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क्या कोरोना जैसा लॉकडाउन फिर लगेगा? इबोला पर देश में हाई अलर्ट, सरकार और DGCA की सख्त एडवाइजरी जारी
Will Lockdown Like Corona Imposed Again: अभी कोरोना वायरस के जख्म हरे ही हैं और इबोला वायरस के खतरे की घंटी बज गई है। हालांकि अभी तक भारत में इबोला वायरस का एक भी केस नहीं मिला है लेकिन सरकार और DGCA की सख्त एजवाइजरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी हेल्थ इमरजेंसी को देखते हुए भारत के लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या देश में फिर से कोरोना जैसा लॉकडाउन लगेगा? आइए जान लेते हैं कि क्या है इबोला वायरस और ये कितना खतरनाक है? साथ ही ये भी कि देश में लॉकडाउन को लेकर क्या अपडेट है।

क्या देश में फिर लगेगा लॉकडाउन?
इबोला वायरस का बढ़ता कहर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है और लॉकडाउन का डर कहीं न कहीं घर कर रहा है। मगर सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साफ किया है कि देश में लॉकडाउन लगाने जैसी कोई स्थिति या योजना नहीं है। भारत में अभी तक इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम केवल एहतियाती और सुरक्षात्मक हैं ताकि इस वायरस को देश की सीमाओं के भीतर प्रवेश करने से रोका जा सके। इसलिए आम जनता को घबराने या किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग कर देश की तैयारियों की समीक्षा की है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) को ट्रैकिंग, टेस्टिंग और सर्विलांस सिस्टम को 24/7 एक्टिव रखने के निर्देश दिए गए हैं।
एयरपोर्ट्स पर कोरोना जैसी सख्ती शुरू
नागर विमानन महानिदेशालय ने WHO के नोटिफिकेशन के बाद देश के सभी हवाई अड्डों और एयरलाइंस के लिए एक सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, खासकर अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों के लिए कोरोना काल जैसे कुछ प्रोटोकॉल को दोबारा लागू किया गया है। जिनके बारे में नीचे बताया गया है-
20 से ज्यादा एयरलाइंस के लिए सख्त आदेश
युगांडा और कांगो जैसे प्रभावित देशों से सीधे या कनेक्टिंग फ्लाइट्स के जरिए भारत आने वाली 20 से अधिक एयरलाइंस (जिनमें एअर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद और केएलएम शामिल हैं) को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म (Self-Declaration Form) अनिवार्य
इन देशों से आने वाले सभी यात्रियों को भारत में उतरने से पहले एक स्व-घोषणा पत्र भरना होगा, जिसे एयरलाइंस सीधे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपेंगी।
थर्मल स्कैनिंग और आइसोलेशन
संदिग्ध लक्षणों वाले यात्रियों की हवाई अड्डों पर ही कड़ी थर्मल स्कैनिंग की जाएगी। यदि किसी यात्री में इबोला के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे तुरंत आइसोलेट (क्वारंटाइन) करने की व्यवस्था की गई है।
मास्क और सुरक्षा उपकरण
उड़ानों के दौरान क्रू मेंबर्स के लिए मास्क और आवश्यक पीपीई (PPE) किट के उपयोग को लेकर भी सतर्कता बरतने को कहा गया है।
क्या है इबोला वायरस और कितना खतरनाक है इसका इतिहास?
इबोला एक अत्यंत संक्रामक और घातक वायरल बीमारी है। इसके बारे में सबसे पहले साल 1976 में पता चला था, जब कांगो में इबोला नदी के पास इसका पहला मामला सामने आया था, इसी कारण इसका नाम 'इबोला' पड़ा। यह वायरस संक्रमित जानवरों जैसे चमगादड़ या बंदर और संक्रमित इंसानों के शारीरिक तरल पदार्थों जैसे खून, पसीना, लार आदि के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। साल 2014-2016 के दौरान पश्चिम अफ्रीका में इस वायरस ने भयंकर तबाही मचाई थी, जहां इसकी चपेट में आने से 11,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। भारत सरकार इसी पुराने इतिहास को देखते हुए इस बार पहले से ही पूरी तरह मुस्तैद है ताकि देश को सुरक्षित रखा जा सके।
1 क्या हैं इबोला वायरस के शुरुआती लक्षण
संक्रमण के शुरुआती दिनों में इबोला के लक्षण मलेरिया, टाइफाइड या सामान्य फ्लू जैसे ही लगते हैं, जिससे इसे पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है:
अचानक तेज बुखार आना
गंभीर सिरदर्द
मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना
गले में खराश या दर्द
2. क्या हैं इबोला वायरस के गंभीर लक्षण
जैसे-जैसे वायरस शरीर में फैलता है, यह अंगों और इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसके बाद मरीज की स्थिति गंभीर होने लगती है:
लगातार उल्टी और दस्त होना (जिससे शरीर में पानी की तेजी से कमी हो जाती है)
पेट में तेज दर्द
त्वचा पर लाल चकत्ते (Rash) पड़ना
आंखों का अत्यधिक लाल होना
बिना किसी चोट के शरीर पर नीले निशान पड़ना या ब्लीडिंग होना (मसूड़ों, नाक, उल्टी या मल के रास्ते खून आना)
इबोला जानलेवा क्यों है?
यदि स्थिति बेकाबू हो जाए, तो इबोला वायरस शरीर के भीतर इस हद तक तबाही मचाता है कि लिवर और किडनी फेल होने लगते हैं और मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर कई अंगों का एक साथ काम बंद करना हो जाता है। जिसमें शरीर से अत्यधिक खून और पानी बह जाने के कारण ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर जाता है और मरीज की मौत हो जाती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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