Latest Updates
-
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क -
बिना मारे चूहों को घर से भगाने का देसी तरीका! आटे में मिलाकर रख दें ये एक चीज, फिर कभी नहीं आएंगे नजर -
Pahadi Crispy Snack Singal Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और कुरकुरा स्वाद -
कौन हैं पंकज त्रिपाठी के भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी? आखिर क्यों हुआ जानलेवा हमला, गंभीर हालत में AIIMS में भर्ती -
Swapna Shastra: सपने में किन्नर को देखना होता है शुभ और अशुभ संकेत? जानिए इसका मतलब -
Cooling Summer Lunch Curd Rice Recipe: गर्मियों में पेट को ठंडक देने वाली सबसे आसान रेसिपी -
काले धब्बों वाले प्याज खाना चाहिए या नहीं? सेहत पर क्या होगा असर, यहां जानें इसका सही जवाब -
Ambubachi Mela 2026: कामाख्या मंदिर में शुरू हुआ अंबुबाची मेला, 3 दिनों तक बंद रहेंगे कपाट, जानें इसका महत्व -
Soft Dahi Paratha Recipe: घर पर बनाएं एकदम नरम और स्वादिष्ट दही का पराठा -
Aaj Ka Rashifal 22 June 2026: सोमवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी महादेव की कृपा, धन लाभ के प्रबल योग
Kargil Diwas Special: प्रेग्नेंसी में उठाई बंदूक, दुश्मनों को दी मात, मिलिए कारगिल की हीरो यशिका त्यागी से
Kargil Vijay Diwas 2025 : 1999 का कारगिल युद्ध भारतीय इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। जब जब कारगिल दिवस आता है, तो लोग इस जंग से जुडी हर बात याद करने लगते हैं। इस जंग में जीतने में कई शूरवीरों ने अपनी जान की बाजी लगा दी थी।
जहां एक ओर देश के वीर जवान दुश्मन से लोहा ले रहे थे, वहीं एक महिला अफसर ऐसी भी थीं, जो दो मोर्चों पर एक साथ लड़ रही थीं, एक अपने देश के लिए और दूसरा अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए। हम बात कर रहे हैं कैप्टन यशिका हाटवाल त्यागी की, जो गर्भवती होते हुए भी देश सेवा से पीछे नहीं हटीं। आइए कारगिल दिवस पर पढते हैं इनकी जाबांजी की कहानी-

पेट में बच्चा, गोद में बेटा और हाथ में बंदूक
कैप्टन यशिका उस समय गर्भावस्था के दूसरे तिमाही में थीं। वह लेह, लद्दाख में तैनात थीं, जहां ऑक्सीजन की कमी और मुश्किल मौसम में ड्यूटी करना आसान नहीं होता। बावजूद इसके, उन्होंने न सिर्फ अपने गर्भस्थ शिशु की देखभाल की, बल्कि दो साल के बेटे को भी साथ लेकर मोर्चे पर डटी रहीं।
उनका कहना है, "हाथ में कार्बाइन थी, पेट में बच्चा था, और गोद में बेटा था।" उन्होंने सेना के अधिकारियों से अनुरोध किया कि उन्हें अपने बेटे को भी साथ रखने की अनुमति दी जाए, जिसे मान लिया गया। यह बात आज भी लोगों को आश्चर्यचकित करती है, लेकिन यशिका इसे भारतीय सेना की भावना का हिस्सा मानती हैं।
सेना का जज़्बा: ताबूत पहले नहीं बनाएंगे
युद्ध के दौरान सेना को आदेश मिला कि 50 ताबूत पहले से तैयार रखे जाएं, क्योंकि शहीदों की संख्या बढ़ने की आशंका थी। लेकिन सैनिकों ने जवाब दिया, "हम अपने साथियों के लिए पहले से ताबूत नहीं बना सकते। जब जरूरत होगी, आधे घंटे में बना देंगे।" यह वही जज़्बा है, जिसकी मिसाल खुद यशिका ने भी दी।
पिता की शहादत बनी प्रेरणा
कैप्टन यशिका का सेना से जुड़ाव बहुत गहरा है। वह देहरादून में जन्मी थीं और उनके पिता कर्नल हाटवाल ने 1962, 1965 और 1971 की लड़ाइयों में भाग लिया था। जब यशिका मात्र सात वर्ष की थीं, तब उनके पिता ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए।
उन्होंने बताया कि जब उनके पिता की पार्थिव देह फूलों से सजी सेना की गाड़ी में घर पहुंची, तो मोहल्लेवालों ने उन्हें इतना सम्मान दिया कि उस दिन उनके मन में ठान लिया कि वो भी एक दिन वर्दी पहनेंगी।
मां और बहनों की प्रेरणा
उनकी मां ने अकेले तीन बेटियों की परवरिश की। बड़ी बहन भारतीय नौसेना में गईं, छोटी बहन एयरफोर्स में और यशिका खुद भारतीय सेना में शामिल हुईं। 1994 में उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई से पासआउट होकर सेना में कमीशन पाया।
अब क्या कर रही हैं यशिका
सेना से रिटायर होने के बाद कैप्टन यशिका त्यागी आज एक मोटिवेशनल स्पीकर हैं। वह महिलाओं को न सिर्फ आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती हैं, बल्कि यह भी बताती हैं कि मां बनना किसी करियर या कर्तव्य में रुकावट नहीं है।



Click it and Unblock the Notifications