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प्रसाद लेने के बाद सिर पर क्यों घुमाया जाता है हाथ, जानिए क्या कहते हैं वेद-पुराण!
आप जब भी पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं तो उसको सीधे हाथ से लेकर खाते हैं और फिर अपना सीधा हाथ भी सिर की ओर घुमा लेते हैं। वैसे तो ये आप बचपन से करते आ रहे हैं लेकिन कभी इसके बारें में सोंचा है कि आप ऐसा क्यों करते हैं या फिर किसी से इस बारें में बात की, कि ऐसा किया क्यों जाता है? अगर नहीं तो आज हम यहां आपको बताने वाले हैं कि हिंदू पंरपरा के अनुसार, प्रसाद खाने के बाद ऐसा क्यों किया जाता है, इसके पीछे क्या कारण है।

सीधे हाथ से भगवान के प्रसाद को ग्रहण करना शुभ माना जाता है
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, अपने सीधे हाथ से भगवान के प्रसाद को ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इसके साथ शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है कि प्रसाद लेने का यही सही नियम हैं। प्रसाद को खा लेने के बाद अपना सीधी हाथ सिर के ऊपर घुमाना लाभकारी माना जाता है, इससे आपके ऊपर देवों की कृपा दृष्टी बनी रहती है।

सनातन धर्म में वेद-पुराणों के अनुसार, व्यक्ति के शरीर में 7 चक्र होते हैं। आपके शरीर में ये चक्र मूल रूप से सात हैं-
1. मूलाधार- ये शरीर के गुदा और जननेन्द्रियों के बीच स्थित होता है
2. स्वाधिष्ठान- ये चक्र जननेंद्रिय के ठीक ऊपर होता है।
3. मणिपूरक- ये चक्र शरीर की नाभि के नीचे होता है।
4. अनाहत- ये चक्र हृदय के पास पसलियों के मिलान के ठीक नीचे स्थित है।
5. विशुद्धि- कंठ के गड्ढे में होता है।
6. आज्ञा - ये चक्र दोनों भवों के बीच होता है।
7. सहस्रार- इसे ब्रम्हरंद्र्र भी कहते हैं। सिर के सबसे ऊपरी जगह पर होता है।

सहस्रार चक्र सिर के ऊपर होता है
सहस्रार चक्र सिर के सबसे ऊपरी स्थान पर होता है। जब आप प्रसाद खाते हैं तब ईश्वर की कृपा आप अपने मस्तिष्क तक पहुंचाते हैं। इससे नकारात्मकता को दूर किया जा सकता है। जब मनुष्य के शरीर की ऊर्जा सहस्रार चक्र तक पहुंच जाती है तब वो ऊर्जा का चरम शिखर पा लेता है। आपकी आध्यात्मिकता मजबूत होती है। जब आप प्रसाद के बाद सिर पर हाथ घुमाते हैं मन को शांति मिलती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
Image Courtesy- pinterest.com



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