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अरुंधती और मेनका जिन्होंने धारा 377 के खिलाफ कोर्ट में जीती थी जंग, रियल लाइल में है कपल
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) समुदाय के हक में बहुत बड़ा फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट में इस धारा के खिलाफ लड़ने वाली दोनों नामी महिला वकील मेनका गुरुस्वामी और अरुधंती काटजू हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान पहली बार अपने निजी संबधों को सावर्जनिक तौर पर स्वीकार किया है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2013 के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें समलैंगिकता को अपराध माना गया था। आईपीसी की धारा 377 को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे खत्म कर दिया केस लड़ने वाली दोनों वकीलों ने एक इंटरव्यू में माना कि उनमें समलैंगिक संबंध हैं।

अरुंधती काटजू, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू की भतीजी हैं। वहीं मेनका गुरुस्वामी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सलाहकार रह चुके हैं।
इंटरव्यू में रखी मन की बात
इंटरव्यू में मेनका ने कहा कि " 2013 में आया फैसला एक वकील के तौर पर और देश के नागरिक के तौर पर और व्यक्तिगत तौर पर मेरे लिए नुकसानदायक था। 2018 में एलजीबीटीक्यू समुदाय के हक में इस फैसले के आने से पहले तक 'अपराधी' सा बोध होता था। ऐसा लगता था कि एक अपराधी होने के बावजूद भी दूसरे मामलों की वकालत करने एक वकील के रूप में कोर्ट में वापस जाना पड़ता है। ''

टाइम्स ने भी 100 प्रभावशाली लोगों में दी जगह
अप्रेल में अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट जारी की थी। जिसमें समलैंगिक समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने वाली इन दोनों वकील अरुंधति काटजू और मेनका गुरुस्वामी के नाम शामिल थे।



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