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रिलीज होते ही छा गई कांतारा चैप्टर 1, क्या आप जानते हैं पंजुरली देव और गुलिगा देवता की दिव्य कहानी
Panjurli Dev Vs Guliga Dev story: रिषभ शेट्टी की बहुप्रतीक्षित फिल्म कांतारा चैप्टर 1 का दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। आखिरकार 2 अक्टूबर को फिल्म ने बड़े पर्दे पर धमाकेदार एंट्री मार ल और रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर छा गई है। फिल्म ने ओपनिंग डे पर ही 60 करोड़ की कमाई की है जो इस साल की अब तक की सबसे ज्यादा ओपनिंग कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। दर्शकों को न सिर्फ इसकी दमदार कहानी और विज़ुअल्स पसंद आ रहे हैं, बल्कि इसमें दिखाई गई आस्था और लोक कथाओं की गहराई भी लोगों के दिलों को छू रही है। फिल्म की जड़ें कर्नाटक की लोक संस्कृति से जुड़ी हैं, खासकर वहां की भूत कोला परंपरा से, जिसमें पंजुरली देव और गुलिगा देवता की पूजा की जाती है।
आपने फिल्म देखी हो या देखने का मन बना रहे हों तो उस दौरान इस सवाल का उठना संभव है कि आखिर कौन हैं पंजुरली देव और गुलिगा देवता जिनकी दिव्य कहानी ने फिल्म में प्राण डाल दिए हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पंजुरली देव को धरती और खेती-बाड़ी की रक्षा करने वाला देवता माना जाता है, जो सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं।
वहीं, गुलिगा देवता न्यायप्रिय और कठोर देवता हैं, जो सत्य और धर्म की रक्षा के लिए जाने जाते हैं। कांतारा चैप्टर 1 इन्हीं दो दिव्य शक्तियों की पौराणिक गाथा को पर्दे पर जीवंत करता है, जिसने दर्शकों को एक रहस्यमयी आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ दिया है। आइए फिर उत्सुकता को खत्म करते हुए जानते हैं कि आखिर कौन हैं पंजुरली देव और गुलिगा देवता?

पंजुरली देव की दिव्य कथा
कर्नाटक की तटीय संस्कृति में पंजुरली देव को धरती और प्रकृति का रक्षक माना जाता है। लोककथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने धरती की रक्षा और लोगों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए 'वराह' अवतार लिया। वराह अवतार के बाद उनसे ही 'पंजुरली देव' की उत्पत्ति हुई। पंजुरली देव को जंगली सूअर का प्रतीक माना जाता है, जो खेतों को जंगली जानवरों से बचाते हैं। ग्रामीण परंपरा में यह विश्वास है कि यदि गांव में उनकी पूजा न की जाए तो प्राकृतिक आपदाएं, बीमारियां और अकाल पड़ सकता है। लेकिन श्रद्धा से पूजा करने पर गांव में शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। पंजुरली देव करुणा और संरक्षण के प्रतीक हैं।
गुलिगा देवता की दिव्य कथा
गुलिगा देवता को न्यायप्रिय और कठोर देवता कहा जाता है। लोकमान्यता है कि वे शिव के गण हैं और उन्हें धर्म व सत्य की रक्षा के लिए पृथ्वी पर भेजा गया। ऐसा माना जाता है कि महादेव द्वारा पानी में फेंके गए कंकड़ से गुलिगा देवता का जन्म हुआ था जिनका स्वभाव गुस्सैल और अनुशासन प्रिय माना जाता है। कहानी है कि जब भी कोई व्यक्ति अधर्म करता है, अन्याय करता है या झूठ बोलता है, तो गुलिगा देवता उसे दंडित करते हैं। इस कारण लोग गुलिगा देव की पूजा बेहद श्रद्धा और भय दोनों के साथ करते हैं। माना जाता है कि उनकी कृपा से गांव में न्याय स्थापित होता है और बुराइयों का नाश होता है।
दिव्य संगम
कांतारा चैप्टर 1 में इन दोनों देवताओं की कथा को खूबसूरती से पिरोया गया है। पंजुरली देव जहां पालन और करुणा के प्रतीक हैं, वहीं गुलिगा देवता न्याय और धर्म के रक्षक माने जाते हैं। दोनों मिलकर समाज में संतुलन बनाए रखते हैं। यही कारण है कि फिल्म दर्शकों को केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी देती है।



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