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Labor Day 2025:139 साल पहले एक आंदोलन से शुरू हुई थी कै मजदूर दिवस की शुरुआत, इस दिन से जुड़े फैक्ट जानें
International Labor Day 2025 Facts : हर साल 1 मई को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस या मजदूर दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन करोड़ों मेहनतकश मजदूरों और कामगारों को समर्पित है, जिनकी मेहनत से समाज और अर्थव्यवस्था का ढांचा खड़ा होता है। मजदूर दिवस न केवल मजदूरों के इतिहास को याद करता है, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा, गरिमा और बेहतर भविष्य की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है।

कैसे हुई मजदूर दिवस की शुरुआत?
मजदूर दिवस की शुरुआत अमेरिका से हुई, ना कि रूस से जैसा कि अक्सर माना जाता है। औद्योगिक क्रांति के बाद फैक्ट्रियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी और काम के लिए मजदूरों की भारी मांग पैदा हुई। लेकिन उस समय मजदूरों से 12 से 18 घंटे तक लगातार काम कराया जाता था और उन्हें बेहद खराब हालात में रहना पड़ता था।
सबसे पहली बार 1806 में अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर में मोचियों ने 20 घंटे की लंबी शिफ्ट के खिलाफ हड़ताल की थी। इसके बाद 1827 में 'मैकेनिक्स यूनियन' नाम की पहली ट्रेड यूनियन की स्थापना हुई। फिर 1884 में '8 घंटे काम' का आंदोलन शुरू हुआ और मजदूरों ने पूरे अमेरिका में इस मांग के लिए जोरदार प्रदर्शन किए।
शिकागो का हेमार्केट आंदोलन: संघर्ष की मिसाल
1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो शहर में हजारों मजदूरों ने प्रदर्शन किया और 8 घंटे काम के नियम की मांग की। यह आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन 4 मई 1886 को हेमार्केट चौक पर पुलिस द्वारा की गई दमनात्मक कार्रवाई में कई मजदूर मारे गए। इसे हेमार्केट कांड कहा जाता है। इस घटना के बाद कई मजदूर नेताओं को फांसी दी गई और कुछ को जेल में डाल दिया गया।
इस संघर्ष ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया और मजदूरों के अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चेतना का जन्म हुआ।
1 मई को ही क्यों मनाया जाता है मजदूर दिवस?
हेमार्केट कांड के बाद 1889 में पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में यह तय किया गया कि हर साल 1 मई को उन मजदूरों की याद में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया जाएगा, जिन्होंने न्याय और समानता के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए।
इस निर्णय के बाद कई देशों ने 1 मई को अधिकारिक मजदूर दिवस के रूप में मान्यता दी और काम के घंटों को सीमित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत
भारत में पहली बार मजदूर दिवस 1923 में चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में मनाया गया था। इस पहल के पीछे थे भारतीय ट्रेड यूनियन नेता एस. के. पोट्टै, जिन्होंने 'लेबर किसान पार्टी' के बैनर तले यह आयोजन किया था। उन्होंने मद्रास लेबर यूनियन की स्थापना की और इस दिन को भारत में सरकारी मान्यता दिलवाने की दिशा में भी प्रयास किए।
स्वतंत्रता के बाद भारत में श्रमिकों के अधिकारों को संवैधानिक और कानूनी संरक्षण मिला। अब भारत में भी श्रमिकों के लिए 8 घंटे काम का नियम लागू है।
मजदूर दिवस का महत्व
मजदूर दिवस सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि श्रमिक वर्ग के सम्मान, उनके अधिकारों और संघर्षों की कहानी है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि किसी भी शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई जाए तो परिवर्तन संभव है। यह समानता, न्याय और मानव गरिमा की भावना को प्रोत्साहित करता है।
मजदूर दिवस से जुड़े रोचक तथ्य
- दुनियाभर के कई देशों में 1 मई को सरकारी अवकाश होता है।
- इस दिन को "मई दिवस" (May Day) के नाम से भी जाना जाता है।
- भारत में यह दिवस पहली बार 1923 में चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में 'लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान' द्वारा मनाया गया। इसे तमिल में 'उझोपलार नाल' और मराठी में 'कामगार दिवस' के रूप में भी जाना जाता है।
- वर्तमान में यह दिन 80 से अधिक देशों में अवकाश के रूप में मनाया जाता है। हालांकि, अमेरिका और कनाडा में श्रम दिवस सितंबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है।
- 1 मई को महाराष्ट्र और गुजरात दिवस भी मनाया जाता है। यह दिन समानता, न्याय और श्रमिकों की गरिमा को बढ़ावा देने का प्रतीक है।



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