Latest Updates
-
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा
विलुप्त होती ये जनजाति करती है आत्माओं की पूजा क्योंकि...
कुछ आदिवासी खाना बदोश है, तो कुछ आज भी मछली पकड़ने की पुरानी तनकनीक अपना कर गुजर बसर कर रही है।
कुछ आदिवासी खाना बदोश है, तो कुछ आज भी मछली पकड़ने की पूरानी तनकनीक अपना कर गुजर बसर कर रहें है।
वहीं कुछ ऐसी अजीबों गरीब जनजातियां है, जिन्हें आज भी आत्माओं में विश्वास है और उनकी पूजा भी की जाती है। दुनिया के हर कौने में रहने वाली यह आदिवासी जनजातियां आज के इस आधुनिक वातावरण में विलप्ती के कगार पर है
और अपने अस्तिव के लिए लड़ रही है। आइए जानते है दुनिया भर की कुछ विचित्र जनजातियों के कल्चर को और करीब से...

1. असारो ट्राइब
न्यु गुएना के पापुआ इलाके की यह जनजाति, लगभग विलुप्ति के कगार पर है। लेकिन इस जनजाति के लोग आज भी सुबह सुबह चहरें पर मड मास्क लगाकर दूसरे गांव से आए लोगों को डराते है।

2. चाइनिज फिशिंग ट्राइब
चाइना के सुदूर इलाके की यह ट्राइब अभी तक मछली पकड़ने के लिए कोरमोरोन्ट तकनीक काम में लेती है। इस तकनीक में कोरमोरोन्ट (जगकाग) पक्षी के गले में धागा बांध दिया जाता है और फिर उसे मछली पकड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। धागा इसलिए बांधा जाता है, ताकि वह किसी बड़ी मछली को निगल ना सके। एक बार मछली पकड़ने के बाद उसके मुंह से मछली निकाल ली जाती है और उसे फिर से मछली पकड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है।

3. मसाई ट्राइब
तंजानिया की यह जनजाति, दुनिया की सबसे पूरानी, वॉरियर कल्चर का हिस्सा है। इस जनजाति में समुह का सबसे जवान मर्द को वॉरियर बनने और जिम्मेदारी निभाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है।

4. नीनेट्स ट्राइब
पेनेसुवेला की यमाल इलाके में रहने वाली नीनेट्स ट्राइब पूरी तरह खानाबदोश जनजाति है। हाजारों सालों से यह जनजाति, सर्दियों में -50 डिग्री सेलसियस तापमान और गर्मियों में +35 डिग्री सेलसियस तापमान में रहने की आदि है।

5. माओरी ट्राइब
न्यूजिलैंड की यह जनजाति बहुत से देवी और देवताओं के साथ आत्माओं की भी पूजा करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनका मानना है कि उनके पूर्वोजों की आत्मा उनके आस पास ही रहती है और जरुरत पड़ने पर उनकी मदद करती है।

6. गोरखा ट्राइब
न्यू गुएना के पापुआ इलाके की यह जनजाति प्रकृति से बहुत लगाव रखती हैं। इस जनजाति के लोग अधिकतर शिकारी और किसान है और इसी से इनकी रोजगारी चलती है। यहां तक कि अपने दुश्मानों को इम्प्रेस करने के लिए यह जनजाति बहुत सारा मेकअप और गहने पहनती है।

7. हुली ट्राइब
अपने अस्त्वि के लिए लड़ती इस जनजाति में जमीन, औरतों और सुअरों के लिए समुह बनाकर लड़ाई की जाती है। इस जनजाति के लोग अपने समुह से बहुत प्यार करते है। यहां के लोग अपने बालों से विग बनाते है, जो दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

8. कजाक ट्राइब
तुर्की, मंगोल और इंडो ईरानी के मिले जुली यह ट्राइब आज भी अनोखे तरीके से ईगल के शिकार के लिए जानी जाती है।

9. लद्दाखी ट्राइब
भारत में रहने वाली यह ट्राइब, तिबतियन लोगों से मिलती जुलती है। इसलिए यह लोग बुद्ध भगवान के अनुयायी हैं।

10. मुर्सी ट्राइब
इथोपिया की इस जनजाति के लोगों के शरीर पर घोड़े की नाल के शेप की घावों के निशान होते है। यहां के मर्दो के दाए हाथ पर यह घाव होता है तो वहीं, औरतों के बाएं हाथ में और जब यह वॉरियर बनने कि कला में निपुण हो जाते है तो इनकी थाईज पर यह निशान बनाया जाता है

11. रबारी ट्राइब
पिछले हजारों सालों से भारत के रेगिस्तान में रहने वाली इस जनजाति की महिलाएं कपड़े पर की जाने वाली कढ़ाई में निपुर्ण होती है।

12. संभारु ट्राइब
तनजानियां इलाके में रहने वाली यह जनजाति खानाबदोश है। इसलिए हर पांचवें और छठे हफ्ते में अपना इलका बदलती है। ऐसा इसिलए ताकि उनके गाएं भूखी न रहें और उन्हें खाना मिलता रहें।

13. मस्तंग ट्राइब
नेपाल की यह जनजाति भगवान में विश्वास रखती है। अपने अस्तिव के लिए लड़ती यह ट्राइब मानती है कि यह दुनिया गोल नहीं बल्कि फ्लैट है।



Click it and Unblock the Notifications
