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Jagannath Rath Yatra 2026: कब और कैसे पहुंचें पुरी? जानें दर्शन से लेकर ठहरने तक की पूरी जानकारी
Jagannath Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े और प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। हर साल ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली इस यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। मान्यता है कि रथ यात्रा के दर्शन और इसमें भाग लेने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक उत्सव का हिस्सा बनने पहुंचते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 में कब है?
16 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा शुरू होगी। इस दिन तीनों देवता श्रीमंदिर से निकलकर गुंडीचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे। इसके बाद 17 से 23 जुलाई तक वे गुंडीचा मंदिर में विराजमान रहकर भक्तों को दर्शन देंगे। वहीं 24 जुलाई 2026 को बहुदा यात्रा के साथ भगवान जगन्नाथ अपने मुख्य मंदिर लौटेंगे।
पुरी कैसे पहुंचें?
जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए आपको ओडिशा के पुरी शहर पहुंचना होगा। हवाई यात्रा करने वालों के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर का बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। वहां से टैक्सी या बस के जरिए करीब 60 किलोमीटर का सफर तय कर पुरी पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग से यात्रा करने वालों के लिए पुरी रेलवे स्टेशन एक सुविधाजनक विकल्प है। यह देश के कई प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है और यहां से रथ यात्रा स्थल भी काफी नजदीक है।
वहीं, सड़क मार्ग से आने वाले श्रद्धालु भुवनेश्वर, कोणार्क और आसपास के शहरों से बस या टैक्सी के जरिए आसानी से पुरी पहुंच सकते हैं।
कहां ठहरें?
पुरी में ठहरने के लिए होटल और धर्मशाला दोनों की अच्छी व्यवस्था है। मंदिर के आसपास कई होटल उपलब्ध हैं, जहां कमरों का किराया लगभग 1,000 रुपये से शुरू होता है। वहीं, बजट यात्रियों के लिए 500 रुपये के आसपास धर्मशाला भी मिल जाती है। जगन्नाथ मंदिर में दर्शन सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक किए जा सकते हैं। हालांकि, दोपहर में लगभग 11:30 बजे से 1 बजे तक भोग और विशेष पूजा के कारण दर्शन बंद रहते हैं। सामान्य दिनों में भीड़ के अनुसार दर्शन में 3 से 4 घंटे तक का समय लग सकता है। हर साल जून और जुलाई में होने वाली रथ यात्रा के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। रथ यात्रा से करीब 15 दिन पहले मंदिर के कपाट दर्शन के लिए बंद कर दिए जाते हैं। रथ यात्रा के समय श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राज्य सरकार विशेष इंतजाम करती है। पुरी रेलवे स्टेशन के बाहर भी नि:शुल्क शिविर लगाए जाते हैं, जहां तीर्थयात्री ठहर सकते हैं।
रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ के अपनी मौसी के घर यानी गुंडीचा मंदिर जाने का प्रतीक है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि रथ यात्रा के दर्शन और भगवान के रथ के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि महाप्रभु स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने मंदिर से बाहर आते हैं, इसलिए यह यात्रा आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम मानी जाती है।
रथ यात्रा में जाने से पहले ध्यान रखें ये बातें
पहले से करें बुकिंग
रथ यात्रा के दौरान पुरी में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे ट्रेन, फ्लाइट और होटल जल्दी भर जाते हैं। ऐसे में यात्रा और ठहरने की व्यवस्था पहले से कर लेना बेहतर रहता है। ठहरने के लिए आप पुरी बीच, स्वर्गद्वार क्षेत्र या जगन्नाथ मंदिर के आसपास स्थित होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं का विकल्प चुन सकते हैं। ओडिशा टूरिज्म की पंथनिवास जैसी सुविधाएं भी यात्रियों के बीच लोकप्रिय हैं। भीड़ को देखते हुए होटल या धर्मशाला की बुकिंग पहले से कर लेना समझदारी होगी।
मौसम का रखें ध्यान
जून के आखिर में पुरी में गर्मी के साथ बारिश की भी संभावना रहती है। इसलिए हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें तथा छाता या रेनकोट साथ रखना न भूलें।



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