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HIV + से युंगाडा की मिस यंग पॉजीटिव बनने का शरीफा का सफर....
एचआईवी मेरा सीक्रेट नहीं हैं, अगर मुझे कुछ छुपाना हो तो मेरे पास और भी कई राज़ हैं।'’ ये कहना है शरीफा नलुगो का। जो कि युगांडा की मिस यंग पॉजिटिव है, वो जन्मजात एचआईवी ग्रसित हैं।
आज वो दुनिया और दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। में बहुत सारे लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत हैं, वो लोगों की आदर्श बन चुकी हैं। उनकी जीवन की कहानी कई लोगों को प्रेरणा दे सकती हैं कि वो किस तरह अपने दर्द और मुसीबतों से बाहर निकली और लोग इससे ही सीख लेते हैं। एक शब्द में कहें तो वो इस संसार के लिए 'वरदान’ हैं।

1 साल की उम्र में उठ गया था पिता का साया..
शरीफा का जन्म 1995 में युगांडा के कम्पाला में मेंगो अस्पताल में हुआ थ। जब वह मात्र एक साल की थी, तब उनके पिता की मृत्यु एड्स के कारण हो गई थी। उस समय वो और उसकी मां दोनों ही स्वस्थ थे। लेकिन जल्दी ही वो दोनों भी बीमार रहने लगे।

मां बेटी निकली पॉजीटिव
शुरूआत में, मेरी मां ने निर्णय लिया कि वो अपना एचआईवी टेस्ट करवाएगी; टेस्ट करवाने पर परिणाम पॉजिटिव आया। पर इसके बाद भी उन्होंने अपना इलाज करवाना शुरू नहीं किया और न ही कोई दवाई ली क्योंकि वो डेनियल में रहना चाहती थीं। वो उम्मीद करती थी कि ये सत्य नहीं है। लेकिन 6 साल की उम्र में शरीफ़ा का स्वास्थ्य भी बिगड़ने लगा। जब उसने अपना टेस्ट करवाया तो वह भी पॉजिटिव ही आया।

लोगों ने साथ नहीं दिया..
इसके बाद, मां बेटी दोनों का उपचार होना शुरू हुआ, और उनकी दवाई शुरू हो गई। उस दौरान, उनके अपने ही लोग उनसे दूर होने लगे और उन्हें अमानवीय तरीके से ट्रीट करने लगे। जब उन्हें अपने लोगों की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वो लोग उन दोनों को छोड़कर चले गए।

लोगों में नहीं जानकारी
यहां वो एक बात विशेष रूप से कहती हैं। जब ये सब हो रहा था तब मेरे बाबा का व्यवहार सबसे ज्यादा रूखा था, लेकिन इस बात के लिए मैं उन्हें ब्लेम नहीं करती। वो कहती हैं, ‘इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। ऐसा उनकी अल्प जानकारी के कारण हुआ, क्योंकि वो एचआईवी के बारे में सही से जानते नहीं हैं। उन्हें इस बीमारी के बारे में सही से पता नहीं हैं। वे इस बीमारी से डरे हुए थे और हम लोगों से भी; कहीं ये लोग हमें ये बीमारी न लगा दें।'

आगे बढ़ने में मदद की।
शरीफ़ा के जीवन में उनकी मां नकलुबो मगीब का रोल बहुत अहम था। वो बहुत सकारात्मक महिला थी और हमेशा एक स्ट्रांग रूप में शरीफ़ा को सहारा देती रहीं। जब शरीफ़ा और उसकी मां को बाबा ने घर से निकाल दिया तो उन दोनों ने शरीफा की सौतेली नानी के घर में शरण ली। ये घर शरीफा की सौतेली नानी का था। ये महिला बहुत स्नेही और प्रेम से भरी हुई थी और दोनों को प्यार से रखती थीं। वहां रहने के दौरान, शरीफ़ा की मां इस बात का पूरा ध्यान रखती थीं कि उस पर कोई स्ट्रेस न पड़े।

दोस्तों ने स्वीकार किया उसे
जब वो स्कूल गई तो शुरूआत में इस बारे में किसी को कुछ नहीं बताया गया। लेकिन धीरे-धीरे बात खुल गई और उसके मित्रों के मन में हजारों सवाल उठने लगे। वो सबका जवाब नहीं दे सकती थी और परेशान रहने लगी। लेकिन उसके दोस्तों ने उसकी स्थिति को समझा कि वो अभी इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए समय चाहती है और उसे उसकी बीमारी के साथ दोस्त स्वीकार कर लिया।

बनी मिस यंग पॉजीटिव
आत्म-स्वीकृति के बाद, उसके जीवन में अनोखा बदलाव आ गया। आज हम उसे एक आर्टिस्ट/ एक्टिीविस्ट के रूप में जानते हैं, वो यंग जेनरेशन को एचआईवी के बारे में पढा़ती हैं और एक स्टीग्मा से कोप-अप करने के बारे में रोगियों को बताती हैं। वो लोगों के ह़क में अभियानों को चलाती हैं। 2014 में, उनके इस कार्य के लिए उन्हें युगांडा में युगांडा नेटवर्क के यंग पीपुल नामक संस्था जो कि एचआईवी ग्रसित लोगों के लिए काम करती है, उनकी और से शरीफा को मिस यंग पॉजीटिव ब्यूटी और पेग्नेंट से नवाजा गया था।



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