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Teej Sinjara 2025: हरियाली तीज से पहले आता है सिंजारा, जानें इसकी परंपरा और सामग्री लिस्ट
Teej Sinjara 2025: श्रावण मास में महिलाओं के सौंदर्य, सुहाग और उत्सव से जुड़े कई पर्व मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक खास परंपरा है सिंजारा या सिंधारा, जो हरियाली तीज से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन को श्रृंगार पर्व भी कहा जाता है क्योंकि यह सुहागिनों के श्रृंगार और उल्लास का प्रतीक है।

क्या होता है सिंजारा पर्व?
सिंजारा, जिसे कई जगहों पर सिंधारा दूज भी कहा जाता है, हरियाली तीज से एक दिन पहले यानी श्रावण शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहू-बेटियों के घर मायके से सिंजारा भेजा जाता है। इस थाल में मिठाइयाँ, वस्त्र, हरी चूड़ियाँ, मेहंदी, बिंदी, आभूषण और श्रृंगार का सामान भेजा जाता है। यह परंपरा ससुराल में रहने वाली बेटियों और बहुओं के लिए मायके का प्रेम और आशीर्वाद लेकर आती है।
हरियाली तीज सिंजारा 2025 में कब है?
वर्ष 2025 में सिंजारा का पर्व 26 जुलाई (शनिवार) को मनाया जाएगा। इस दिन श्रावण शुक्ल द्वितीया तिथि रात 10:41 बजे तक रहेगी। इसके अगले दिन यानी 27 जुलाई 2025 (रविवार) को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा।
सिंजारा में क्या-क्या सामग्री होती है?
सिंजारा की थाली खास तौर पर सजाई जाती है। इसमें भेजी जाने वाली सामग्री इस प्रकार होती है:
- वस्त्र (नई साड़ी या सूट)
- हरी चूड़ियाँ
- सोने या नकली आभूषण (मांग टीका, नथ, झुमके, अंगूठी, पायल, कमरबंद आदि)
- श्रृंगार सामग्री (काजल, सिंदूर, बिंदी, कंघा, गजरा)
- मेहंदी
- मिठाइयाँ - घेवर, रसगुल्ला, मावे की बर्फी
- 9 प्रकार के पकवान और मिष्ठान्न
- कभी-कभी बिछिया और बाजूबंद भी भेजे जाते हैं।
सिंजारा कैसे मनाया जाता है?
इस दिन महिलाएं विशेष श्रृंगार करती हैं और सजे-धजे रूप में घर-आंगन में झूला झूलती हैं। जो मेहंदी उन्हें सिंधारा में मिलती है, उसे वे अपने हाथों में रचाती हैं। महिलाएं उपहार में मिले कपड़े और आभूषण हरियाली तीज के दिन पहनती हैं। कुछ जगहों पर महिलाएं आपस में सिंजारा बांटती हैं और एक-दूसरे को श्रृंगार सामग्री भेंट करती हैं।
इस दिन झूले डालने, लोकगीत गाने, और गठबंधन के पकवान खाने की भी परंपरा है। शाम के समय माता पार्वती की पूजा करके सिंजारा की मिठाइयाँ और सामग्री अपनी सास को भेंट दी जाती है। यह दिन महिलाओं के सौंदर्य और पारंपरिक मूल्यों को समर्पित होता है।



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