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'एलजीबीटी' के इंद्रधनुषी झंडे का क्या है मतलब?, जानिए इसके पीछे का इतिहास
बीते गुरुवार को आए ऐतिहासिक फैसले के बाद अब भारत में समान लिंगों वाले लोगों के बीच शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं बल्कि निजी पसंद हैं। इस फैसले के आने के बाद देश भर में अलग-अलग जगहों पर समलैंगिक समुदाय के लोगों ने जश्न मनाया। कई जगहों पर जश्न के दौरान इंद्रधनुषी रंगों का झंडा भी देखा गया। भारत में सेक्शन 377 रद्द, जानिए क्या है दुनियाभर में समलैंगिकता को लेकर कानून
अक्सर समलैंगिक आंदोलनों के दौरान यह झंडा लोगों के हाथ में दिखता रहा है। अक्सर कई लोग इन रंग बिरंगे झंडों का मतलब भी जानना चाहते हैं। दरअसल यह झंडे काफी समय से समलैंगिक समुदाय का प्रतीक रहे हैं। इस झंडे में 6 रंग होते हैं या इंद्रधनुष जैसा दिखने वाला यह झंडा समलैगिंकों के समुदाय के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। आइए जानते है इससे जुड़ा इतिहास। LGBT के बारे में इंटरेस्टिंग फैक्ट्स, जो आपको भी नहीं होंगे मालूम

1978 में आया था अस्तित्व में
इस रेनबो फ़्लैग को 1978 से ही एलजीबीटी समुदाय के प्रतीक के रूप में फहराया जाता रहा है। सैन-फ्रांसिस्को के कलाकार गिलबर्ट बेकर ने आठ रंगों वाले इस झंडे का डिज़ाइन बनाया था। इसके बाद 25 जून को 'गे फ़्रीडम डे' के दिन पहली बार इसे फ़हराया गया था।
1990 आते-आते ये झंडा दुनियाभर में एलजीबीटी समुदाय का प्रतीक बन गया।

पहले थे आठ रंग, अब छह
सबसे पहले रेनबो फ़्लैग में आठ रंग जोड़े गए थे और इनमें शामिल हर रंग का ज़िंदगी से जुड़ा कोई मतलब था जैसे -
गुलाबी - सेक्शुएलिटी
लाल - ज़िंदगी
नारंगी - इलाज
पीला - सूरज की रोशनी
हरा - प्रकृति
फ़िरोज़ी - कला
नीला - सौहार्द
बैंगनी - आत्मा
बाद में इन रंगों को घटाकर छह कर दिया गया। फ़िरोज़ी रंग की जगह नीले रंग ने ले ली, जबकि बैंगनी रंग को हटा दिया गया।

LGBT का मतबल
कई बार लोगों में एलजीबीटी के फुलफॉर्म को लेकर कई सवाल रहते हैं। कई लोग न तो इसका मतलब जानते हैं न ही उन्हें इस समुदाय से जुड़े लोगों में फर्क करना आता है। आइए जानते है इस बारे में।

L का मतबल
L - लेस्बियन। यानी एक महिला या लड़की का समान लिंग के प्रति आकर्षण।

G का मतबल
G - ‘गे'। जब एक पुरुष को एक और पुरुष से ही प्यार हो तो उन्हें ‘गे' कहते हैं। ‘गे' शब्द का इस्तेमाल कई बार पूरे समलैंगिक समुदाय के लिए किया जाता है, जिसमें ‘लेस्बियन', ‘गे', ‘बाइसेक्सुअल' सभी आ जाते हैं।

B का मतबल
B - ‘बाईसेक्सुअल', जब किसी मर्द या औरत की सेक्सुअल प्रिफरेंस मर्द और औरत दोनों ही हो।

T का मतबल
T- मतलब। ‘ट्रांसजेंडर'। ये वो लोग होते है जो पैदा तो किसी और लिंग के साथ होते है लेकिन बड़े होने तक वो खुद को विपरित लिंग की तरह महसूस करने लगते हैं। और इसमें वो लोग भी आते हैं जो खुद का लिंग परिर्वतन भी करवा देते हैं।

Q का क्या मतलब है?
Q का मतलब ‘क्वीयर' है। ऐसा इंसान जो अपनी पहचान के साथ अपनी सेक्सुअल प्रिफरेंस को लेकर भी कंफ्यूज होते है। ये लोग खुद को आदमी, औरत या ‘ट्रांसजेंडर' की केटेगरी में नहीं रखकर देखते हैं। और न ही ये ‘लेस्बियन', ‘गे' या ‘बाईसेक्सुअल' होते है। इसलिए उन्हें ‘क्वीयर' कहते हैं। इसके अलावा ‘Q' को ‘क्वेश्चनिंग' भी समझा जाता है। जिसके मन में खुद के सेक्सुअल प्रिफरेंस को लेकर खूब सवाल हो।



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