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क्या दीवार पर गोबर लगाने से घर रहता है ठंडा? DU के कॉलेज का वीडियो वायरल से शुरू हुई चर्चा
lakshmibai college principal video viral : हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. प्रत्यूष वत्सला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह कॉलेज स्टाफ के साथ मिलकर कमरे की दीवारों पर गोबर लगाती दिख रही हैं। यह दृश्य न सिर्फ लोगों के लिए चौंकाने वाला था, बल्कि इसने एक पुराना सवाल फिर से खड़ा कर दिया, क्या दीवारों पर गोबर लगाने से सच में गर्मी से राहत मिलती है?
प्रिंसिपल वत्सला के मुताबिक, यह एक वैज्ञानिक प्रयोग का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक भारतीय ज्ञान के जरिए "ताप तनाव नियंत्रण" पर शोध करना है। उन्होंने इसे गर्मी से निपटने का देसी तरीका बताया।

गोबर: एक पारंपरिक थर्मल इंसुलेटर
भारत के ग्रामीण इलाकों में गोबर का उपयोग सदियों से घरों की दीवारों और आंगन को लीपने के लिए किया जाता रहा है। ऐसा माना जाता है कि गोबर एक प्राकृतिक थर्मल इंसुलेटर की तरह काम करता है। जब इसे मिट्टी के साथ मिलाकर कच्ची दीवारों पर लगाया जाता है, तो यह एक तरह की लेयर बना देता है जो गर्मी को अंदर आने से रोकती है। यह लेयर दीवार की थर्मल कंडक्टिविटी को घटा देती है, जिससे कमरे के अंदर की ठंडक बनी रहती है।
The principal of Delhi University's Laxmibai College has been caught on video smearing cow dung on the walls of a classroom.
— Mr. Perfect (@Brave_092) April 14, 2025
When asked, Principal Pratyush Vatsala said that the purpose is to keep the classrooms cool in a natural way during summers.
#DelhiUniversity #BabyGirl pic.twitter.com/rpEKj0HLth
कब असर करता है यह उपाय?
विशेषज्ञों का मानना है कि गोबर का यह प्रभाव मुख्यतः कच्ची मिट्टी की दीवारों पर दिखता है। कंक्रीट या सीमेंट की दीवारों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम होता है, क्योंकि इनका थर्मल व्यवहार अलग होता है। यानी, गोबर से ठंडक तभी महसूस होगी जब उसे सही सतह पर और सही तरीके से लगाया जाए।
क्या कहती है विज्ञान और रिसर्च?
अब तक इस विषय पर कोई व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ है जो यह स्पष्ट रूप से बताए कि गोबर कितनी मात्रा में गर्मी से राहत देता है। हालांकि, पारंपरिक अनुभव और कुछ प्राथमिक प्रयोग यह जरूर संकेत देते हैं कि गोबर से इंसुलेशन में फर्क पड़ सकता है। यही वजह है कि डॉ. वत्सला ने इस प्रक्रिया को रिसर्च का हिस्सा बताया है।
निष्कर्ष
गोबर का दीवारों पर प्रयोग कोई नया विचार नहीं है, लेकिन शहरी सेटअप में इसे लागू करना बहस का विषय बन गया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इसमें संभावनाएं जरूर हैं, लेकिन ठोस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए और गहन शोध की जरूरत है।



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