Saptarishis : भगवान शिव के शिष्य थे सप्त ऋषि, जानें कैसे हुई इनकी उत्पत्ति

हमारे देश में गुरु को हमेशा से ही ऊंचा दर्जा दिया गया है। गुरु की तुलना भगवान से की जाती है और यह सदियों से चला आ रहा है। पहले बड़े बड़े राजाओं और उनके बच्चों को शिक्षा देने का काम ऋषि मुनि का होता था। जब भी कोई बड़ी समस्या आती थी तो उसका समाधान ढूंढने के लिए राजा ऋषि मुनियों की सलाह जरूर लेते थे।

कई पौराणिक कथाओं में सप्त ऋषियों का उल्लेख किया गया है। आज हम आपको उन्हीं सप्त ऋषियों के बारे बताने जा रहे हैं। यहां हम आपको उनके नाम के साथ उनसे जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां देंगे।

सप्त ऋषियों में कौन कौन है?

सप्त ऋषियों में कौन कौन है?

कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और ऋषि भारद्वाज को सप्तर्षि कहा जाता है। आपको बता दें कि ये सभी मौजूदा काल के सप्तर्षि है।

कैसे हुई सप्त ऋषियों की उत्पत्ति?

कैसे हुई सप्त ऋषियों की उत्पत्ति?

कहते हैं ब्रह्मा जी ने अपने मस्तिष्क से सप्त ऋषियों की उत्पत्ति की थी। इसके बाद भगवान शिव इन ऋषियों के गुरु बने थे और उन्होंने ही इन्हें शिक्षा दी थी। ऐसी मान्यता है कि ईश्वर के साथ रोजाना इन सप्त ऋषियों के नाम का भी जाप करना चाहिए।

ऋषि कश्यप

ऋषि कश्यप

ऋषि कश्यप सबसे पहले ऋषि है जिनकी कुल 17 बीवियां थी। इनकी पत्नी अदिति से देवताओं की उत्पत्ति हुई थी वहीं इनकी बीवी दिति से दैत्यों का जन्म हुआ था।

ऋषि अ​त्रि

ऋषि अ​त्रि

ऋषि अत्रि की पत्नी अनसूया ने भगवान दत्तात्रेय को जन्म दिया था। वनवास के दौरान श्री राम इनके यहां ही रुके थे।

ऋषि भारद्वाज

ऋषि भारद्वाज

आयुर्वेद के साथ कई ग्रंथों की रचना करने वाले भारद्वाज ऋषि गुरु द्रोणाचार्य के पिता थे।

ऋषि विश्वामित्र

ऋषि विश्वामित्र

भगवान श्रीराम और लक्ष्‍मण जी को शिक्षा दीक्षा देने वाले ऋषि विश्वामित्र ही थे। इन्होंने गायत्री मंत्र की भी रचना की थी।

ऋषि गौतम

ऋषि गौतम

गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या थी। जब स्वयं ऋषि गौतम ने शाप देकर अहिल्या को पत्थर बना दिया था। तब श्रीराम ने उन्हें इस शाप से मुक्ति दिलाई थी।

ऋषि जमदग्नि

ऋषि जमदग्नि

ऋषि जमदग्नि भगवान परशुराम के पिता थे। परशुराम जी की माता का नाम रेणुका था। अपने पिता के कहने पर इन्होंने अपनी माता का सिर काट दिया था।

ऋषि वशिष्ठ

ऋषि वशिष्ठ

ऋषि वशिष्ठ भी भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के गुरु थे।

ऋषियों के नाम पर गोत्र

ऋषियों के नाम पर गोत्र

गोत्र का अर्थ होता है कुल या वंश। यदि किसी व्यक्ति का गोत्र कश्यप है तो वो ऋषि कश्यप की पीढ़ी का माना जाता है। ठीक इसी प्रकार से और भी गोत्र है जो इन ऋषियों के नाम पर है।

संसार में सुख शांति के लिए करते थे तपस्या

संसार में सुख शांति के लिए करते थे तपस्या

इन सात ऋषियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां आपको पद्मपुराण, विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण के अलावा और भी धार्मिक ग्रंथों में मिलेगी। इनमें लिखी हुई कथाओं के अनुसार इन ऋषियों का काम संसार में सुख शांति बनाए रखने का था। इसके लिए ये वर्षों कठिन तपस्या करते थे।

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