The Origin Of Kaju-katli: काजू कतली और सिखों का आपस में है गहरा संबंध, जानें कहां से आई काजू कतली

The Origin Of Kaju Katli : क्या आप भी उन लोगों में से है जिन्हें मीठा खाना बहुत पसंद है। तब तो संभवत: आपको मीठे में काजू की कतली बहुत पसंद होगी। और जब कभी आपको मीठा खाने की तलब लगती है तो काजू कतली का नाम सबसे पहले आपके जहन में आता है। वैसे आए भी क्यूं ना काजू कतली का टेस्ट होता ही ऐसा है जो हर किसी को अपना दीवाना बना देता है।

बल्कि फेस्टिवल का मज़ा इस मिठाई के बिना अधूरा माना जाता है। लेकिन क्या कभी काजू कतली का टेस्ट लेते हुए आपके मन में ये ख्याल आता है कि इतनी जबरदस्त चीज सबसे पहले कहां, किसने और कब बनाई होगी। क्या शुरूआत से इसे बनाने का तरीका वो ही रहा है जिसे हम फॉलो करते आए है। अगर आप काजू कतली का इतिहास जानना चाहते है तो ये आर्टिकल अंत तक जरूर पढ़ें। यहां हम आपको काजू कतली से जुड़े दिलचस्प बातें बताने वाले है।

History of Popular Sweet Kaju-katli in Hindi

काजू कतली का इतिहास
हर बेहतरीन चीज की तरह काजू कतली का इतिहास भी बड़ा दिलचस्प रहा है। ऐसा कहा जाता है कि काजू कतली का आविष्कार सबसे पहले मुगलों के काल में हुआ था। वो भी मुगल बादशाह जहांगीर के शासन काल में। जहांगीर ने सिख गुरू को सम्मान देने के लिए शाही रसोड़े में पहली बार काजू कतली बनवाई थी। इसे बनाने के लिए गाढ़ा दूध, रबड़ी, कटे हुए काजू और बादाम का इस्तेमाल किया गया। पहले इस मिठाई को काजू-बर्फी का नाम दिया गया था, लेकिन वक्त बदलने के साथ इसका नाम बदला और इसे काजू कतली कहा जाने लगा।

सिखों और काजू कतली का संबंध
मुगल बादशाह जहांगीर ने अपने शासन काल के दौरान कई सिख गुरुओं और राजाओं को बंदी बना लिया था और उन्हें लंबे समय तक ग्वालियर के किले में बंदी बनाकर रखा था। ये बंदी इस किले में असहनीय पीड़ा सहते हुए दयनीय स्थिति में रहते थे। इन्हीं बंदियों में एक बंदी सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोविंद थे। जिन्होंने किले के अंदर कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता की और सभी कैदियों और गार्डों की जिंदगी को बेहतर बनाया। इन्हीं सब चीजों से प्रभावित होकर बादशाह जहांगीर ने घोषणा की, कि गुरु हरगोविंद को मुक्त कर दिया जाएगा

और जो कोई भी उनके वस्त्र धारण कर सकता है, वह मुक्त हो जाएगा। गुरु हरगोविंद ने गुप्त रूप से 52 राजाओं को आदेश दिया कि वे इतना लंबा वस्त्र बनाए, जिसे जेल में हर कैदी पहन सकें। इसके बाद दीवाली पर, सभी कैदियों को उनके लंबे वस्त्र पहने हुए मुक्त कर दिया गया था। तभी से, स्वतंत्रता के इस दिन को दुनिया भर में सिखों द्वारा बंदी चोर दिवस के रूप में जाना जाता है। वहीं, सिख गुरु के सम्मान के संकेत के रूप में, जहांगीर के शाही रसोइए ने मुक्ति के दिन पहली बार काजू की बर्फी पकाई थी।

काजू कतली बनाने का तरीका
सबसे पहले काजू को पीस कर बारीक पाउडर बना लीजिए। फिर एक नॉन स्टिक पैन में शक्कर और पानी डालें। इसे सिंगल स्ट्रिंग कंसिस्टेंसी तक पिघलाए। इसके बाद इसमें काजू पाउडर डालकर अच्छे से मिलाए और इसे मीडियम फलेम पर पकाए। इसके बाद इस पेस्ट को 2 बटर पेपर के बीच में रखें। इस पेस्ट को बेलन की मदद से चपटा करें। फिर ऊपर का बटर पेपर निकाल लें। फिर आप चाहे तो ड्राईफ्रूट या चांदी के बरख से सजा सकते है। फिर 30 मिनट तक इसे यूं ही छोड़ दें। इसके बाद इसे साफ, धारदार चाकू से कतली के शेप में काटें।

न्यूट्रीशंस से भरपूर है काजू कतली
काजू कतली प्रोटीन से भरपूर होती है। जी हां, 100 ग्राम काजू में 36% प्रोटीन होता है। प्रोटीन डवलपमेंट और ओवरओल ग्रोथ के लिए आवश्यक है। ये कैल्शियम बनाए रखने में भी मदद करता है। ऐसे में काजू को अपनी डाइट में शामिल करके आप अपनी मसल्स और बोन्स को मजबूत बना सकते है।

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