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Saraswati Puja 2025 Date: कब है नवरात्रि सरस्वती पूजा? देखें 4 दिवसीय पर्व का पूरा शेड्यूल और महत्व
Saraswati Puja 2025 Date: नवरात्रि के दौरान मां सरस्वती की आराधना का विशेष पर्व मनाया जाता है। यह पर्व ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी को समर्पित होता है। शारदीय नवरात्रि के दौरान, चार दिन तक लोग मां सरस्वती की पूजा करते हैं। इस चार दिवसीय पर्व में विद्यार्थी, कलाकार और विद्वान विशेष रूप से मां से विद्या, बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं। पूजा के दौरान किताबें, पेन-पेंसिल और संगीत वाद्य आदि को पूजा स्थल पर रखकर मां सरस्वती का आशीर्वाद लिया जाता है।
चार दिनों तक चलने वाली सरस्वती पूजा में पहले दिन मां का आवाहन किया जाता है और आखिरी दिन विसर्जन किया जाता है। आइए जान लेते हैं सरस्वती पूजा का चार दिन का पूरा शड्यूल, महत्व और पूजा विधि।
पहले दिन से आखिरी दिन तक नोट कर लें डेट
29 सितंबर 2025 - दिन सोमवार को- सरस्वती आवाहन
30 सितंबर 2025 - दिन मंगलवार- सरस्वती पूजा
1 अक्टूबर 2025 - दिन बुधवार- सरस्वती बलिदान
2 अक्टूबर 2025 - दिन वीरवार- सरस्वती विसर्जन

सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
अब ये जान लेते हैं कि सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त किया है। सरस्वती मां का आवाहन 29 सिंतबर की सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शाम को 5 बजकर 6 मिनट तक किया जाएगा। 30 सितंबर 2025 को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट से शाम 6 बजकर 8 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। उत्तराषाढा बलिदान का शुभ मुहूर्त 1 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से शाम को 6 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। 2 अक्टूबर 2025 को विसर्जन किया जाएगा जिसका शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 13 मिनट से लेकर 3 बजकर 18 मिनट कर रहने वाला है।
सरस्वती पूजा की विधि (Vidhi)
पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को साफ कर माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
प्रतिमा के सामने कलश स्थापना करें और उसमें जल, आम्र पल्लव, नारियल रखें।
मां सरस्वती को सफेद वस्त्र, पुष्प, माला और अक्षत (चावल) अर्पित करें।
किताबें, पेन, वाद्ययंत्र या कला से जुड़ी वस्तुएं पूजा स्थल पर रखें।
सरस्वती मंत्र का जाप करें - "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः"
धूप, दीप, नैवेद्य और फल अर्पित कर मां की आरती करें।
पूजा के बाद बच्चों को प्रसाद दें और उनसे पढ़ाई शुरू करवाएं।
सरस्वती पूजा का महत्व (Mahattva)
यह पूजा ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है।
विद्यार्थी और कलाकार विशेष रूप से यह पूजा करते हैं ताकि उन्हें शिक्षा और करियर में सफलता मिले।
माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से आलस्य, अज्ञान और नकारात्मकता दूर होती है।
घर में विद्या, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
इस दिन रखी गई किताबें और वाद्ययंत्र मां सरस्वती के आशीर्वाद से पवित्र माने जाते हैं।



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