Latest Updates
-
UP Style Fish Machli Kadhi Recipe: घर पर बनाएं सरसों वाली चटपटी मछली कढ़ी -
Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी पर जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा सभी 24 एकादशियों का पूर्ण फल -
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर इस विधि से पिएं पानी, नहीं टूटेगा आपका व्रत, मिलेगा व्रत का पूर्ण फल -
Garhwali Sweet Rice Arsa Recipe: पारंपरिक तरीके से बनाएं उत्तराखंड की खास मिठाई -
Nirjala Ekadashi Vrat In Periods: क्या पीरियड्स में निर्जला एकादशी का व्रत रख सकते हैं? जानें क्या हैं नियम -
'तुम मुझे छोड़कर क्यों चले गए, वापस आ जाओ', केतन की हत्या के बाद सिया गोयल ने किया ये पोस्ट, अब हो रहा वायरल -
Grandma Comfort Food Vegetable Khichdi Recipe: घर पर बनाएं दादी के हाथों जैसा स्वाद -
Padma Awards 2026: अलका याग्निक-ममूटी को मिला पद्म भूषण, रोहित शर्मा और आर माधवन भी सम्मानित -
Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: निर्जला एकादशी व्रत में जरूर करें इन नियमों का पालन, तभी मिलेगा व्रत का पूरा फल -
Special Healthy Gajar Paratha Recipe: सर्दियों के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता
Death In Pitru Paksha: पितृ पक्ष के दौरान हो जाए मृत्यु तो क्या होता है? गरुण पुराण में बताया रहस्य
Death In Pitru Paksha: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का समय अत्यंत विशेष माना जाता है। इस साल 7 सितंबर 2025 से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है जो 21 सितंबर तक रहेगा। वैसे तो 16 श्राद्ध होते हैं लेकिन इस बार एक श्राद्ध तिथि घट रही है जिस वजह से 15 श्राद्ध ही हैं। इस काल में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य का महत्व बताया गया है। लेकिन कई बार लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि पितृ पक्ष के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो उसका क्या फल होता है?
शास्त्रों के अनुसार, यह स्थिति सामान्य मृत्यु से भिन्न मानी जाती है और इसके पीछे गहरा रहस्य छिपा है। मान्यता है कि पितृ पक्ष में मृत्यु होने पर आत्मा को विशेष फल और गति प्राप्त होती है। आइए जानते हैं शास्त्रों में बताए गए रहस्यों और मान्यताओं के बारे में विस्तार से।

पितृ पक्ष का महत्व (Importance Of Pitru Paksha)
हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) वर्ष में एक बार भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक मनाया जाता है। इस पखवाड़े में पितरों को तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करके उनकी आत्मा की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने का विधान है। इसे पूर्वजों से जुड़ने और उनके ऋण से मुक्ति पाने का विशेष समय माना गया है।
पितृ पक्ष में मृत्यु का महत्व (Death in Pitru Paksha)
शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पितृ पक्ष के दौरान होती है तो यह सामान्य मृत्यु से अलग और विशेष मानी जाती है।
पितरों से सीधा संबंध - मान्यता है कि पितृ पक्ष में मृत्यु होने पर आत्मा सीधे पितृलोक को प्राप्त होती है और उसे पूर्वजों के साथ स्थान मिलता है।
आत्मा को गति मिलना - मृत्यु के बाद आत्मा को भटकना नहीं पड़ता, क्योंकि इस काल में पितरों के द्वार खुले रहते हैं।
पूर्वजों का संरक्षण - ऐसी मृत्यु को पितरों का आशीर्वाद माना जाता है और यह विश्वास किया जाता है कि आत्मा को सहज मोक्ष या उत्तम गति प्राप्त होती है।
पुनर्जन्म में शुभ फल - धर्मग्रंथों के अनुसार, पितृ पक्ष में मृत्यु होने वाले को अगले जन्म में पुण्य और कल्याणकारी परिस्थितियाँ प्राप्त होती हैं।
गरुण पुराण और विष्णु धर्म सुत्र में क्या कहा (Garuda Purana)
बता दें कि गरुड़ पुराण और धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि पितृ पक्ष में मृत्यु होने पर आत्मा को यमलोक के कष्टों का सामना कम करना पड़ता है। वहीं विष्णु धर्मसूत्र के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान मृत आत्मा को पितरों के साथ स्थान मिलता है और वह परिवार की रक्षा करती है। लोक मान्यता है कि ऐसी आत्माएं परिवार के लिए पितृ देवता के रूप में पूजनीय हो जाती हैं।



Click it and Unblock the Notifications