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स्पेस में कैसे किया जाता है बाथरूम का इस्तेमाल? जानिए अंतरिक्ष यात्रियों की खास टॉयलेट तकनीक
Axiom 4 Mission Shubhanshu Shukla: भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने करीब 40 सालों के बाद इतिहास रच दिया है। अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के बाद वो पहले भारतीय हैं जो इस अंतरिक्ष यात्रा को कर रहे हैं, पूरे देश को शुभांशु पर गर्व है। उनकी ये यात्रा 14 दिन की होगी। इस दौरान शुभांशु को अंतरिक्ष में कई चैलेंज फेस करने होंगे क्योंकि स्पेस में जीरो ग्रेविटी होती है। इस वजह से हर चीज बस तैरती रहती है।
ऐसे में ये सवाल तो दिमाग में जरूर आता है कि आखिर स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स टॉयलेट कैसे इस्तेमाल करते हैं? आइए इस बारे में हम आपको बताते हैं जो बहुत ही दिलचस्प जानकारी होगी।
कैसे होते हैं अंतरिक्ष के टॉयलेट?
जब हम धरती पर टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण हमारी मदद करता है और मल-मुत्र नीचे की ओर गिरता है। मगर अंतरिक्ष में, जहां सब कुछ तैरता है वहां वॉशरूम जाना एक साइंस प्रोजेक्ट जैसा होता है। जीरो ग्रैविटी में न तो मल नीचे गिरता है, न पानी बहता है। ऐसे में अंतरिक्ष एजेंसियों ने विशेष हाई-टेक टॉयलेट डिजाइन किए हैं जो सक्शन यानी खिंचाव की ताकत से काम करते हैं। आइए बताते हैं कि कैसे अंतरिक्ष यात्री स्पेस में टॉयलेट इस्तेमाल करते हैं।

कैसे काम करता है स्पेस टॉयलेट?
बता दें कि स्पेस टॉयलेट में सक्शन सिस्टम होता है, जो वेस्ट को खींचकर एक कंटेनर में जमा कर लेता है। यूरिन के लिए एक ट्यूब जैसी संरचना होती है जिसमें वैक्यूम की मदद से पेशाब खींचा जाता है। इसके अलावा सॉलिड वेस्ट के लिए अंतरिक्ष यात्री एक बकेट जैसी सीट पर बैठते हैं, जो विशेष बेल्ट्स से शरीर को टॉयलेट सीट से बांध देती है ताकि वे उड़ें नहीं। उसके बाद वैक्यूम के जरिए मल को खींचकर एक कंटेनर में जमा किया जाता है।
शरीर से निकले वेस्ट का क्या होता है?
बहुत कम लोगों को पता होगा कि स्पेस में शरीर से निकले वेस्ट का क्या होता है? बता दें कि पेशाब को फिल्टर करके दोबारा पानी में बदला जाता है, जिसे पीने योग्य बनाया जाता है। वहीं सॉलिड वेस्ट को विशेष पैकेट में सील करके स्टोरेज में रखा जाता है और वापसी पर पृथ्वी पर लाया जाता है या स्पेस में ही किसी खास जहाज में डालकर पृथ्वी की कक्षा में जलाया जाता है।

क्या होता है लापरवाही का नतीजा
ये तो आप जानते ही हैं कि स्पेस में जीरो ग्रेविटी होती है इस वजह से हर चीज हवा में तैरती है। ऐसे में शरीर से बाहर निकले वेस्ट (पेशाब या मल) को कंट्रोल करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। अगर इसे ठीक से मैनेज न किया जाए तो वह पूरे कैप्सूल में फैल सकता है, जिससे स्वास्थ्य और सफाई दोनों को खतरा होता है।



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