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हनुमान अष्टमी क्यों है हनुमानजी का विजय उत्सव, जानें इसके पीछे की 2 रोचक कथाएं
Hanuman Ashtami Vrat Katha: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हनुमान अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन संकट मोचन हनुमान जी को समर्पित होता है। इस बार 12 दिसंबर, शुक्रवार को हनुमान अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। वैसे तो हनुमान अष्टमी का पर्व पूरे देश में बड़ी श्रद्धा और धूम-धाम मनाया जाता है लेकिन इसकी सबसे ज्यादा रौनक मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में रहती है। इसके पीछे की वजह यह है कि हनुमान अष्टमी से जुड़ी कथाएं यहीं से संबंधित हैं। इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और बजरंगबली के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। हनुमान अष्टमी क्यों मनाई जाती है, इससे जुड़ी कई रोचक कथाएं प्रचलित हैं। आइए, जानते हैं -

हनुमान अष्टमी की कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंका युद्ध के दौरान जब भगवान श्रीराम ने अपने सेना के साथ लंका पर आक्रमण किया, तो अहिरावण नामक असुर श्रीराम और लक्ष्मण को छल से उठाकर पाताल लोक ले गया। पाताल लोक में जाकर अहिरावण का वध करना किसी भी देवता के लिए आसान नहीं था। ऐसे समय में हनुमानजी सूक्ष्म रूप धारण कर पाताल लोक पहुंचे और अहिरावण का वध किया। इसके बाद वे श्रीराम और लक्ष्मण को सुरक्षित वापस धरती पर लेकर आए।अहिरावण से युद्ध करने के कारण हनुमानजी काफी थक गए थे, इसलिए उन्होंने कुछ देर के लिए धरती के नाभि केंद्र माने जाने वाले उज्जयिनी (वर्त्तमान उज्जैन) में विश्राम किया। तभी से उज्जैन में हनुमान अष्टमी विशेष रूप से मनाई जाती है।
एक और प्रसिद्ध कथा
एक दूसरी प्रचलित कथा के अनुसार, बहुत समय पहले उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) में एक महान सिद्ध महात्मा रहते थे, जो हनुमानजी के परम उपासक थे। उनकी गहरी भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमानजी एक दिन उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन देने आए। उस दिन पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। तभी से इस तिथि को हनुमान अष्टमी के रूप में उज्जैन में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।



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