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सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में 3 प्रतिशत महिलाओं को ही मिला सीनियर एडवोकेट का दर्जा, देखिए डाटा

भारत में महिलाओं को समाज में बाराबरी का अधिकार देने के लिए हर क्षेत्र में उनके लिए रिजर्वेशन रखे गए है। लेकिन भारत के कोर्ट में महिलाएं आज भी कहीं पीछे ही नजर आ रही है। इंटरनेशनल वुमन्स डे के मौके पर इंडिया के बार एंड बेंच ने ट्वीट कर एक जानकारी साझा की, जिसमें उन्होने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में केवल 3 प्रतिशत महिलाएं ही सीनियर एडवोकेट हैं।
जबकि भारत के चीफ जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने हाल ही में इस बात पर जोर दिया है कि कानूनी पेशे का भविष्य महिलाओं का है, लेकिन वर्तमान में सीनियर एडवोकेट्स के पोजीशन की जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
बार और बेंच ने उन महिलाओं की संख्या का एक डाटा भी तैयार किया जिन्हें अब तक सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा 'सीनियर एडवोकेट' गाउन से सम्मानित किया गया है। इकट्ठा की गई जानकारी इस बात की ओर इशारा करती है कि कानूनी पेशा एक 'पुराने लड़कों का क्लब' बना हुआ है, जिसमें CJI का बयान एक दूर का सपना लगता है।
बार और बेंच द्वारा इकट्ठा किए गए डाटा के मुताबिक भारत के सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्ट में 3,149 सीनियर एडवोकेट हैं। जिनमें सिर्फ 3.4 प्रतिशत यानि 106 महिलाएं ही सीनियर एडवोकेट हैं।
पूर्व महिला जजेस और सीनियर एडवोकेट्स के मुताबिक जो बाधाएं महिलाओं को उनके क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने से रोकती हैं, आज भी मौजूद हैं। जिसमें पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता भी इस पेशे में मौजूद है।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स का डाटा
ऑनलाइन उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अब तक 488 से ज्यादा एडवोकेट को सीनियर पद दिया है, जिनमें सिर्फ 19 महिलाएं ही शामिल हैं। जबकि 1950 से 2013 तक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के बाद सिर्फ 4 महिलाओं को ही सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया गया था, वहीं पिछले 9 सालों में 15 महिलाओं को ही सीनियर एडवोकेट का गाउन देकर सम्मानित किया गया है।
कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास के चार्टर्ड हाई कोर्ट्स में भी महिला सीनियर एडवोकेट की कमी नजर आती है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने कुल 422 महिला वकीलों में से सिर्फ 4 महिला वकीलों को ही सीनियर एडवोकेट का गाउन सौंपा। बॉम्बे हाई कोर्ट में केवल 8 महिलाएं ही सीनियर एडवोकेट के पद पर हैं, जिनमें से केवल चार महाराष्ट्र में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस कर रही हैं। जबकि मद्रास हाई कोर्ट में कुल 299 सीनियर एडवोकेट्स में से 10 महिलाएं ही सीनियर ए़डवोकेट हैं।



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