Latest Updates
-
April Fool's Day 2026: लंगोटिया यारों की 'बत्ती गुल' कर देंगे ये फनी मैसेजेस, हंसी रोकना होगा मुश्किल -
Lucky Signs: घर से निकलते समय इन 5 चीजों का दिखना माना जाता है बेहद शुभ, समझ जाएं जल्द बदल सकती है किस्मत -
Mysterious Temples Of India: भारत के 5 रहस्यमयी मंदिर, जहां का प्रसाद घर ले जाना होता है मना -
नारियल या सरसों का तेल? बालों की ग्रोथ के लिए कौन है नंबर-1, जानें सफेद बालों का पक्का इलाज -
April Fool's Pranks: अपनों को बनाना चाहते हैं अप्रैल फूल? ट्राई करें ये प्रैंक्स, हंस-हंसकर हो जाएंगे लोटपोट -
Mahavir Jayanti 2026: अपने बेटे के लिए चुनें भगवान महावीर के ये 50+ यूनीक नाम, जिनका अर्थ है बेहद खास -
डायबिटीज के मरीज ब्रेकफास्ट में खाएं ये 5 चीजें, पूरे दिन कंट्रोल रहेगा ब्लड शुगर लेवल -
Today Bank Holiday: क्या आज बंद रहेंगे बैंक, स्कूल और शेयर बाजार; जानें आपके शहर का क्या है हाल -
Mahavir Jayanti 2026 Wishes:अहिंसा का दीप जलाएं…इन संदेशों के साथ अपनों को दें महावीर जयंती की शुभकामनाएं -
Mahavir Jayanti Quotes 2026: 'जियो और जीने दो', महावीर जयंती पर अपनों को शेयर करें उनके अनमोल विचार
आखिर क्यों उत्तराखंड या उत्तर भारत में में नहीं किया जाता गणपति विसर्जन? चौंका देगी सच्चाई
Why Ganpati Visarjan Rare In North India: गणपति उत्सव पूरे भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। 27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व है। ये 10 दिनों तक यानी अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला त्योहार है। ये महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में भव्य पंडालों, रंग-बिरंगी सजावट और भव्य विसर्जन के साथ संपन्न होता है। लोग अपने घर गणपति बप्पा को लाते हैं और उनकी स्थापना करते हैं। कोई डेढ़ दिन के लिए लाता है तो कोई 3 दिन के लिए तो कोई 7 य 10 दिन के लिए और फिर विसर्जन कर दिया जाता है।
लेकिन अगर आप उत्तर भारत या खासकर उत्तराखंड की बात करें, तो यहां गणपति विसर्जन की परंपरा लगभग नजर नहीं आती। इसे मौसम, भौगोलिक कारण या बस "लोकप्रियता की कमी" से जोड़ देते हैं, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा रोचक और ऐतिहासिक है। आइए जानते हैं कि उत्तर भारत और उत्तराखंड में गणेश विसर्जन करना क्यों वर्जित होता है।

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं किया जाता गणेश विसर्जन
ऐसी मान्यता है कि उत्तर भारत में गणेश जी का जन्म स्थान है। वहां वो हमेशा से रहे हैं और वो उनका स्थायी घर है। गणपति जी को दुख हरने वाला कहा जाता है जो उत्तराखंड के घर-घर में हर शुभ कार्य में सबसे पहले पूजे जाते हैं। ऐसे में मान्यता है कि उनकी जन्मस्थली होने की वजह से उत्तर भारत में गणपति विसर्जन करने की मनाही होती है। ऐसा कहा जाता है कि अपने ही घर से उन्हें कैसे बाहर किया जा सकता है। जबकि दक्षिण भारत में गणेश जी मेहमान के रूप में गए थे तो वहां गणपति स्थापना के बाद विसर्जन की प्रथा है।
विसर्जन के बदले क्या करते हैं?
उत्तराखंड के एक पंडित जी जिनका नाम विनोद पांडे है से पूछने पर उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में गणपति विसर्जन पानी में बहाकर नहीं किया जाता। बल्कि ठंडे पानी से उन्हें स्नान करवाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब महर्षि वेद व्यास महाभारत लिख रहे थे तो एक समय में गणेश जी गुस्से से गरम हो गए तो उन्हें शांत करने के लिए शीतल जल में डुबकी लगवाई गई थी। तभी से यहां कुछ भी विसर्जन नहीं होता बल्कि शीतल जल से बप्पा को स्नान करवाया जाता है।
भौगोलिक परंपरा क्या है?
भौगोलिक और पारंपरिक कारण भी एक बड़ा कारक हैं। उत्तराखंड और उत्तर भारत में पहाड़ी इलाकों में नदी और तालाबों तक पहुंच कम होती है, जिससे विसर्जन की परंपरा को अंजाम देना मुश्किल होता है। इसके अलावा, यहां के स्थानीय रीति-रिवाजों में देवताओं की मूर्तियों को घर में ही या मंदिर में ही रखा जाता है और उनका किसी जलाशय में विसर्जन करने की प्रथा नहीं रही। संक्षेप में कहा जा सकता है कि उत्तराखंड और उत्तर भारत में गणपति विसर्जन न होना केवल एक "कम प्रचलित परंपरा" नहीं है, बल्कि इसके पीछे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक कारण छिपे हैं। इस चौंकाने वाली सच्चाई को जानकर यह समझना आसान हो जाता है कि भारत की धार्मिक विविधता में हर क्षेत्र की अपनी अलग पहचान और रीति-रिवाज हैं।



Click it and Unblock the Notifications











