Republic Day 2025 Shayari: मुल्क के लिए अपने जज़्बातों को बयां करने के लिए गणतंत्र दिवस पर शेयर करें ये शायरी

Republic Day 2025 Shayari: गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है, जो भारत के संविधान के लागू होने और देश के पूर्ण गणराज्य बनने की याद दिलाता है। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान प्रभाव में आया, जिसने भारत को एक लोकतांत्रिक और संप्रभु गणराज्य घोषित किया। यह दिन स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं के योगदान को सम्मान देने का अवसर है।

नई दिल्ली में राजपथ पर भव्य परेड इस दिन का मुख्य आकर्षण होती है, जिसमें भारत की सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन किया जाता है। परेड में तीनों सेनाओं, झांकियों और स्कूली बच्चों के कार्यक्रम शामिल होते हैं।

Happy Republic Day 2025 Shayari Wishes Quotes Messages FB Whatsapp Status Insta Captions in Hindi

इस दिन को मनाने का उद्देश्य हर भारतीय को उनके अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाना है। यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और विविधता में एकता का प्रतीक है।

गणतंत्र दिवस सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का दिन है, जो हमें देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रेरित करता है।

Happy Republic Day 2025 Shayari Wishes in Hindi (गणतंत्र दिवस शायरी)

1.
लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
फ़िराक़ गोरखपुरी

2.
वतन की सर-ज़मीं से इश्क़-ओ-उल्फ़त हम भी रखते हैं
खटकती जो रहे दिल में वो हसरत हम भी रखते हैं
जोश मलसियानी

3.
है मोहब्बत इस वतन से अपनी मिट्टी से हमें
इस लिए अपना करेंगे जान-ओ-तन क़ुर्बान हम
अज्ञात

4.
वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
मुज़फ़्फ़र वारसी

Republic Day 2025 Famous Shayari Status and Captions in Hindi

5.
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
बिस्मिल अज़ीमाबादी

6.
वतन के जाँ-निसार हैं वतन के काम आएँगे
हम इस ज़मीं को एक रोज़ आसमाँ बनाएँगे
जाफ़र मलीहाबादी

7.
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
लाल चन्द फ़लक

8.
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा
अल्लामा इक़बाल

Gantantra Diwas 2025 Shayari in Hind

9.
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
अल्लामा इक़बाल

10.
वतन की ख़ाक से मर कर भी हम को उन्स बाक़ी है
मज़ा दामान-ए-मादर का है इस मिट्टी के दामन में
चकबस्त बृज नारायण

11.
वतन की पासबानी जान-ओ-ईमाँ से भी अफ़ज़ल है
मैं अपने मुल्क की ख़ातिर कफ़न भी साथ रखता हूँ
अज्ञात

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Tuesday, January 21, 2025, 17:00 [IST]
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