जन्माष्टमी पर यह 6 चीज़ें करती हैं श्री कृष्ण को अप्रसन्न

Krishna Janmashtami पर भूलकर भी न करें ये काम, हो जायेगा अनर्थ | Boldsky

जन्माष्टमी, श्री कृष्ण को समर्पित एक बहुत ही बड़ा पर्व है जिसे उनके भक्त पूरी श्रद्धा, उमंग और उत्साह से मनाते हैं। कृष्ण के जन्म से जुड़ा यह त्योहार हमें यह याद दिलाता है कि किस प्रकार उनके पिता वसुदेव ने कई सारी कठिनाइयों का सामना करके उन्हें सुरक्षित नन्द बाबा के घर पहुंचाया था।

भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण का जन्म धरती को पाप मुक्त करके धर्म की स्थापना करने के लिए हुआ था। इस बार जन्माष्टमी का उत्सव 2 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन जहां लोग भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए व्रत और पूजा करते हैं वहीं कुछ बातें ऐसी भी हैं जिनका जन्माष्टमी पर ख़ास ध्यान रखना चाहिए। तो आइए जानते हैं इस दिन किन चीज़ों को करना वर्जित माना गया है।

तुलसी के पत्ते तोड़ना

तुलसी के पत्ते तोड़ना

जन्माष्टमी पर भूल कर भी तुलसी के पत्तों को न तोड़ें। तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। कहते हैं माता तुलसी विष्णु जी से विवाह करना चाहती थीं। विष्णु जी को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए तुलसी जी ने कठोर तपस्या भी की थी। हालांकि, तुलसी के पत्ते विष्णु जी की पूजा में चढ़ाए जाते हैं इसलिए एक दिन पहले ही आप तुलसी के पत्तों को तोड़कर रख सकते हैं।

गरीबों का अनादर

गरीबों का अनादर

भगवान कृष्ण के लिए उनके सभी भक्त एक समान ही हैं चाहे वह अमीर हो या फिर गरीब। सुदामा, जो उनके सबसे करीबी दोस्तों में से एक था, बहुत ही गरीब था किन्तु फिर भी वह श्री कृष्ण को बहुत ही प्रिय था। इसलिए किसी भी गरीब का अपमान करना श्री कृष्ण को अप्रसन्न कर सकता है। गरीबों का अपमान करने से केवल श्री कृष्ण ही नहीं बल्कि शनि देव भी क्रोधित होते हैं, ख़ास तौर पर जन्माष्टमी के दिन। इसलिए भूलकर भी किसी निर्धन का दिल न दुखाएं। हो सके तो जन्माष्टमी पर गरीबों में अपने सामर्थ्य अनुसार दान करें।

पेड़ों को काटना

पेड़ों को काटना

जन्माष्टमी पर पेड़ों को काटना भी अशुभ माना गया है। इस दिन हमें उतने पेड़ लगाने चाहिए जितने हमारे परिवार के सदस्य हैं। इससे घर और परिवार में सुख और शांति बनी रहती है, साथ ही ढेरों खुशियां भी आती है। महाभारत के आठवें अध्याय में श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है कि वह हर चीज़ में वास करते हैं और हर चीज़ उनमें वास करती है इसलिए जन्माष्टमी पर हमें किसी को भी नुकसान पहुंचाने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए।

मांसाहारी भोजन खाना

मांसाहारी भोजन खाना

हिंदू धर्म में किसी भी व्रत और पूजा के दिन मांसाहारी भोजन खाना वर्जित माना गया है। पूरे चतुर्मास के दौरान मांस मछली का सेवन नहीं करना चाहिए।चतुर्मास पूरे चार माह का होता है यह समय भगवान विष्णु की निद्रा का समय होता है और उनकी अनुपस्तिथि में भगवान शिव उनकी सभी ज़िम्मेदारियां उठाते हैं। जन्माष्टमी पर शराब का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

शारीरिक संबंध

शारीरिक संबंध

जन्माष्टमी पर ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य होता है। इस दिन भगवान की पूजा पवित्र मन और तन से करनी चाहिए। यदि आप ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करेंगे तो आपकी पूजा विफल हो जाएगी।

गायों का अपमान

गायों का अपमान

भगवान कृष्ण को गायों से बहुत प्रेम है। उनके बचपन की सभी तस्वीरों में आप उन्हें गायों के साथ खेलता हुआ पाएंगे जो इस बात का सबूत है कि गाय उनके बहुत करीब है। ऐसी मान्यता है कि जो भी गाय की पूजा करता है उसे श्री कृष्ण का आशीर्वाद ज़रूर प्राप्त होता है। वहीं दूसरी ओर गायों का अपमान करने वाले को कृष्ण कभी माफ़ नहीं करते हैं। जन्माष्टमी पर गौशाले में दान करना चाहिए। इसके अलावा किसी भी घायल गाय की सेवा कर उसे भोजन कराने से श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं।

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