Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख
श्रीकृष्ण ने जरासंध के 17वें प्रहार का क्यों किया इंतजार, पहले ही क्यों नहीं किया वध?
भगवान श्रीकृष्ण का धरती पर जन्म हर बार धर्म की रक्षा के लिए हुआ। कौरवों को पाठ पढ़ाना और अपने मामा कंस का वध करना कृष्ण का अहम मकसद था। अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृष्ण ने अपने बहुत से रिश्तों को दांव पर लगा दिए थे।

अपनी भावुकता को परे रखकर चालाकी से आगे बढ़ना उनकी पसंद नहीं बल्कि वक्त की मांग थी। श्रीकृष्ण का पूरा जीवन ही लोगों के लिए प्रेरणा बना।

जरासंध ने श्रीकृष्ण पर किये थे 17 बार प्रहार
एक कथा है जिसके अनुसार श्रीकृष्ण ने जरासंध का वध तब किया जब वो कृष्ण पर 17 बार हमले कर चुका था। श्रीकृष्ण सबसे शक्तिशाली थे तो फिर क्यों उन्होंने इतना इंतजार किया। इस सवाल का जवाब इस लेख के माध्यम से ढूंढते हैं कि आखिर श्रीकृष्ण ने क्यों जरासंध को 17 बार हमले करने का मौका दिया और फिर उसके बाद उसका वध किया।

कौन था जरासंध?
जरासंध श्रीकृष्ण के मामा कंस का ससुर था। जब श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया तब जरासंध अपने दामाद के वध से बहुत क्रोधित हुआ और उसने किसी भी कीमत पर श्रीकृष्ण को मारने का फैसला किया।

जरासंध ने शुरू की तैयारी
जरासंध ने अपनी सेना को तैयार करना शुरू किया। वो अपने जीवन के सबसे बड़े लक्ष्य, श्रीकृष्ण का वध करने के लिए तैयार था। इतना ही नहीं इस काम के लिए उसने दूसरे देशों के राजाओं से संधि की। इनमें वो राजा शामिल थे जो श्रीकृष्ण को पसंद नहीं करते थे।

जरासंध के प्रयास कैसे हुए व्यर्थ
जब जरासंध ने भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका की तरफ कूच किया तब उसके हाथ सिर्फ निराशा ही लगी। कृष्ण के मारने के प्रयास में उसे मिल भी क्या सकता था? और ऐसा सिर्फ एक बार नहीं हुआ। जरासंध ने कई प्रयास किये और हर बार वो नई योजना के साथ और ज्यादा शक्तिशाली राजाओं के साथ पहुंचा। इस काम के लिए तो जरासंध ने अपने दुश्मन राजाओं से भी हाथ मिला लिया था। लेकिन उसकी सारी कोशिशें बेकार ही रह गयी।
गौरतलब है कि इन पराजयों के बावजूद ना उसका हौसला कम हुआ और ना ही उसका यकीन। इसी धुन में उसने एक या दो नहीं बल्कि 17 बार कृष्ण को मारने की कोशिश की। हर बार कृष्ण उसकी सेना को खत्म कर देते और जरासंध को जीवित छोड़ देते।

17 प्रहार के बाद कृष्ण ने की जरासंध की हत्या
17वें प्रहार के बाद श्रीकृष्ण ने जरासंध को मारने की योजना बनाई। जरासंध का जन्म दो हिस्सों में दो अलग अलग माताओं से हुआ था। दोनों हिस्सों को जरा नामक असुरा की मदद से जोड़ा गया था और इसी वजह से उसका नाम जरासंध पड़ा। जरासंध के पास वरदान था कि वो मृत्यु के बाद पुनः जीवित हो सकता है। उसे मारने का एक ही तरीका था कि उसके शरीर को बीच से आधा किया जाए और दोनों हिस्सों को एक दूसरे से दूर फेंका जाए। कृष्ण ने कैसे बनाई जरासंध के मृत्यु की योजना आइए जानते हैं।

जरासंध की मृत्यु के लिए कृष्ण ने बनाई योजना
एक वक्त आया जब युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ कराना चाहा। गौरतलब है कि राजसूय यज्ञ कराने के लिए ये जरूरी है कि वो राजा एक शासक माना जाए और दूसरे देश के राजा भी उसे शासक के तौर पर स्वीकार करें। युधिष्ठिर जानते थे कि जरासंध उसे शासक के तौर पर स्वीकार नहीं करेगा इसलिए उन्होंने श्रीकृष्ण से संपर्क किया। कृष्ण ने भीम और अर्जुन को अपने साथ ब्राह्मण का वेश धारण करके मगध चलने के लिए कहा, जहां उन्होंने जरासंध को कुश्ती के लिए चुनौती दी।
जरासंध भीम के साथ युद्ध करने के लिए राजी हो गया। ये युद्ध चार दिनों तक जारी रहा लेकिन भीम जरासंध का वध करने में नाकाम रहा। तब श्री कृष्ण ने एक पत्ते की मदद से भीम को बताया कि कैसे शत्रु का वध करना है। कृष्ण ने पत्ते को बीच से फाड़ा और दोनों हिस्सों को विपरीत दिशाओं में फेंक दिया। कृष्ण के बताये अनुसार भीम ठीक वैसा ही करने में सफल रहे और उसने जरासंध के शरीर को दो भागों में बांटकर अलग अलग दिशा में फेंक दिया जिससे वो दोबारा नहीं जुड़ पाए और उसकी मृत्यु हो गयी।

बलराम के मन में भी था यही सवाल
समय बीतने के बाद जब कंस और उसका समर्थन करने वाले जरासंध की मृत्यु हो गयी तब बलराम और कृष्ण चर्चा करने बैठे थे। कृष्ण के बड़े भाई बलराम ने कृष्ण से पूछा कि आखिर उसने इतना इंतजार क्यों किया? तब कृष्ण ने कहा कि जरासंध हर बार हमला करने के लिए नयी सेना लेकर पहुंचता था। इस सेना में कई शक्तिशाली राजा भी शामिल होते थे जो धरती पर लोगों पर अत्यार करते थे। जरासंध के कारण कृष्ण उन सभी दुराचारी लोगों को एक ही जगह पर खत्म कर पाते थे। जरासंध दुष्ट लोगों को समूह में एकत्र करता था और श्रीकृष्ण इसका फायदा उठाते और धरती को ऐसे लोगों से मुक्त कराते थे। एक बार फिर बलराम अपने छोटे भाई की बुद्धिमता से काफी प्रसन्न हुए।



Click it and Unblock the Notifications
