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Guru Purnima Speech In Hindi: 'गुरु पूर्णिमा' पर छात्रों के लिए भाषण, निबंध एवं विचार, जानें इतिहास और महत्व
Guru Purnima Speech In Hindi: आज यानी 10 जुलाई 2025 को 'गुरु पूर्णिमा' है। ये एक ऐसा पर्व है जिसका हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, अषाढ़ में पड़ने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा वीरवार 10 जुलाई को पड़ रही है। गुरु पूर्णिमा पर्व महान ऋषि व्यास की याद में मनाया जाता है। महर्षि व्यास वही महान ऋषि हैं जिन्होंने चार वेदों को संकलित किया, उन्होंने 18 पुराण, महाभारत और श्रीमद् भगवत को लिखा यही वजह है कि इस दिन को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है।
इस खास दिन को गुरू को समर्पित किया जाता है। सारे छात्र इस दिन अपने गुरू की पूजा करते हैं, ऐसे में स्कूल और कॉलेज में बच्चों के द्वारा निबंध, भाषण और विचार प्रस्तुत किए जाते हैं। आइए फिर जान लेते हैं कि गुरू पूर्णिमा पर निबंध, भाषण और विचार कैसे लिखे जाते हैं?

क्या है गुरू पूर्णिमा का इतिहास
गुरु पूर्णिमा का पर्व भारत की प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक है। यह पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और यह गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन माना जाता है। इस पर्व का इतिहास भी बहुत खास है। ये तो आप जानते ही गुरु पूर्णिमा को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन महान ऋषि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उनकी याद में इस पर्व को मनाया जाता है।
बता दें कि गुरु पूर्णिमा का संबंध गौतम बुद्ध से भी है। ऐसा माना जाता है कि बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश इसी दिन सारनाथ में दिया था। इसलिए बौद्ध धर्म में भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे श्रद्धा से मनाया जाता है। वहीं जैन धर्म के अनुसार, गुरु पूर्णिमा को भगवान महावीर के पहले शिष्य गौतम गणधर को दीक्षा प्राप्त हुई थी। इसलिए यह दिन वहां भी गुरु-भक्ति और ज्ञान-दान का प्रतीक है।

गुरू पूर्णिमा पर निबंध
सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और साथियों को मेरा नमस्ते। आज मैं आपके सामने गुरू पूर्णिमा के अवसर पर एक निबंध सुनाने जा रही हूं या रहा हूं।
गुरू पूर्णिमा का पर्व ऋषि व्यास को समर्पित है जो आषाढ़ महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध हिंदू त्योहार है। गुरु व्यास को एक महान ऋषि के रूप में सम्मानित किया जाता है जिन्होंने 18 पुराणों, महाभारत महाकाव्य और श्रीमद भागवत ग्रंथों को संकलित किया।
उनके द्वारा रचित महाकव्य और ग्रंथ हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शिक्षक की भूमिका अनिवार्य रूप से महत्वपूर्ण होती है। कहा भी गया है कि बिना गुरू ज्ञान नहीं मिलता है। जन्म देने वाले माता-पिता के बाद गुरू का स्थान आता है। गुरू को देवताओं से ऊपर माना जाता है।
पहली से पांचवी तक के बच्चों के लिए निबंध
सभी शिक्षकों और साथियों को गुरू पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। आज गुरू पूर्णिमा के मौके पर हम आपको ये निबंध सुनाने ज रहे हैं।
गुरु पूर्णिमा का पर्व अषाढ़ माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। ये हिंदुओं, बौद्धों और जैनियों द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार है। छात्र, शिष्य और अनुयायी इसे अपने शिक्षकों और गुरुओं के प्रति गहरा कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करने के लिए मनाते हैं। यह आषाढ़ की पूर्णिमा के दिन हिंदू कैलेंडर के आधार पर मनाया जाता है। गुरु दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ है अंधकार को दूर करने वाला।
ऐसा माना जाता है कि गुरु की पूजा करने से शिष्य गुरु की दीक्षा प्राप्त करते हैं। जैसा कि हिंदू ग्रंथों में कहा गया है, गुरु पूर्णिमा का त्योहार गुरु व्यास के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वह महाभारत, पुराणों और वेदों के प्रसिद्ध लेखक हैं। उन्हें हिंदू परंपरा के अनुसार अमर माना जाता है। इस पर्व को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा, हिंदू पौराणिक कथाओं में, यह भी उल्लेख किया गया है कि इस दिन भगवान शिव ने ऋषियों को योग का ज्ञान प्रदान किया था।

गुरू पूर्णिमा पर 10 पंक्तियां
1. गुरु पूर्णिमा का त्योहार गुरुओं के सम्मान का प्रतीक है।
2. यह पर्व हर साल आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
3. इस दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का विभाजन किया।
4. गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
5. गुरु का स्थान माता-पिता से भी ऊँचा माना गया है।
6. इस दिन छात्र अपने गुरु को श्रद्धा और आभार अर्पित करते हैं।
7. स्कूलों, आश्रमों और शिक्षण संस्थानों में विशेष कार्यक्रम होते हैं।
8. गुरु के आशीर्वाद से जीवन में सफलता और सद्गति मिलती है।
9. यह पर्व आत्मचिंतन, विनम्रता और ज्ञान के महत्व को याद दिलाता है।
10. हमें हमेशा अपने गुरु का आदर और अनुसरण करना चाहिए।



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