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क्या आप पक्के वाले भारतीय हैं?

क्या आपमें है या क्वालिटी-
1. यदि परदादा के जमाने का पुराना समान अभी तक संभाल कर रखा हो - मज़े की बात यह है कि हर भारतीय इंसान दुनियां के हर समान में केवल पैसा ही देखता है। हम अगर अपने घर के लिए फ्रिज, टीवी या ऐसी कोई भी घरेलू वस्तू खरीदते हैं, तो उसे जिंदगी भर के लिए संजो कर रख लेना हमारी फितरह होती है। हम वस्तुओं को हजार डिब्बों में इसलिए संभाल कर रखते हैं, जिससे वह हमारी आने वाली अगली की अगली पीढ़ी के काम आ सके।
2. कपड़े खरीदने के लिए सेल का इंतजार करते हों - आप चाहें किसी बड़ी कंपनी के सीईओ हों या फिर उसी कंपनी में मामूली से गार्ड। आपकी चाहत यही होगी की आपको चंद पैसों के बदले पूरी दुकान हाथ लग जाए। यह हर भारतीय का माइंडसेट होता है, कि वह चाहे कपड़ा हो या फिर जूता, सब कुछ एक ही छत के नींचे कम दाम में ढेर सारा बटोर लाए। दुकान में घुसते ही पहला सवाल दिमाग में केवल यही होगा कि," इस समान पर कितना डिस्काउंट है"।
3. फोन की जगह मिस कॉल करते हों - मिस कॉल पर मिस कॉल। जी हां, यही तो करते हैं हम भारतीय। पता नहीं क्यों हम खुद को अपने दोस्तों से ज्यादा स्मार्ट समझ लेते हैं या फिर कोई और वजह है जिससे हम उन्हें फोन न करके केवल मिस कॉल ही देते हैं। पक्के रूप वाला भारतीय किसी न किसी तरह से मिस कॉल देकर अपने पैसे बचा ही लेता है।
4. दूसरे राज्यों से आए लोंगो की बुराई करते हों - इसमें बुरा मानने वाली कोई बात नहीं है, यह तो हम सब करते हैं। हम अपने शहर में आये दूसरे राज्य के लोगों का फनी नाम रखना शुरु कर देते हैं जैसे, घाटी, बोंग, भैया, मल्लू, गुज्जू और न जाने क्या-क्या। हमे लगता है कि यह केवल हमारा शहर है जिसपर किसी दूसरे का कोई अधिकार नहीं है। उन पर जातिवादी जोक बना कर हंसना मानों हमारा जन्मसिद्व अधिकार हो।
5. हर समय इंडियन रेस्टोरेंट की खोज करना - भले ही आप पीज्जा-बर्गर के दीवाने हों, पर निगाहें हर वक्त भारतीय खाने को ही खोजती रहती हैं। इससे कोई फरक नहीं पड़ता कि आप दुनियां के किस कोने में बसे हुए हों, पर आप हमेशा ही अपने भारतीय खाने के रेस्टोरेंट की ही तलाश करेगें। अगर आपने विदेश में रह कर गुजराती थाली खाने के लिए मीलों का फासला तय कर लिया है, तो समझ लीजिये कि आप पक्के भारतीय हैं।



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