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9 दिन तक ही क्यों मनाया जाता है नवरात्रि का त्योहार, जानें क्या है पौराणिक कथाएं

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सोमवार से शारदीय नवरात्रि का पर्व शुरू हो रहा है। हिंदुओं के लिए ये पर्व काफी महत्व रखता है। नवरात्रि का यह पर्व साल में 2 बार मनाया जाता है। इन 9 दिनों मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त पूरे मन से मां की भक्ति में लीन हो जाते है। मंदिरों में अलग ही वतावरण होता है। हर जगह सकारात्मक ऊर्जा ही महसूस होती है। आखिर ये नवरात्रि का पर्व 9 दिनों तक ही क्यों मनाया जाता है, ये सवाल हममें से कितनों के दिल में कई बार आता है। लेकिन हमें इसका सही जवाब नहीं पता होता। नवरात्रि को 9 दिनों तक मनाने के पीछे कई कारण है। कुछ धर्म कथाएं हैं, तो कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं। इस लेख के जरिए हम आपको नवरात्रि के इस पर्व को 9 दिनों तक मनाने के कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं।

महिषासुर का वध

महिषासुर का वध

नवरात्रि पर्व को 9 दिनों तक मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा बहुत प्रचलित है। धरती पर महिषासुर नाम के असुर का प्रकोप था। असुरों के अत्याचार से हर हर चरफ त्राहिमाम मचा था। जिससे परेशान होकर सभी देवी-देवताओं ने एक साथ मिलकर महाशक्ति मां दुर्गा का आह्रवन किया। असुरों के प्रकोप से सबको बचाने के लिए मां दुर्गा प्रकट हुई। और असुरों के साथ युद्ध किया। मां दुर्गा के साथ असुरों का ये युद्ध 9 दिन और 9 रातों तक चला। दशमी के दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के असुर का भी वध कर सभी असुरों का विनाश कर दिया। तब से ही 9 दिन तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने की प्रथा शुरू हुई।

भगवान श्रीराम ने की मां की अराधना

भगवान श्रीराम ने की मां की अराधना

नवरात्रि की एक पौराणिक कथा भगवान श्री राम से भी जुड़ी है। भगवान राम ने वानरों की सेना के साथ मिलकर लंका में रावण का वध किया। लेकिन रावण का वध इतना आसान नहीं था। श्री राम और रावण के बीच युद्ध हुआ। रावण को मारने के लिए श्रीराम ने 9 दिनों तक देवी अनुष्ठान किया। आखिरी दिन देवी मां प्रकट होकर भगवान श्रीराम को जीत का आशीर्वाद दिया। जिसके बाद दशमी के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया। नवरात्रि को 9 दिन तक मनाने के पीछे ये भी एक प्रथा है।

भैरावनाथ का वध

भैरावनाथ का वध

एक और पौराणिक कथा के अनुसार देवी मां ने त्रिकुट पर्वत के पास एक गुफा में 9 महीने तक तपस्या की। आज के समय में इस पवित्र गुफा को अर्धक्वांरी गुफा के रूप में जाना जाता है। देवी मां की तपस्या में कोई रुकावट न आए। इसके लिए गुफा के बाहर हनुमान जी पहरा दे रहे थे। लेकिन जब भैरवनाथ ने अंदर जाने की कोशिश की तो इन दोनों में युद्ध हो गया। जिसके बाद मां खुद महाकाली के रूप में प्रकट हुई। और भैरवनाथ का सिर धर से अलग करके उसका वध कर दिया। जिसके बाद से भक्त 9 दिनों तक मां की अराधना करते हैं।

क्या कहता है विज्ञान

क्या कहता है विज्ञान

दोनों नवरात्रि शुरू होने से पहले मौसम में बदलाव आता है। चैत्र नवरात्र गर्मी शुरू होने से पहले आते हैं। शारदीय नवरात्रि सर्दियां शुरू होने से पहले आती है। इन दोनों ही समय मौसम में काफी परिवर्तन देखा जाता है। जिसका सीधा प्रभाव मानव के शरीर पर पड़ता है। इस दौरान लोगों को बुखार, खांसी, इन्फेक्शन जैसे समस्या से जुझना पड़ता है। इन दिनों में अपने खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए इन 9 दिनों लोगों को फल, कम और आसानी से पचने वाले भोजन खाने की जरुरत होती है। हमारे पूर्वजों को इस बात का पता था, इसलिए उन्होने व्रत रखने के साथ देवी की पूजा-अर्चना भी शुरू की। ताकि आने वाली पीढ़ी मां दुर्गा की भक्ति के साथ व्रत रखकर इस बदलते मौसम में अपना ध्यान रख सकें।

English summary

Why is Navratri celebrated for 9 days in hindi

Why the festival of Navratri is celebrated only for 9 days, this question comes in the heart of many of us many times. But we don't know the exact answer. There are many reasons behind celebrating Navratri for 9 days. Some are religious stories, some are scientific reasons. Through this article, we are going to tell you about the reasons for celebrating this festival of Navratri for 9 days.
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