Christmas 2023: 25 दिसंबर को ही क्यों मानाया जाता है क्रिसमस? जानें वजह और इतिहास

Christmas 2023: क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर को सेल‍िब्रेट क‍िया जाता है। हम में से ज्‍यादात्तर जानते हैं क‍ि इस दिन प्रभु यीशू का जन्‍म हुआ था। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी क‍ि 25 दिसंबर को प्रभु यीशू का जन्‍म नहीं हुआ था।

आपकी जानकारी के ल‍िए बता दें क‍ि ईसाह मसीह के जन्‍म की तारीख के बारे में किसी को भी सटीक जानकारी नहीं है। इसको लेकर कई तरह के तर्क दिए जाते हैं। वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाइबिल में इस बारे में कोई स्पष्ट रूप से किसी भी तारीख या दिन का जिक्र नहीं किया गया है। तो आइए जानते हैं क‍ि फ‍िर 25 दिसंबर को क्र‍िसमय क्‍यों सेल‍िब्रेट क‍िया जाता है।

Christmas

क्र‍िसमस बनाने की अलग-अलग वजह

25 दिसंबर को बड़ा दिन कहा जाता है, इसका कारण है कि यूरोप में कुछ लोग जो ईसाई समुदाय से नहीं थे, वे सूर्य के उत्तरायण के मौके को त्योहार के रूप में 25 दिसंबर को मनाया करते थे। इस दिन के बाद से दिन धीरे-धीरे बड़ा होना शुरू हो जाता है। यूरोप में इस दिन को गैर ईसाई लोग सूर्यदेव के जन्‍मदिन के तौर पर मनाया करते थे। वही इसी दिन रोमन संस्कृति के शनि के देवता का उत्सव सैटर्नालिया भी मनाया जाता है। इसलिए ईसाई धर्म के लोगों ने भी यीशू के जन्‍मदिन के तौर पर 25 दिसंबर को चुना। ये भी कहा जाता है कि गैर ईसाई लोगों के सामने ईसाई धर्म का एक बड़ा त्‍योहार खड़ा किया जाए, ये सोचकर ईसा मसीह के जन्मदिन को 25 दिसंबर को मनाने का निर्णय लिया गया।

यह भी है एक वजह

शुरुआत में क्रिसमस जनवरी के पहले सप्‍ताह में मनाया जाता था, लेकिन बाद में 25 दिसंबर को मनाया जाने लगा। दरअसल यीशू के जन्‍म को लेकर तमाम लोगों का ये भी मानना है कि वे ईस्‍टर के दिन अपनी मां के गर्भ में आए थे। गर्भ में आने का दिन कुछ लोग 25 मार्च को मानते हैं तो वहीं ग्रीक कैलेंडर का इस्‍तेमाल करने वाले इसे 6 अप्रैल मानते हैं।

इसके आधार पर नौ महीने 25 दिसंबर और 6 जनवरी को पूरे होते हैं। क्रिसमस की तारीख का निर्णय करते समय भी ये दोनों ही तारीखों पर चर्चा की गई। दो शताब्दियों से भी अधिक समय तक सहमति नहीं हो सकी।आज कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट परंपराओं में ईसाई अगर 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाते हैं, लेकिन रूस, मिस्र, यूनान आदि देशों के क्रिश्चियन 6 या 7 जनवरी को क्रिसमस मनाते हैं।

Christmas

पहली बार कब मनाया गया क्र‍िसमस

क्र‍िसमस शब्द क्राइस्ट मास (Mass of Christ) से निकला है। इसे पहली बार ईसाई रोमन सम्राट और रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन के शासनकाल के दौरान 336 में मनाया गया था। इसके बाद पोप जुलियस ने 25 दिसंबर को ऑफिशियल जीसस क्राइस्ट का जन्म दिवस मनाने का फैसला लिया था।

क्रिसमस ट्री की कहानी

उत्तरी यूरोप में हजारों साल पहले क्रिसमस ट्री चलन में आया था। रोम साम्राज्य में क्रिसमस ट्री का इस्तेमाल घरों को सजाने के लिए किया जाता था। उस दौरान Fir नाम के पौधे को सजाया जाता था और इस त्योहार को मनाया जाता था। चेरी के पेड़ की टहनियों को भी कुछ लोग क्रिसमस पर सजाते थे। कई लोग क्रिसमस ट्री नहीं खरीद पाते थे, तो लकड़ी को पिरामिड बनाकर क्रिसमस मनाते थे। तब से ही क्रिसमस ट्री की शुरुआत हुई है।

ऐसे शुरू हुआ सीक्रेट गिफ्ट का खेल

कहा जाता है कि चौथी शताब्दी में एशिया माइनर की एक जगह मायरा (अब तुर्की) में सेंट निकोलस नाम का शख्स रहता था, बेहद अमीर था। लेकिन उस शख्स के माता-पिता नहीं थे। इसलिए वो हमेशा गरीबों की मदद करता था, पर छुपके मतलब, वो उन्हें सीक्रेट गिफ्ट देकर खुश करने की कोशिश करता था।

एक दिन निकोलस को पता चला कि एक गरीब आदमी की तीन बेटियां है, जिनकी शादियों के लिए उसके पास बिल्कुल भी पैसा नहीं है। ये बात जान निकोलस इस शख्स की मदद करने पहुंचे। एक रात वो इस आदमी की घर की छत में लगी चिमनी के पास पहुंचे और वहां से सोने से भरा बैग डाल दिया। उस दौरान इस गरीब शख्स ने अपना मोजा सुखाने के लिए चिमनी में लगा रखा था। इस मोजे में अचानक सोने से भरा बैग उसके घर में गिरा। ऐसा एक बार नहीं बल्कि तीन बार हुआ। आखिरी बार में इस आदमी ने निकोलस ने देख लिया। निकोलस ने ये बात किसी को ना बताने के लिए कहा, लेकिन जल्द ही इस बात का शोर बाहर हुआ। उस दिन से जब भी किसी को कोई सीक्रेट गिफ्ट मिलता सभी को लगता कि ये निकोलस ने दिया। पूरी दुनिया में क्रिसमस के दिन मोजे में गिफ्ट देने यानी सीक्रेट सांता बनने का रिवाज है।

Story first published: Friday, December 22, 2023, 20:28 [IST]
Desktop Bottom Promotion