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Yogini Ekadashi 2024: इस साल की योगिनी एकादशी है बेहद ख़ास, बन रहे हैं पांच शुभ योग
Yogini Ekadashi 2024 Kab Hai: हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत ही अधिक महत्व है। एकादशी भगवान श्री हरि को समर्पित है। एकादशी के पावन पर्व पर भगवान श्री हरि विष्णु नारायण की पूजा करने से जाने अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही सुख, शांति तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है। समस्त श्रद्धालु एकादशी के शुभ अवसर पर भगवान विष्णु नारायण की विशेष विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं और इस दिन निमित्त एकादशी का व्रत भी रखते हैं।
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु नारायण को समर्पित है। इस शुभ अवसर पर योगिनी एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष 2 जुलाई को योगिनी एकादशी है। योगिनी एकादशी के पावन पर्व पर वैष्णव समाज के लोग नियमित व्रत रखकर भगवान श्री विष्णु नारायण और माता लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं। इसके साथ ही शुभ कार्यों में सिद्धि प्राप्ति हेतु विशेष उपाय भी करते हैं।

भगवान श्री हरि के विशेष आशीर्वाद से साधक की संपूर्ण मनोकामनाएँ पूर्ण होती है। ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक योगिनी एकादशी के पावन पर्व पर पाँच शुभ योग बन रहे हैं। इन सम्पूर्ण योगों में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से समस्त श्रद्धालु को सुख तथा समृद्धि की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही मनवांछित फल प्राप्त होंगे। आइए विस्तार पूर्वक इन पाँच शुभ योग के बारे में जानते हैं।
योगिनी एकादशी 2024 शुभ मुहूर्त (Yogini Ekadashi 2024 Date)
हिंदू पंचांग के मुताबिक आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 1 जुलाई प्रातः काल 10:26 से प्रारंभ होगी और इसके अगले दिन यानी 2 जुलाई प्रातः काल 8:42 पर इसकी समाप्ति होगी।
योगिनी एकादशी 2024 पर बन रहे हैं ये शुभ योग
त्रिपुष्कर योग
ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक योगिनी एकादशी के शुभ अवसर पर त्रिपुष्कर योग भी बन रहे हैं। त्रिपुष्कर योग प्रातः काल 8:42 से प्रारंभ होगा और इसका समापन 3 जुलाई प्रातः काल 4:40 पर होगा।
धृति योग
योगिनी एकादशी के पावन पर्व पर धृति योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन धृति योग प्रातः काल 11:17 तक रहेगा। इसके पश्चात शूल योग का निर्माण होगा। धृति योग में भगवान श्री हरि की विधिवत पूजा अर्चना करना अत्यंत ही शुभ एवं फलदाई होता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग
योगिनी एकादशी के पावन पर्व पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। इस योग का निर्माण प्रातः काल 5:27 से हो रहा है और 3 जुलाई प्रातः काल 4:40 पर इसका समापन होगा। इस योग में जगत के पालनहार भगवान नारायण की विधि विधान से पूजा अर्चना करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही जीवन में सुख-शांति आएगी।
शिव वास योग
योगिनी एकादशी के शुभ अवसर पर शिव वास योग भी बन रहा है। इस पावन पर्व पर भगवान शिव प्रातः काल 8:42 पर कैलाश पर विद्यमान रहेंगे। इसके पश्चात भगवान शिव नंदी पर सवार रहेंगे। भगवान शिव के कैलाश और नंदी पर विद्यमान रहने के दौरान अभिषेक करने पर साधक की संपूर्ण मनोकामनाएँ पूर्ण होगी और सभी कार्यों में सफलता की प्राप्ति होगी।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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