Latest Updates
-
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त -
SRH की मालकिन काव्या मारन की शादी हुई तय! कौन है दुल्हा, कब और कहां होगी वेडिंग, जानिए पूरी डिटेल्स -
Ashtami Kab Hai: 18 या 19 अक्टूबर, कब है अष्टमी? जानें सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती -
Navratri Day 7 Wishes: मां कालरात्रि का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को भेजें महासप्तमी की शुभकामनाएं -
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग
Uttarakhand Tunnel Rescue: कौन होते हैं रैट माइनर्स? जिन्होंने हीरो बनकर सुरंग से मजदूरों को निकाला
What Is Rat-Hole Mining, Technique Used In Uttarkashi Tunnel Rescue Operation: 12 नवंबर से उत्तरकाशी टनल में फंसे 41 मजदूरों को निकालने के लिए अमेरिकी ऑगर मशीन के फेल होने पर रैट माइनर्स को बुलाया गया है।
जिन्होंने सिर्फ 21 घंटे में हाथों से करीब 12 से 13 मीटर खोद दिया और 16 दिनों से उत्तराखंड के सिल्क्यारा-डंडालगांव टनल में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकाल दिया। जानिए कौन होते हैं रैट माइनर्स, जो इस रेस्क्यू मिशन के लिए हीरो साबित हुए हैं। आइए जानते हैं कौन होते हैं रैट माइनर्स और क्यों 2014 से रैट माइनर्स पर लगा रखी पाबंदी।

कौन होते हैं रैट माइनर्स
ये मजदूर चूहों की तरह छोटे बिलों और सुरंगों में घुसकर मलबे को बाहर निकालते हैं। यानी चूहों की तरह बिल खोदना। इस दौरान रैट माइनार्स की सुरक्षा के लिए उनके पास ऑक्सीजन मास्क, आई ग्लैसेज और एयर सर्कुलेशन के लिए ब्लोअर मौजूद रहता है।
क्या होती है रैट होल माइनिंग
होल माइनिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लगभग 3-4 फीट गहरी और बेहद छोटी सुरंगें खोदी जाती हैं, इसमें श्रमिक सुरंग के के अंदर घुसते हैं और माइनिंग को अंजाम देते हैं. कोयला उत्खनन में इसका इस्तेमाल किया जाता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां अवैध खनन होता है। उत्तरकाशी टनल में बचाव कार्य को अंजाम देने आए रैट माइनर्स दिल्ली और झांसी से बुलाए गए हैं। इन्हें रैट माइनिंग का पुराना अनुभव है।
क्यों इस माइनिंग पर लगी पाबंदी
रैट माइनिंग को पर्यावरण के लिहाज से खतरनाक माना जाता है। क्योंकि खदानें आमतौर पर अनियमित होती है, जिनमें उचित वेंटिलेशन और सुरक्षा उपायों का अभाव होता है। माइनिंग के इस तरीके की कई घटनाएं सामने आने के बाद इसे काफी खतरनाक माना जाता है। बरसात के दौरान कई मजदूरों इस माइनिंग की वजह से जान खो चुके हैं। इसलिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 2014 में इस माइनिंग पर बैन लगा दिया था।



Click it and Unblock the Notifications
