Yashoda Jayanti 2025: 18 फरवरी को है यशोदा जयंती, संतान की लंबी उम्र के लिए माएं रखती हैं व्रत

Yashoda Jayanti 2025 : उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। श्रीकृष्ण की माता यशोदा का यह पर्व गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष यशोदा जयंती 18 फरवरी, मंगलवार को होगी।

भगवान कृष्ण के मंदिरों में यह उत्सव बड़े उत्साह से मनाया जाता है। गोकुल में विशेष आयोजन होते हैं, क्योंकि श्रीकृष्ण ने अपना बचपन माता यशोदा के साथ वहीं बिताया था। गुजरात में भी यह पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है, जहां लोग अपने घरों को माता यशोदा और श्रीकृष्ण की तस्वीरों से सजाते हैं।

Yashoda Jayanti 2025

यशोदा जयंती का महत्व

यशोदा जयंती फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन माता यशोदा और बाल कृष्ण की विशेष पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पूजा करने से संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि जो महिलाएं सच्चे मन से श्रद्धापूर्वक श्रीकृष्ण और माता यशोदा की आराधना करती हैं, उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप के दर्शन प्राप्त होते हैं और उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है।

यशोदा जयंती 2025 का शुभ मुहूर्त

यशोदा जयंती 2025 का शुभ मुहूर्त फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को रहेगा। यह तिथि 18 फरवरी को प्रातः 04:53 बजे प्रारंभ होकर 19 फरवरी को सुबह 07:32 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, यशोदा जयंती 18 फरवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी।

यशोदा जयंती के द‍िन कैसे करें पूजा

यशोदा जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर मां यशोदा का स्मरण करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें। आमचन कर व्रत संकल्प लें और माता यशोदा की पूजा करें। पूजा में फल, फूल, दूर्वा, सिंदूर, अक्षत आदि अर्पित करें। प्रसाद के रूप में फल, हलवा या मिठाई चढ़ाएं।

इसके बाद माता यशोदा और बाल गोपाल की आरती उतारकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। दिनभर उपवास रखें और संध्या पूजा के बाद फलाहार करें। इस दिन श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।

यशोदा जयंती पर इन मंत्रों का करें जप -

ॐ यशोदे नमः
ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः
ऊं कृं कृष्णाय नमः
ऊं गोवल्लभाय स्वाहा
गोकुलनाथाय नमः
ऊं क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः
ऊं नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः

Story first published: Monday, February 17, 2025, 17:46 [IST]
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