Latest Updates
-
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए मशरूम का सेवन, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
Special Marriage Act क्या है? सोनाक्षी-जहीर इकबाल समेत इन बॉलीवुड कपल्स ने बिना धर्म बदले की शादी -
किन्नौर कैलाश के दर्शन के बाद बदल गई हिमांशी खुराना की जिंदगी, एक्ट्रेस ने बताया क्यों इतनी खास है यह जगह -
Raksha Bandhan 2026: कब है रक्षाबंधन? जानें तिथि, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और महत्व -
कभी 75 रुपये में साफ करते थे गाड़ियां, आज कहलाते हैं दिल्ली के खान सर; पढ़ें मनोज गर्ग की सक्सेस स्टोरी -
Sawan 2026: सावन में दाढ़ी और बाल कटवाना चाहिए या नहीं? जानें ज्योतिष और धार्मिक नियम
प्यार की अनोखी मिसाल! किसान ने पत्नी की याद में बना डाला 65 फीट ऊंचा मंदिर, रोज होती है पूजा
Unique Love Story: पूर्वी चंपारण में एक बुजुर्ग ने अपनी दिवंगत पत्नी के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए अनोखी पहल की है। आर्थिक तंगी के दौर में पत्नी ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि अधूरी पढ़ाई पूरी करने के लिए भी प्रेरित किया। आगे चलकर इसी शिक्षा के बल पर उन्हें सरकारी नौकरी मिली। पत्नी के योगदान को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी मानते हुए रिटायर्ड पंचायत सेवक ने उनकी स्मृति में 65 फुट ऊंचा भव्य मंदिर बनाया है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।

पत्नी की स्मृति में बनवाया मंदिर
पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड में बाल किशुन राम नाम के एक रिटायर्ड पंचायत सेवक ने अपनी दिवंगत पत्नी की याद को हमेशा जीवित रखने के लिए अनोखा कदम उठाया है। उन्होंने अपनी पत्नी शारदा देवी की स्मृति में एक मंदिर का निर्माण कराया है, जहां उनकी प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिर का उद्घाटन बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री राजू सिंह ने किया।
60 लाख रुपये की लागत से तैयार हुआ मंदिर
भुवन छपरा पंचायत के मधुचाई गांव निवासी बाल किशुन राम ने करीब 60 लाख रुपये खर्च कर इस मंदिर का निर्माण कराया है। उनकी पत्नी का निधन करीब छह वर्ष पहले हो गया था। पत्नी के निधन के बाद उन्होंने उनकी याद को सम्मान देने के लिए मंदिर बनवाने का निर्णय लिया। मंदिर के निर्माण में लगभग तीन महीने का समय लगा।
पत्नी के सहयोग ने बदली जिंदगी
बाल किशुन राम के अनुसार, आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी और वे मजदूरी करने लगे थे। शादी के बाद उनकी पत्नी शारदा देवी ने उन्हें दोबारा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें पहले ग्राम रक्षा दल में नौकरी मिली और बाद में पंचायत सेवक के पद पर नियुक्ति हो गई। उनका कहना है कि जीवन में मिली सफलता, सम्मान और स्थिरता में उनकी पत्नी का सबसे बड़ा योगदान रहा।
रिटायरमेंट की राशि से कराया निर्माण
पत्नी के निधन के बाद बाल किशुन राम गहरे सदमे में थे। उन्होंने तय किया कि पत्नी के त्याग और योगदान को हमेशा याद रखने के लिए कुछ विशेष किया जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने रिटायरमेंट से मिली राशि का उपयोग कर मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर में केवल शारदा देवी की प्रतिमा स्थापित की गई है, जहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जाती है।
लोगों के लिए बना प्रेरणा का केंद्र
मंदिर के उद्घाटन के दौरान पर्यटन मंत्री राजू सिंह ने इसे पति-पत्नी के प्रेम, सम्मान और समर्पण का अनोखा प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को रिश्तों में विश्वास, त्याग और सम्मान का संदेश देता रहेगा। आज यह मंदिर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।



Click it and Unblock the Notifications