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Karnataka Election 2023: जानें कौन है अकेली महिला ट्रांसजेंडर उम्मीदवार रामक्का, जिनके हौसलों ने जीता सबका दिल
लंबे समय से हमारा समाज पुरुष और महिला जेंडर के इतर किसी अन्य जेंडर के लोगों को सामजिक मान्यता देने को राजी नहीं था। लेकिन थर्ड जेंडर हमारे समाज का हमेशा से ही अहम हिस्सा रहे हैं जिनका जिक्र प्राचीन हिंदू ग्रंथों में भी मिलता है।
मगर फिर भी इन लोगों को सदा हेय और उपेक्षा की दृष्टि से ही देखा जाता रहा जिससे उनका जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा है। आर्थिक क्षेत्र हो, राजनीति हो, या फिर कोई सामाजिक-सांस्कृतिक कार्य, इन्हें हमेशा मुख्यधारा से अलग कर दिया जाता है। लेकिन इस रीत को इस बार कर्नाटक चुनाव में बल्लारी की टी रामक्का बदलने जा रही हैं।

टी रामक्का इस साल के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अकेली ट्रांसजेंडर महिला उम्मीदवार हैं। 56 वर्षीय ट्रांसजेंडर महिला रामक्का ने देश प्रेम पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कामप्ली विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया है।
2500 उम्मीदवारों में 2429 पुरुष उम्मीदवार हैं और 185 महिला उम्मेदवार। रामक्का एकलौती ट्रांसजेंडर उम्मेदवार हैं। 56 वर्षीय रामक्का का कहना है कि उन्होंने ट्रांसजेंडरों और शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम लोगों के जीवन में बदलाव लाने की उम्मीद में अपना नामांकन दाखिल किया है।
वे बताती हैं कि पूरा जीवन उन्होंने अन्य ट्रांसजेंडरों की तरह ही भीख मांगकर गुज़ारा है। किसी भी सरकार ने उनके समुदाय के लिए कुछ नहीं किया क्योंकि राज्य में उनकी संख्या बेहद कम थी। वे कहती हैं कि अपने और अपने जैसे लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए राजनीति ही सही मंच होगा।
शुरुआती जीवन
बल्लारी जिले के एक गांव में एक गरीब परिवार में जन्मी, रामक्का 14 साल की उम्र में एक लड़की में बदल गई और कोप्पल जिले के मुनीराबाद शहर के मंदिर में एक स्थानीय देवता हुलीगेम्मा की सेवा करने लगी। उन्होंने तब ही अपना नाम और पहचान रामास्वामी से बदलकर रामक्का रख लिया। वे बताती हैं कि उन्होंने अपना सारा जीवन भीख मांगने और जोगती नृत्य करने में बिताया। जोगती नृत्य एक लोक नृत्य है। उनका जीवन संघर्ष पूर्ण रहा है।
राजनीति में एंट्री
रामक्का ने अपने और अन्य ट्रांसजेंडरों के जीवन में आ रही समस्याओं से प्रेरित होकर राजनीति में आई हैं। उन्हें नव निर्मित देशप्रेम पार्टी से टिकट मिला है। वे बीजेपी के टीएच सुरेश बाबू और कांग्रेस के जीएन गणेश के सामने चुनाव में उतरी हैं। वे बताती हैं कि अपने चुनावी क्षेत्र में उनको लोगों का खूब प्यार मिल रहा हैं और क्षेत्र के ट्रांसजेंडर समुदाय उनके चुनावी प्रचार का हिस्सा रहे।

क्या रहें उनके चुनावी मुद्दे?
रामक्का को ट्रांसजेंडर लोगों की स्थिति में सुधार की उम्मीद है, जो अकसर सामाजिक भेदभाव का शिकार होते हैं। उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय को शिक्षित करने की इच्छा व्यक्त की है। उनका मुख्य चुनावी मुद्दा है- राज्य में ट्रांसजेंडर समुदाय का कल्याण। उन्होंने बताया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए कोई विशेष योजना नहीं है इसलिए उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि वे न केवल ट्रांसजेंडर समुदाय बल्कि अपने क्षेत्र के गरीब और किसान समुदाय के लिए कल्याणकारी कार्य करेंगी। इन समुदायों के लिए ठोस सामाजिक नीतियां और सामाजिक सुरक्षा के लिए साधन उपलब्ध कराना उनका लक्ष्य है।
चुनावी नतीजे
इस साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव में टी रामक्का को हार का सामना करना पड़ा है। उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस के जीएन गणेश ने कोप्पल जिले की सीट से जीत हासिल की। राजनीति की इस चुनावी लड़ाई को भले ही टी रामक्का हार गयी हों लेकिन उनके हौसलों और चुनावी मुद्दों ने यकीनन ही सबका दिल जीता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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