंत्रता सेनानी थे जिन्हें एक नहीं बल्कि दो दो बार आजीवन कारावास की सजा मिली। उन्होंने सजा को पूरा किया और फिर से राष्ट्र जीवन में सक्रिय हो गए।
पीएम मोदी ने मन की बात में कहा कि वीर सावरकर ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 1857 की लड़ाई में भारतीयों के संघर्ष को अंग्रेजों के खिलाफ पहली लड़ाई कहने की हिम्मत दिखाई थी। उन्होंने आगे कहा कि यह मई का महीना बहुत ही खास है। यही वह महीना था जब भारत देश के वीर जवानों ने अंग्रेजों को अपनी ताकत दिखाई थी।
बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि वीर सावरकर दुनिया के पहले ऐसे कवि थे जिन्होंने अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले की मदद से कविताएं लिखीं और फिर उन्हें याद किया। इस प्रकार याद की हुई 10 हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुन: लिखा।
विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के मौके पर आपको भी देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले इस साहसिक और तेजस्वी शख्सियत के विचारों से रूबरू होना चाहिए।

1.
महान लक्ष्य के लिए किया गया कोई भी बलिदान व्यर्थ नहीं जाता है।
-वीर सावरकर

2.
अगर संसार को हिंदू जाति का आदेश सुनना पड़े, ऐसी स्थिति उपस्थित होने पर, उनका वह आदेश गीता और गौतम बुद्ध के आदेशों से भिन्न नहीं होगा।
-वीर सावरकर

3.
दूसरों का सम्मान करने की शक्ति रखने वालों में ही मैत्री संभव है।
-वीर सावरकर

4.
अपने देश की, राष्ट्र की, समाज की स्वतंत्रता - हेतु प्रभु से की गई मूक प्राथर्ना भी सबसे बड़ी अहिंसा का द्दोतक है।
-वीर सावरकर

5.
हमारी पीढ़ी ऐसे समय में और ऐसे देश में पैदा हुई है कि प्रत्येक उदार एवं सच्चे हृदय के लिए यह बात आवश्यक हो गई है कि वह अपने लिए उस मार्ग का चयन करे जो आहों, सिसकियों और विरह के मध्य से गुजरता है। बस, यही मार्ग कर्म का मार्ग है।
-वीर सावरकर

6.
कष्ट ही तो वह चाक शक्ति है जो मनुष्य को कसौटी पर परखती है और उसे आगे बढ़ाती है।
-वीर सावरकर

7.
हिंदू जाति की गृहस्थली है - भारत, जिसकी गोद में महापुरूष, अवतार, देवी-देवता और देव-जन खेले हैं। यही हमारी पितृभूमि और पुण्यभूमि है। यही हमारी कर्मभूमि है और इससे हमारी वंशगत और सांस्कृतिक आत्मीयता के सम्बन्ध जुड़े हैं।
-वीर सावरकर

8.
मन सृष्टि के विधाता द्वारा मानव-जाति को प्रदान किया गया एक ऐसा उपहार है, जो मनुष्य के परिवर्तनशील जीवन की स्थितियों के अनुसार स्वयं अपना रूप और आकार भी बदल लेता है।
-वीर सावरकर

9.
वर्तमान परिस्थिति पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा - इस तथ्य की चिंता किये बिना ही इतिहासलेखक को इतिहास लिखना चाहिए और समय की जानकारी को विशुद्ध और सत्य - रूप में ही प्रस्तुत करना चाहिए।
-वीर सावरकर

10.
प्रतिशोध की भट्टी को तपाने के लिए विरोधों और अन्याय का ईंधन अपेक्षित हैं, तभी तो उसमें से सद्गुणों के कण चमकने लगेगें। इसका मुख्य कारण है कि प्रत्येक वस्तु अपने विरोधी तत्व से रगड़ खाकर ही स्फुलित हो उठता है।
-वीर सावरकर



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