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लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा!
International Coffee Day: 600 ईस्वी में एक गड़रिए ने ढूंढी थी कॉफी, चोरी छुपे पहुंची थी भारत
History of Coffee : दुनियाभर में कॉफी पीने वालो की संख्या करोड़ों में है। कुछ लोगों की सुबह की शुरुआत कॉफी से होती है, तो कुछ लोग हैंगऑवर उतारने के लिए इसका सहारा लेते हैं। कई लड़कियों का तो ये फेवरेट स्क्रब है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि आखिर ये कॉफी आई कहां से? जी हां, कॉफी का इतिहास भी काफी लंबा है।
पंद्रहवी शताब्दी में अरब निवासियों ने सबसे पहले कॉफी उगाई। इसके बाद धीरे-धीरे इसका विस्तार विश्व के सभी देशों में हुआ। 1843 में एक फ्रेंच ने विश्व की सबसे पहली व्यवसायिक एस्प्रेसो मशीन बनाई।
भारत में कॉफी लाने का श्रेय मुस्लिम संत बाबा बुदान को जाता है। आज दुनिया भर में हर दिन दो अरब कप से ज्यादा कॉफी पी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कॉफ़ी का इतिहास क्या है? कैसे दुनिया भर के लोगों का सबसे पसंदीदा पेय बन गई। इंटरनेशनल कॉफी डे पर जानते हैं इसकी कहानी-
चलिए जानते हैं कॉफी से जुड़ा इतिहास-

एक गड़रिया ने की थी कॉफी की खोज
यह माना जाता है कि कॉफी का पौधा सबसे पहले 600 ईस्वी में इथियोपिया के कफ़ा या काफा प्रांत में खोजा गया था। इथियोपिया के काल्दी नाम का एक बकरी चराने वाला गड़रिया रोज अपनी बकरियों को पहाड़ पर चराने लेकर जाता था। काल्दी ने एक दिन गौर किया कि पहाड़ से उतरते वक्त बकरियों के लाल रंग की बेरियों खाने के बाद उनमें गजब की फुर्ती आ गई।
काल्दी को लगा कि बेरियों में कोई नशीली चीज है। उसने कुछ बेरियां तोड़ लीं और पूरी घटना की जानकारी अपने गांव के मठ में रहने वाले बौद्ध भिक्षु को दी। उस बौद्ध भिक्षु ने इन्हें पानी में उबाल कर पिया। इसे पीने से उनके शरीर एनर्जी आ गई, जिसके बाद उन्होंने लंबे देर तक शाम की प्रार्थना की। काल्दी ने स्वयं भी कुछ बीज खाकर देखे और उसे भी चुस्ती का अनुभव हुआ। बौद्ध भिक्षु ने मठ में रहने वाले अन्य भिक्षुओं के साथ ये बात शेयर की। धीरे धीरे यह बात पूरे इथिओपिया मे फैल गई और देखते ही देखते इथिओपिया मे इसका व्यापार होने लग गया और फिर दूसरे देशों मे भी इसका व्यापार प्रचलन मे आ गया।
अरब में शुरु हुआ कॉफी का व्यापार
कॉफी का इतिहास काफी लंबा है। कहा जाता है कि यह इथोपिया के बाद अरेबिया जुड़ा। सबसे पहले कॉफी का सेवन 875 ई. पूर्व शुरू हुआ। अरबियन लोगों ने कॉफी को ट्रेंड में शामिल किया। यहां कॉफी केवल घरों में ही नही पी जाती थी बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर पीने का भी चलन था। अरब देशों के इतिहास में एक दौर ऐसा भी था, जब आदमी अगर अपनी पत्नी को कॉफ़ी लाकर ना दे तो वो उसके ख़िलाफ़ तलाक़ की अर्ज़ी दाखिल कर सकती थी।
अरबवासी कॉफी की फलियों का निर्यात करते थे, लेकिन बीज या पौधे किसी को नहीं देते थे। उन्हें डर था कि ऐसा करने से उनका कॉफी का व्यापार ठप्प हो जाएगा इसलिए सिर्फ भुनी हुई कॉफ़ी बीन्स का व्यापार किया जाता था! ताकि किसी और देश में इसका अंकुरण न किया जा सके। कॉफी के हरे बीजों को अरब से बाहर ले जाना गैर-कानूनी माना जाता था। फिर भी चोरी-छिपे कॉफी के पौधे कुछ अन्य देशों में पहुंचे।
यूरोप से 1570 ई. में रोम कॉफी का आयात हुआ।
चोरी छुपे भारत पहुंची थी कॉफी
अरब से कॉफी के बीजों को कहीं और ले जाना कानूनन जुर्म था। भारत में कॉफी कब आई, इसे लेकर कोई पुख्ता सबूत तो नहीं है। माना जाता है कि 1670 में भारत में कॉफी पहुंची थी। इसे भारत में लाने का श्रेय एक भारतीय मुस्लिम सूफी संत बाबा बुदान को जाता है। बुदान हज करने मक्का पहुंचे थे। कहा जाता है कि यमन के मोका शहर में जब चल रहे थे तो उन्होंने लोगों को रास्ते में कुछ पीते हुए और बहस करते हुए देखा।
वो बहस सुनने के लिए रुकें। उन्होंने उसी समय पहली बार कॉफी को चखा और उसके स्वाद के मुरीद हो गए। फिर उन्होंने इसे भारत ले जाने की ठानी, लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकते थे, क्योंकि ये कानून जुर्म था। तब बाबा बुदान को एक तरकीब सूझी। उन्होंने कॉफी के सात बीजों को अपनी दाढ़ी में छिपा लिया और भारत ले आए। बुदान कर्नाटक के चिक्कामगलुरु जिले के रहने वाले थे। कहा जाता है कि इन सात बीजों को बाबा बुदान ने चंद्रगिरी की पहाड़ियों में उगाया, और यहीं से भारत में काफी का पहला उत्पादन शुरू हुआ।
अंग्रेंजों ने कॉफी को आगे बढ़ाया
17वीं शताब्दी में मुगल काल के दौरान भारत के उच्च वर्ग के लोग कॉफी को स्टेटल सिम्बल के रूप में पीते थे। यूरोपीय यात्रियों के किस्सों में इस बात की जिक्र मिलता है कि मुगल काल में शाहजहानाबाद में कई सारे काहवा खाने थे, जहां कॉफी का सेवन किया जाता था। लेकिन फिर मुगलों का पतन शुरू हुआ और अंग्रेजों का दबदबा बढ़ा, इससे धीरे धीरे कॉफी की लोकप्रियता भी कम हो गई, क्योंकि अंग्रेज चाय पानी ज्यादा पसंद करते थे। 17वी शताब्दी की शुरुआत में ईस्ट इंडिया कंपनी और डच ईस्ट इंडिया कंपनी मोचा बंदरगाह से कॉफी की सबसे बड़ी खरीदार थीं। कॉफी से लदे उनके जहाज केप ऑफ गुड होप होते हुए स्वदेश पहुंचते थे या फिर इसे भारत को निर्यात किया जाता था। यमन की कॉफी की बाकी खपत मध्यपूर्व में होती थी।
लेकिन बाद में अंग्रेजों ने भारत में इसकी खेती दक्षिण भारत में शुरू की। 21 वी सदी आते-आते भारत के हर शहर नुक्कड़ में कॉफी कैफे की भरमार होने लगी। आज भारत दुनिया में कॉफी उत्पादकों की लिस्ट में छठे नंबर पर गिना जाता है।
कॉफी की कुछ रोचक जानकारी
1. कॉफी अमेरिका का राष्ट्रीय पेय हैं।
2.पुरे विश्व में सब से अधिक कॉफ़ी अमेरिका में पी जाती है और इसके अलावा दो अन्य सबसे बड़े पीने वाले फ्रांसीसी और जर्मन हैं।
3 ब्राज़ील दुनियां का सब से बड़ा कॉफ़ी उत्पादक देश है | वहां पर कुल 4 बिलियन से भी अधिक कॉफ़ी पेड़ मौजूद है
4. सबसे पहले कॉफी हाउस मक्का में खुले और उन्हें 'कावेह कानेस' कहा जाता था। इसके बाद विश्व के दूसरे देशों में कॉफी हाउस खुलने का प्रचलन शुरू हुआ। यूरोप, तुर्की, ईरान और मध्य पूर्व के अन्य भागों में कॉफ़ीख़ानों का बहुत रिवाज है। अरब देशों और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों के कॉफ़ीख़ानों में अक्सर हुक़्क़े भी मिलते हैं। भारत में भी कई बड़े शहर कॉफी हाउस मौजूद हैं।
5. इंटरनेशनल कॉफी डे मनाने का मकसद कॉफी को प्रमोट करना और इसे एक ड्रिंक के तौर पर सेलिब्रेट करना है। इसकी शुरुआत 1 अक्टूबर 2015 को हुई जब इटली के मिलान में इंटरनेशनल कॉफी ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत हुई।



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