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यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की लिस्ट में शामिल दीपावली, जानें इससे देश में क्या कुछ बदलेगा?
Diwali Intangible Cultural Heritage: नया साल बस आने ही वाला है लेकिन दिल्ली में एक बार फिर से दिवाली मनाई जाएगी। अब आप कहेंगे कि दिवाली तो जा चुकी है तो दिवाली फिर से क्यों मनेगी? दरअसल, अंतरराष्ट्रीय संगठन यूनेस्को ने हमारे राष्ट्रीय पर्व दिवाली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल कर लिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में यह जानकारी दी। वैसे तो भारत के कई त्यौहार इस सूची में शामिल हैं, लेकिन दिवाली के शामिल हो जाने से ही पूरे देश में उत्साह की उमंग दौड़ पड़ी है। ऐसे में, जब हमारे इस खास पर्व को भारतीय ही नहीं वैश्विक स्तर पर भी सांस्कृतिक पहचान मिल रही है तो देश में क्यों दिवाली सम हाल नहीं होगा। तो चलिए, आज हम आपको बताते हैं कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची क्या है।

अमूर्त सांस्कृतिक विरासत लिस्ट क्या है?
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में वह परंपराएं, रीति-रिवाज, त्यौहार, ज्ञान, अभिव्यक्तियां और कलाएं शामिल की जाती हैं जिन्हें किसी समुदाय में सांस्कृतिक पहचान मिली होती है। हालांकि, यह विरासतें सिर्फ इतिहास में नहीं पीढ़ियों दर पीढ़ी चली आ रही होती हैं और समय के साथ विकसित होती रहती हैं, जिन्हें जीवित विरासत कहा जाता है। यूनेस्को द्वारा जारी की गई इस सूची का उद्देश्य उन सांस्कृतिक तत्वों को सुरक्षित रखना है, उनकी जिम्मेदारियां की रक्षा करना है और दुनिया में उनकी महत्वता को पहचान दिलाना है। दिवाली भी एक ऐसा ही पर्व है, जो केवल भारत ही नहीं विश्व के कई स्थानों पर मनाया जाता है। कई विदेशी लोग तो दिवाली का पर्व मनाने के लिए भारत भी आते हैं।
दिवाली के शामिल होने से क्या बदलेगा?
इस सूची में शामिल होने पर दिवाली को वैश्विक मान्यता और देश को गर्व प्राप्त हुआ है। अब दिवाली सिर्फ एक भारतीय त्योहार नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान पाएगा। इससे भारत की संस्कृति को विश्व मंच पर नई पहचान मिलेगी और भारतीयों को भी। वहीं, यूनेस्को की सूची में शामिल होने के बाद दिवाली जैसी परंपराओं के संरक्षित होगी व सही स्वरूप में आने वाली पीढ़ियां तक पहुंच पाएंगी। इसके साथ ही, केवल सरकार ही नहीं हम लोगों पर भी एक जिम्मेदारी बढ़ाने वाली है हमें इस त्यौहार को और खास बनाना होगा इस पर ध्यान देना होगा। वहीं, कुछ अर्थशास्त्री बताते हैं कि इससे सांस्कृतिक पहचान के साथ ही भारत को आर्थिक लाभ भी होगा। पर्यटन का क्षेत्र और व्यापक होगा ,लोग भारत से और अधिक जुड़ेंगे उसके त्यौहार मनाने के लिए और अधिक हमारे देश आएंगे जिससे पर्यटन क्षेत्र को लाभ होने की संभावना है।
क्या-क्या उम्मीदें और जिम्मेदारियां बढ़ीं?
इस घोषणा के बाद ही विशेषज्ञों का कहना है की दिवाली को अब पूरी दुनिया सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में दिखेगी इसलिए इस पारंपरिक रूप में ही नहीं बल्कि सम्मान और सजगता के साथ मनाने की जिम्मेदारी हर भारतीय पर बढ़ जाएगी। समुदायों परिवारों और सामाजिक संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि त्यौहार की मूल भावना प्रकाश एकता सद्भाव और पारिवारिक मूल्य बरकरार रहे ताकि इस त्यौहार की महत्वता बनी रहे। साथ ही, सरकार संस्कृत संस्थान और नागरिक मिलकर इस विरासत की रक्षा करें।



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