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Karnataka Elections: 66 सालों में सिर्फ 7 महिला विधायक, ‘आधी आबादी’ को बदलाव का इंतजार!
आज के दौर में देश की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं, चाहे वो खेल का मैदान हो या फिर कंपनी चलाना हो, महिलाएं बहुत सारे मामलों में पुरूषों से बराबर है या फिर आगे भी चल रही हैं, लेकिन एक क्षेत्र हैं जहां पर आज भी महिलाओं की भागीदारी पुरूषों से काफी कम है, यहां तक की 15 फीसदी महिलाएं भी इस क्षेत्र में नहीं हैं और वो है राजनीति का क्षेत्र। आज भी महिलाएं पॉलिटिक्स में अपने बराबरी के स्थान पाने के लिए कड़ी मशक्त कर रही हैं। अगर हम देश की संसद में महिला सांसदों के प्रतिशत को देखते हैं तो लोकसभा में सिर्फ 14.36% और राज्यसभा में 10% से अधिक महिला सदस्य हैं। वहीं अगर हम बात करें देश के एक बड़े और डेवलप स्टेट कर्नाटक की तो यहां की राजनीति में भी महिला विधायकों की स्थिति ना के बराबर है। भले ही बैंगलोर में बहुत सारी कंपनियों में महिलाएं CEO के पद पर आसीन हैं लेकिन सत्ता में तो पुरुष ही विराजमान हैं।

1963 में 18 महिला विधायक चुनी गई थीं
अगर पिछले 66 सालों की बात करें तो साल 1963 में, यहां से सबसे अधिक 18 महिला विधायक चुनीं गई थीं। 1963 के बाद से कर्नाटक विधानसभा पर नजर डाले तो जीतने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या में लगातार कम होती गई है। 1989 में 10 महिला विधायक निर्वाचित हुई थीं, वो भी एकल अंकों में थीं। वर्तमान की बात करें तो 8 महिला विधायक और एक मनोनीत महिला विधायक कर्नाटक विधानसभा में है।
2018 के उप विधानसभा चुनाव में जयानगर से चुनी गईं सौम्या रेड्डी
कर्नाटक में पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान,15 मई 2018 को जब 222 विधानसभा क्षेत्रों के रिजल्ट घोषित हुए तब सिर्फ सात महिलाओं ने जीत दर्ज की थी। इनमें से चार महिला विधायक कांग्रेस से और तीन बीजेपी से विजय हुई। बेंगलुरु की जयनगर सीट से दोबारा मतदान 11 जून को सपन्न हुआ, जिसमें पूर्व गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी की पुत्री सौम्या रेड्डी ने विजय पाई।
कर्नाटक विधानसभा 2018 के महिला विधायकों की लिस्ट-
लक्ष्मी आर हेब्बलकर- बेलगाम ग्रामीण
फातिमा- गुलबर्गा उत्तर
अंजलि हेमंत निंबालकर- खानपुर
शशिकला अन्नासाहेब जोले- निप्पनी
रूपाली संतोष नाइक- कारवार
के पूर्णिमा- हिरियूर
सौम्या रेड्डी- जयानगर, बैंगलोर
एम रूपकला

2023 कर्नाटक विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या घटी
222 निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 2,626 उम्मीदवारों में से केवल 209 महिलाएं थीं, जो 8 प्रतिशत से थोड़ा कम है। उनमें से केवल सात चुनाव जीतीं और एक उपचुनाव के माध्यम से एमएलए बन सकी। मात्र तीन प्रतिशत। वहीं 2018 के चुनावों को देखते हुए इस साल महिला उम्मीदवारों की संख्या 219 से घटकर 185 हो गई है।
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 5.05 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 2.50 करोड़ महिलाएं हैं। फिर भी, विधानसभा में महिला उम्मीदवारों की संख्या ना के बराबर है।
10 मई 2023 को कर्नाटक में मतदान होना है। इस बार के इलेक्शन की बात करें तो बीजेपी और कांग्रेस ने 9 और जेडीएस ने 13 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है।

महिला आरक्षण विधेयक पिछले 26 सालों से अटका
बताते चलें कि संसद में और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रस्ताव वाला 26 साल पहले पेश हुआ महिला आरक्षण विधेयक आजतक अटका हुआ है। राजनीतिक पार्टियों को केवल महिलाओं के वोटों से मतलब है। वो उनको एक नेता के रूप में देखना पसंद नहीं करते हैं। सभी दलों में पितृसत्तात्मक व्यवस्था के कारण महिलाएं सत्ता में आने के लिए कतराती हैं।



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