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देश को स्वतंत्र हुए 77 साल पूरे होने जा रहे हैं। इतने सालों में देश ने विकास और प्रगति के कई दौर देखें हैं। वही हमारे देश ने सबसे बडा बदलाव महिलाओं की स्थितियों में देखा हैं। सदियों से पुरूषसत्तात्मक समाज में महिलाओं ने कई जुल्म सहे हैं। एक दौर था जहां महिलाएं बाल विवाह, विधवा विवाह और सती प्रथा जैसी रूढ़िवादी प्रथाओं का शिकार होती थी।
बदलते वक्त के साथ क्रांतिकारी विचारधाराओं में बदलाव के वजह से इन कुरीतियों का अंत हुआ। आज महिलाएं समाज की बेड़िया तोड़ कई क्षेत्रों में अपने वर्चस्व का परचम लहरा रही हैं। वर्तमान में देश की वित्तमंत्री और राष्ट्रपति एक महिला हैं। वहीं राजनीति से लेकर खेल जगत और रक्षा क्षेत्र से लेकर प्रशासनिक सेवा तक में महिलाओं की स्थिति मजबूत हुई है।
हालांकि महिलाओं को इन क्षेत्रों में प्रोत्साहित करने का श्रेय इतिहास की कुछ महिलाओं को जाता है, जो अपने कार्य और प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। आज हम आपको ऐसी महिलाओं के बारे में बता रहे हैं, जो अपने क्षेत्र में प्रथम रह चुकी है। आइए जानते हैं ऐसी महिलाओं के बारे में, जिन्हें भारतीय इतिहास में 'प्रथम महिला' की उपाधि मिली हुई है।

इंदिरा गांधी, पहली महिला प्रधानमंत्री
इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। वह लगातार 3 बार भारत की प्रधानमंत्री रहीं। चौथी बार 1980 से 1984 तक फिर पीएम पद पर रहीं। इंदिरा गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गईं। इंदिरा वह प्रधानमंत्री हैं, जिनके शासनकाल में 1971 का युद्ध हुआ और पाकिस्तान के दो टुकड़े व बांग्लादेश नया देश बनाया गया। 1971 में, वह भारत रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला भी बनीं। 1999 में बीबीसी के एक सर्वेक्षण में उनकी वैश्विक छवि को देखते हुए उन्हें "सदी की महिला" के नाम से सम्मानित किया गया था।

सावित्री बाई फुले, पहली शिक्षिका
देश की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई फुले हैं। महाराष्ट्र में जन्मी सावित्री बाई ने उस समय शिक्षित होने की ठानी जब लड़कियों को शिक्षित करना पाप समझा जाता था। दलितों के लिए शिक्षा अपराध रूपी थी। उन्होंने न केवल खुद शिक्षा हासिल की, बल्कि लड़कियों के लिए 18 स्कूल खोले। बाल विवाह, सती प्रथा जैसे अंधविश्वास और रूढ़ियों की बेड़ियां तोड़ने के लिए संघर्ष किया।

आनंदीबाई जोशी, पहली महिला डॉक्टर
भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी थीं। जिनका जन्म 31 मार्च 1865 में पुणे में हुआ था। इसके अलावा इंग्लिश दवाईयों में भी शिक्षा पूरी करने वाली वो पहली महिला डॉक्टर थी। आनंदीबाई 14 वर्ष की उम्र में वो पहली बार मां बनी थीं, हालांकि जन्म के महज 10 दिन बाद ही उनके बच्चे की मौत हो गई थी, तब उन्होंने डॉक्टर बनने का फैसला कर लिया था। 1883 में पेंसिल्वेनिया के महिला विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। 1886 में भारत लौंटी और उन्हें अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल में महिला वार्ड की चिकित्सा प्रभारी के तौर पर नियुक्त किया गया था। हालांकि महज 22 साल की उम्र में टीबी की वजह से उनका निधन हो गया।

नीरजा भनोट, अशोक चक्र से सम्मानित पहली महिला
नीरजा भनोट अशोक चक्र से सम्मानित पहली महिला हैं। जिन्होंने एयरहोस्टेस के तौर पर काम करते हुए 1986 में कराची में पैन एम 73 विमान को हाइजैक करने के दौरान आतंकियों से प्लेन में सवार लोगों को बचाया था लेकिन बाद में खुद शहीद हो गई थीं। नीरजा को भारत सरकार ने वीरता और साहस के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया जो भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। नीरजा की बहादुरी को देखते हुए पाकिस्तान ने उन्हें तमगा-ए-इंसानियत का खिताब भी दिया है।

किरण बेदी, पहली महिला आईपीएस अधिकारी
भारत की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी थीं। उनका जन्म 1949 को अमृतसर के पंजाब में हुआ था। 35 वर्षों की सर्विस के दौरान किरण बेदी ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और कई महत्वपूर्ण अवार्ड्स भी प्राप्त किए। इसके बाद वह 4 साल से ज्यादा वक्त तक पुदुचेरी की उपराज्यपाल रहीं।

कल्पना चावला, पहली महिला अंतरिक्ष यात्री
कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की पहली महिला हैं। इन्होंने अपने अपनी जीवन में कुल दो बार स्पेस मिशन की उड़ान भरी। पहली उड़ान तो सफल रही लेकिन दूसरी बार वो स्पेस से लौट नहीं पाई। साल 1976 में कल्पना ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में अपनी बैचलर्स की डिग्री पूरी की। उस समय एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग करने वाली वो पहली महिला थी। 1994 में उन्हें अंतरिक्ष यात्री के 15वें समूह में चयनित हो वो अंतरिक्ष में गई थी।

मैरी कॉम, पहली महिला मुक्केबाज
भारतीय महिला मुक्केबाज मैरी कॉम 6 बार विश्व चैंपियन रह चुकी हैं। मैरी कॉम ऐसा करने वाली इकलौती महिला मुक्केबाज हैं। इसके अलावा वे 5 बार एशियाई चैंपियनशिप जीतने वाली भी इकलौती खिलाड़ी हैं। ओलंपिक में कांस्य जीतकर उन्होंने महिला मुक्केबाजी में अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज करवा दिया है।

मिताली राज, डबल सेंचुरी लगाने वाली महिला क्रिकेटर
भारतीय क्रिकेटर मिताली राज टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक बनाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनीं। उन्होंने 2004 में वेलिंगटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ़ 214 रनों की शानदार पारी खेलकर यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। इसके अलावा भी उनके नाम पर कई रिकॉर्ड हैं।

अरुणिमा सिन्हा, पहली दिव्यांग पर्वतारोही
पर्वतारोही अरुणिमा सिन्ह अंटार्कटिका के सबसे ऊंचे शिखर माउंट विन्सन और माउंट एवरेस्ट फतेह करनी वाली दुनिया और भारत की पहली दिव्यांग महिला हैं। अरुणिमा सिन्हा नेशनल वॉलीबॉल टीम का हिस्सा थीं। 23 साल की उम्र में स्पोर्ट्स इवेंट के लिए दिल्ली जाते हुए एक दर्दनाक हादसे की वजह से ट्रेन से उनका एक पैर कट गया लेकिन उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी।
सरला ठकराल, पहली महिला पायलट
भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल ने। इन्होंने अपनी पहली सोलो फ्लाइट साड़ी पहनकर उड़ाई थी। सरला की शादी 16 साल की उम्र में पायलट पी डी शर्मा से हुई थी। सरला की शादी जिस परिवार में हुई थी उस परिवार में 9 सदस्य थे और सभी पायलट थे। शादी के बाद पी डी शर्मा ने सरला की जिज्ञासा देखते हुए ही उन्हें पायलट बनने के लिए कहा। पायलट ट्रेनिंग के लिए सरला का दाखिला उनके ससुर ने जोधपुर फ्लाइंग क्लब में करवाया।
फ्लाइंग टेस्ट पास करने के बाद सरला ने 'A' लाइसेंस हासिल करने के लिए करीब 1000 घंटे तक प्लेन उड़ाने का एक्सपीरियंस पूरा किया। उसके बाद महज 21 साल में वो भारत की पहली महिला बनीं।



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