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भारत में किस दिन होगी बकरीद? जानें चांद दिखने की संभावित तारीख, महत्व और कुर्बानी का पूरा नियम
Eid-ul-Adha 2026- Eid Kab hai: अब कुछ दिन का इंतजार और फिर मनाई जाएगी बकरीद। इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र और त्याग के प्रतीक त्योहार ईद-उल-अजहा (Eid-ul-Adha) की दस्तक होने वाली है। रमजान के समापन और ईद-उल-फितर की खुशियों के लगभग दो महीने बाद आने वाला यह पर्व न केवल बलिदान की याद दिलाता है, बल्कि इंसानियत और भाईचारे का संदेश भी देता है। साल 2026 में बकरीद की तारीख को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है, क्योंकि यह पूरी तरह से चांद के दीदार पर निर्भर करती है। यहां जानें साल 2026 में बकरीद की संभावित तारीख, इसका गौरवशाली इतिहास और इस पर्व को मनाने के पीछे का आध्यात्मिक महत्व।

बकरीद 2026: कब दिखेगा चांद और क्या है सही तारीख?
इस्लामी कैलेंडर (हिजरी) के अनुसार, ईद-उल-अजहा साल के आखिरी महीने 'जुल हिज्जा' की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। साल 2026 में भारत में बकरीद 27 मई (बुधवार) या 28 मई (गुरुवार) को मनाए जाने की संभावना है। यदि चांद 18 मई को नजर आता है, तो ईद 27 मई को होगी। यदि चांद 19 मई को दिखता है, तो यह पर्व 28 मई को मनाया जाएगा। भारत में इस अवसर पर राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) रहता है।
क्यों दी जाती है कुर्बानी जानें इतिहास और पैगंबर इब्राहीम की महान परीक्षा
बकरीद का त्योहार पैगंबर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के अटूट विश्वास और अल्लाह के प्रति उनके समर्पण की याद में मनाया जाता है। मान्यता है कि अल्लाह ने पैगंबर इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी मांगी। इब्राहीम अपने इकलौते बेटे इस्माईल को सबसे ज्यादा प्यार करते थे, लेकिन अल्लाह के हुक्म के आगे उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला कर लिया। जैसे ही उन्होंने आंखों पर पट्टी बांधकर चाकू चलाया, अल्लाह ने उनके जज्बे को कबूल किया और बेटे की जगह एक दुम्बा (मेंढ़ा) भेज दिया। तब से अल्लाह की राह में 'कुर्बानी' की यह रस्म शुरू हुई।
कैसे मनाई जाती है बकरीद?
ईद की विशेष नमाज: सुबह के वक्त मुस्लिम समुदाय के लोग नए वस्त्र पहनकर ईदगाह या जामा मस्जिदों में जमा होते हैं और ईद-उल-अजहा की दो रकात वाजिब नमाज अदा करते हैं।
कुर्बानी की रस्म: नमाज के बाद हलाल तरीके से बकरे, दुम्बे या अन्य जायज जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। यह रस्म तीन दिनों तक (10, 11 और 12 जुल हिज्जा) जारी रह सकती है।
गोश्त के तीन हिस्से (बंटवारा): इस्लाम में कुर्बानी के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का नियम है:
पहला हिस्सा: गरीबों और बेसहारा लोगों के लिए।
दूसरा हिस्सा: दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए।
तीसरा हिस्सा: अपने परिवार के लिए।
इसका उद्देश्य समाज में समानता और कोई भूखा न रहे, इस भावना को सुनिश्चित करना है।
जायके और मुबारकबाद का दौर
बकरीद का पर्व बिना लजीज पकवानों के अधूरा है। इस दिन घरों में मटन बिरयानी, कबाब, निहारी, कीमा और मीठे में शीर-खुरमा या खीर बनाई जाती है। लोग एक-दूसरे के गले मिलकर "ईद मुबारक" कहते हैं और आपसी गिले-शिकवे दूर कर प्यार बांटते हैं।



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