Latest Updates
-
Quick Filling Dinner Anda Paratha Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसा स्वादिष्ट अंडा पराठा -
मानसून से पहले दिल्ली में डेंगू के 162 और मलेरिया के 42 मामले, कहीं आप भी न हो जाएं शिकार; जानें बचाव के उपाय -
Dhaba Style Marinade Chicken Tikka Recipe: घर पर पाएं रेस्टोरेंट जैसा स्मोकी स्वाद -
प्रेग्नेंट हैं 39 साल की सामंथा रुथ प्रभु! करीबी शख्स ने किया कन्फर्म, जानें कब होगी डिलीवरी -
मलाइका अरोड़ा की फिटनेस का खुल गया राज, 52 की उम्र में यंग दिखने के लिए करती हैं ये 5 योगासन -
South Indian Style Tomato Rice Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा चटपटा स्वाद -
Summer Solstice: 21 जून को क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन? जानें क्या है इसके पीछे की असली वजह -
International Yoga Day 2026 Wishes: योग करे जो रोज...योग दिवस पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामनाएं -
Father's Day 2026 Shayari: उंगली पकड़कर चलना सिखाया...फादर्स डे पर पापा को भेजें ये दिल छू लेने वाली शायरियां -
Zero Oil Sprouts Cheela Recipe: वजन घटाने के लिए बनाएं हेल्दी और टेस्टी नाश्ता
Naga sadhu Vs Aghori : नागा साधु की तरह अघोरी भी रहते हैं निर्वस्त्र? जानें दोनों में क्या होता है अंतर?
Naga sadhu Vs Aghori : प्रयागराज के संगम में कुंभ मेले के अवसर पर नागा साधुओं का विशेष महत्व होता है। नागा साधु कुंभ मेले का अभिन्न हिस्सा होते हैं, जहां वे शाही स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। वहीं अक्सर होता है कि कई लोग इन नागा साधुओं को अघोरी बाबा समझ लेते हैं। हालांकि नागा साधु और अघोरी बाबा दोनों में कुछ समानताएं होती हैं, जैसे दोनों भगवान ही शिव के भक्त होते हैं, लेकिन उनके जीवन और साधना में काफी अंतर होता है।
नागा साधु कुंभ मेले में भाग लेते हैं, जबकि अघोरी बाबा का कुंभ में जाना आवश्यक नहीं होता है। नागा साधु निर्वस्त्र रहते हैं और सामाजिक अनुष्ठानों में सक्रिय होते हैं, जबकि अघोरी श्मशान में रहते हैं और मृत्यु से संबंधित साधना करते हैं, जिससे उनके जीवन की राह अलग होती है।

ऐसे में आइए जानते हैं कि नागा साधु और अघोरी बाबा में क्या अंतर है?
आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी स्थापना
नागा साधुओं की स्थापना का श्रेय आदि गुरु शंकराचार्य को दिया जाता है, 5वीं शताब्दी ईसापूर्व में सामाजिक और धार्मिक अशांति के समय इनका गठन किया गया था। नागा साधु बनने के लिए अखाड़े में एक गुरु बनाना अनिवार्य होता है। यह गुरु अखाड़े का मुखिया या कोई प्रतिष्ठित विद्वान साधु होता है। इन साधुओं का उद्देश्य धर्म की रक्षा करना और शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करना था। नागा साधु न केवल तपस्वी होते हैं, बल्कि वे शस्त्र धारण कर युद्ध में भी भाग लेते थे। साधुओं को अलग-अलग अखाड़ों में विभाजित किया गया, जहां उन्हें धार्मिक शिक्षा और युद्ध कौशल दोनों सिखाए गए।
इतिहास में नागा साधुओं की वीरता के कई उदाहरण मिलते हैं। जैसे, अहमद शाह अब्दाली के गोकुल पर आक्रमण के समय नागा साधुओं ने उसकी सेना का डटकर मुकाबला किया और गोकुल की रक्षा की।
नागा साधु बनना नहीं हैं आसान
नागा साधु बनने की प्रक्रिया कठिन और लंबी होती है, नागा संप्रदाय में दीक्षा लेने से पहले उन्हें अपना पिंडदान करना होता है, जो संसार के प्रति उनकी मृत्यु और सन्यास को दूसरा जीवन मानने का प्रतीक है। दीक्षा के बाद उन्हें 12 वर्षों तक अखंड ब्रह्मचर्य, ध्यान, योग, साधना, और धार्मिक कर्मकांड की शिक्षा लेनी होती है। ये जीवनभर ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। कुंभ मेले के शाही स्नान में सबसे पहले गंगा स्नान का अधिकार नागा साधुओं को मिलता है।
अघोरी होते है शैव साधु
अघोरी अघोरपंथ के साधक और भगवान शिव के उपासक होते हैं। ये भगवान शिव की तरह ही श्मशान की नीरवता में वास करते हैं, जो मृत्यु के भय पर विजय का प्रतीक है। अघोर दर्शन के अनुसार, मृत्यु इस संसार का सबसे बड़ा डर है, और श्मशान वह स्थान है जहां अघोरी मृत्यु और जीवन के सत्य को समझते हैं। "अघोरी" का मतलब होता है कि जिनके लिए कुछ भी भयानक नहीं है, और वे समाज के पारंपरिक भय और सीमाओं से मुक्त रहते हैं।
पहनावे में होता है अंतर
नागा साधुओं की पहचान उनके दिगंबर स्वरूप से होती है, जिसका अर्थ है दिशाओं को ही वस्त्र मानना। ये साधु वस्त्र नहीं पहनते और शरीर पर धूनी की राख लपेटते हैं। त्रिशूल, तलवार, और शंख उनकी प्रमुख पहचान हैं। वहीं अघोरी भगवान शिव के भक्त होते हुए जानवरों की खाल से अपने तन का निचला हिस्सा ढकते हैं। यह उनकी तपस्या और शिव के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
दोनों ही रहते हैं समाज से दूर
अघोरी साधु हमेशा श्मशान में ही रहते हैं और बहुत कम ही कहीं नजर आते हैं। इसके विपरीत, नागा साधु कुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं और फिर हिमालय की ओर लौट जाते हैं। मान्यता है कि नागा साधु के दर्शन के बाद अघोरी के दर्शन करना भगवान शिव के दर्शन के समान होता है।
नागा और अघोरी खाते है ऐसा खाना
नागा और अघोरी दोनों ही नॉन-वेजिटेरियन होते हैं, हालांकि कुछ नागा संन्यासी शाकाहार भी अपनाते हैं। नागा साधु भिक्षा मांगकर अपना पेट भरते हैं, और वे अधिकतम 7 घरों से ही भिक्षा मांग सकते हैं, जिसमें जो भी मिलता है, उसी में संतुष्ट रहते हैं। दूसरी ओर, अघोरी संप्रदाय में कोई रोक नहीं होती; वे इंसानी मांस भी खा सकते हैं। कई डॉक्युमेंट्री और इंटरव्यू में अघोरियों ने स्वीकार किया कि वे श्मशान से अधजला मांस लेकर खाते हैं, जो उनकी साधना का हिस्सा है।



Click it and Unblock the Notifications