Latest Updates
-
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा -
World Heart Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व हृदय दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की थीम
Veer Bal Diwas: धर्म के लिए हंसते-हंसते शहीद हुए 6 और 8 साल के बच्चे, ये है वीर साहिबजादों का दर्द भरा इतिहास
Veer Bal Diwas in Hindi: हर साल 26 दिसंबर को मनाया जाने वाला वीर बाल दिवस, सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी की शहादत को समर्पित है। भारत का इतिहास सिर्फ युद्धों और राजाओं की कहानियों से नहीं, बल्कि ऐसे अद्भुत बलिदानों से भी भरा है जो आने वाली पीढ़ियों को साहस और सच्चाई का रास्ता दिखाते हैं।
वीर बाल दिवस भी ऐसे ही एक अद्वितीय बलिदान की याद दिलाता है, जब महज 6 और 8 साल के दो मासूम बच्चों ने क्रूर मुगल शासकों के सामने झुकने से इनकार कर दिया और धर्म व इंसानियत की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। यह दिन केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि साहस, आत्मबल और सत्य के लिए अडिग रहने की प्रेरणा देता है। आइए जानते हैं इस खास दिन का इतिहास महत्व और कौन थे वीर साहिबजादे?

क्यों मनाया जाता है वीर बाल दिवस?
वीर बाल दिवस उन दो बाल वीरों की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने मुगल अत्याचारों के सामने अपने धर्म और सिद्धांतों से समझौता करने से साफ इनकार कर दिया। यह दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के अदम्य साहस और बलिदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है। गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब, वह पवित्र स्थल है जहां दोनों साहिबजादों ने अपनी अंतिम सांस ली और अमर हो गए।
वीर बाल दिवस का इतिहास क्या है?
9 जनवरी 2022 को गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा यह घोषणा की गई थी कि 26 दिसंबर को हर साल वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को साहिबजादों की बहादुरी, आत्मसम्मान और सत्य के प्रति निष्ठा से परिचित कराना है।
वीर बाल दिवस का महत्व क्या है?
वीर बाल दिवस हमें सिखाता है कि उम्र साहस की सीमा नहीं होती, सत्य और धर्म की रक्षा सर्वोपरि होती है। कठिन से कठिन परिस्थिति में भी नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए इसका उदाहरण साहिबजादे हैं जिन्होंने धर्म परिवर्तन के दबाव के बावजूद शहादत को चुना, जो भारतीय इतिहास में अद्वितीय उदाहरण है।
वीर साहिबजादों का जन्म कहां हुआ था?
वीर साहिबजादे सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के सबसे छोटे पुत्र थे। उनके नाम साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह जी थे। दोनों का जन्म आनंदपुर साहिब (पंजाब) में हुआ था और बहुत छोटी उम्र से ही उन्हें धर्म, सत्य, साहस और बलिदान की शिक्षा दी गई थी। शहादत के समय साहिबजादा जोरावर सिंह जी की उम्र लगभग 8-9 वर्ष और साहिबजादा फतेह सिंह जी की उम्र मात्र 6 वर्ष थी।
इतनी कम उम्र में भी उन्होंने मुगल शासकों की क्रूरता के सामने झुकने से इनकार कर दिया और धर्म परिवर्तन का प्रस्ताव ठुकरा दिया। अत्याचार के बावजूद उन्होंने अपने विश्वास और सिद्धांतों को नहीं छोड़ा और सरहिंद (वर्तमान फतेहगढ़ साहिब) में अमानवीय तरीके से शहीद कर दिए गए। उनका यह बलिदान भारतीय इतिहास में अद्वितीय है और साहस, निडरता व सच्चाई के लिए अडिग रहने का महान उदाहरण माना जाता है।



Click it and Unblock the Notifications
